भूत को भूल जाइए, क्योंकि वो आपके हाथ से निकल चुका है

भूत को भूल जाइए, क्योंकि वो आपके हाथ से निकल चुका है! भविष्य को भूल जाइए, क्योंकि वो आपकी पहुँच से बहार है! वर्तमान को नियंत्रण करिए! अभी एकदम अच्छे से रहिये! यही बुद्धिमान लोगों का रास्ता है।
कितने नादान है हम दुःख आता है तो, अटक जाते है।औऱ सुख आता है तो,भटक जाते हैं।
खेत में बोए हुए सभी बीज अंकुरित नहीं होते..परंतु जीवन में किए गए सत्कर्म का एक भी बीज व्यर्थ नहीं जाता ..!!.               सोच बड़ी रखो। क्योंकि जहां तक सोचोगे, वहां तक पहुंचोगे।
हँसते रहें मुस्कुराते रहें स्वस्थ रहें l

तन की सेवा *सत‌गुरु* और साध संगत के चरणो में अर्पण

 💥🪷🪷🪷 *सतनाम🪷🪷🪷💥 एक बहन ने पूछा है मालिक का नाम लेने के क्या फायदे हैं???.... भाई ऐसा विश्वास करें कि मालिक दाता जी अपने नाम में पूरे के पूरे समाये हुए हैं, यानी उनकी संपूर्ण शक्ति नाम में विराजमान रहती है। अब जो भाई निस्वार्थ भाव से विश्वास व प्रेम पूर्वक उठते, बैठते, चलते, फिरते, काम करते किसी भी परिस्थिति में हो अपने मालिक का नाम लेता है, और उन्हें पुकारता है, और उनकी शरण हो जाता है, तो मालिक दाता जी ऐसे साधक की सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लेते हैं, और नाम लेने वाला साधक जन्म मरण तथा सभी दुखों से पार हो जाता है। प्रेम पूर्वक मालिक का नाम लेते रहे शर्त एक है कि नाम की परीक्षा न करें कि मैं बहुत नाम ले रहा हूं अभी मेरे अंदर कुछ नहीं हुआ ऐसा भाव ना रखें। कल्याण निश्चित होगा...


 !! *आज* *के* *विचार* !!

 *सेवा* - *सिमरन* - *संगत* 

तन की सेवा *सत‌गुरु* और साध संगत के चरणो में अर्पण
करने से मनुष्य तन से सुखी हो जाता है। मन से सतगुरु का गुणगान करने से मन में शान्ति आ जाती है और धन की सेवा करने से मनुष्य के पास धन की कमी नहीं रहती है। इस प्रकार मनुष्य के जीवन में सतगुर की अपार कृपा से साध संगत और सिमरन करने से जब सेवा भावना भी आ जाती है। तो इससे मनुष्य के जीवन में खुशियां आ जाती है काम, क्रोध ,लोभ, मोह और अंहकार , परोपकार भक्ति और नम्रता, प्रीत, सत्कार में बदलने से मनुष्य महापुरुष बन ‌जाता है !!
💥💥💥💥💥💥
 
शब्द को परखना* 

 *चर्चा करै शब्द को परखै,* 
 *निर्भय नाम सीख से निरखै ।* 

 निर्वाण ज्ञान की यह सीख केवल शब्द की चर्चा करने की नहीं, *शब्द को अपने जीवन में परखने* की है । नाम की सच्ची सीख वही है जो सुरति को भय, भरम और मन की चंचलता से निकालकर *निर्भय सत में टिकाए ।* 

 *भावार्थ :* बोलना सरल है, सुनना भी सरल है; पर *शब्द की कसौटी पर अपनी सुरति, अपनी चाल और अपना जीवन परखना ही असली साधना है ।* 

 *सार : शब्द की चर्चा बाहर होय, परख भीतर होय; और जब नाम की सीख भीतर उतरै — तभी सुरति निर्भय होय ।*


सब जग सत् स्वरूप है* 

 ज्ञानी संसार से माने हुए मैं और मेरा सम्बन्ध का त्याग करता है; भक्त एक *सत् करतार* के अतिरिक्त किसी से अपना सम्बन्ध मानता ही नहीं । 

 ज्ञानी कहता है — *न मैं, न मेरा ।* 
 भक्त कहता है — *सब तू, सब तेरा ।* 

 ज्ञानी अहंता - ममता छोड़ता है, भक्त अपने समस्त अस्तित्व को *सत् करतार के प्रेम, अपनत्व और पूर्ण समर्पण* में अर्पित कर देता है । अन्ततः दोनों में मैं मिटता है और एक *सत् करतार ही अपना सर्वस्व* रह जाता है ।

मन और विवेक

 *मन* *और* *विवेक* "

 "*मन*" एक अथाह सागर है, जिसमें चाहनाये लहरों की तरह निरंतर उठती-गिरती रहती हैं। अधिकांश लोग इन चाहनाओं  और भौतिक लालसाओं में उलझकर जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटक जाते हैं और आत्मिक शांति खो बैठते हैं।

 इस चाह के सागर से वही पार हो सकता है, जिसके हृदय में *विवेक* , *आत्म* - *जागरूकता* *और* *सही* - *गलत* *का* *ज्ञान* *हो* । *विवेक* ही मन को स्थिर करता है और जीवन को सही दिशा देता है।

*आज* *के* *विचार* !!

 "*धैर्य*" *व्यर्थ* *नहीं* *जाता* 

हर अच्छी चीज तुरंत नहीं मिलती। कुछ फल समय लेते हैं ताकि तुम्हारे भीतर भी उतनी ही परिपक्वता आ सके।
💥💥💥💥💥💥💥

बिल्व वृक्ष

1. बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते l
2. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है l
3. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है l
4. चार, पांच, छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्र पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है l 
5. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है एवं बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
6. सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता है।
7. बेल वृक्ष को सींचने से पित्र तृप्त होते है।
8. बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
9. बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।
10. जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी शिव लिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी जीव सभी पापों से मुक्त हो जाते है l
11. बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।
कृपया बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाये । बिल्व पत्र के लिए पेड़ को क्षति न पहुचाएं l

शिवजी की पूजा में ध्यान रखने योग्य बात l 

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को कौन सी चीज़ चढाने से मिलता है क्या फल - 
किसी भी देवी-देवता का पूजन करते समय उनको अनेक चीज़ें अर्पित की जाती है। प्रायः भगवान को अर्पित की जाने वाली हर चीज़ का फल अलग होता है। शिव पुराण में इस बात का वर्णन मिलता है की भगवान शिव को अर्पित करने वाली अलग-अलग चीज़ों का क्या फल होता है। शिवपुराण के अनुसार जानिए कौन सा अनाज भगवान शिव को चढ़ाने से क्या फल मिलता है:
1. भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
2. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
3. जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
4. गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद गरीबों में वितरीत कर देना चाहिए।

शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से उसका क्या फल मिलता है -
1. ज्वर (बुखार) होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।
2. नपुंसक व्यक्ति अगर शुद्ध घी से भगवान शिव का अभिषेक करे, ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा सोमवार का व्रत करे तो उसकी समस्या का निदान संभव है।
3. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिश्रित दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।
4. सुगंधित तेल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में वृद्धि होती है।
5. शिवलिंग पर ईख (गन्ना) का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।
6. शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
7. मधु (शहद) से भगवान शिव का अभिषेक करने से राजयक्ष्मा (टीबी) रोग में आराम मिलता है।

शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन का फूल चढ़ाया जाए तो उसका क्या फल मिलता है -
1. लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
3. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
4. शमी पत्रों (पत्तों) से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
6. जूही के फूल से शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
7. कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर
 सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
10. लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है।
11. दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।💐💐
 आचार्य

हर गंभीर शारीरिक कष्ट और नकारात्मक

हर गंभीर शारीरिक कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाएगा 'लोना चमारी रोग नाशक मंत्र'! ✨

जय गुरु गोरखनाथ! 🙏✨

क्या आप या आपके परिवार में कोई लंबे समय से शारीरिक दर्द, सिरदर्द या अज्ञात बीमारियों से परेशान है? सनातन परंपरा में 'शाबर मंत्रों' को सबसे शक्तिशाली और तुरंत असर दिखाने वाला माना गया है। आज मैं आपके साथ साझा कर रहा हूँ "लोना चमारी रोग नाशक शाबर मंत्र", जो तन और मन के हर मर्ज को पल भर में दूर करने की क्षमता रखता है।

📜 दिव्य शाबर मंत्र:

    "ॐ नमो आदेश गुरु को।
    लोना चमारीन जगत की माई, जहाँ जाय तहाँ करे सवाई।
    बैठी आसन, बांधे काया, छप्पन कोटि रोग को भगाया।
    सिर की पीड़ा, अंग का दर्द, पेट की व्याधि, तन का मर्ज,
    पल में भागे, क्षण में जाए, गुरु गोरखनाथ की दुहाई।
    लोना चमारीन का मंत्र साचा, पिंड काचा।
    फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।"

🌟 इस मंत्र के अद्भुत लाभ (Benefits):

शारीरिक कष्टों से मुक्ति: सिरदर्द, पेट दर्द, जोड़ों का दर्द और शरीर की किसी भी गुप्त व्याधि में यह तुरंत राहत देता है।

नकारात्मक ऊर्जा का नाश: अगर किसी बीमारी पर दवाई असर नहीं कर रही है या नजर दोष/बुरी नजर के कारण स्वास्थ्य खराब है, तो यह मंत्र उसे काट देता है।

मानसिक शांति और सुरक्षा कवच: यह मंत्र शरीर के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा (काया बंधन) बनाता है, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है।

🔧 प्रयोग और उपयोग की सरल विधि (How to Use):

घर पर करने की बेहद आसान विधि:

सिद्ध काल (पावर बढ़ाने के लिए): शाबर मंत्र वैसे तो स्वयं सिद्ध होते हैं, लेकिन किसी भी शुभ शनिवार, ग्रहण, होली या दीपावली के दिन इसे बस १०८ बार जप लें, तो इसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

प्रयोग कैसे करें: एक तांबे के लोटे या पात्र में साफ पानी रखें। इस मंत्र को ७ या ११ बार पूरी श्रद्धा से पढ़ें और हर बार पानी पर 'फूंक' (फूत्कार) मारें।

उपयोग: इस अभिमंत्रित जल को बीमार व्यक्ति को पिलाएं और थोड़ा सा पानी उसके शरीर पर छिड़क दें। पुरानी से पुरानी बीमारी में आराम मिलना शुरू हो जाएगा और तबियत सुधरने लगेगी।

📢 आखरी बात: जागिए और अंधविश्वास से बचिए!

किसी पाखंडी के सामने हाथ जोड़ने की बजाय, अपने भीतर के विश्वास को जगाइए। महादेव को गुरु बनाइए, मंत्र का पाठ कीजिए और रोगों को जड़ से भगाइए।

पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे दबाकर शेयर करें ताकि किसी और भाई-बहन की जेब कटने से बच जाए!

(Disclaimer: यह धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था पर आधारित उपाय है। गंभीर बीमारियों में डॉक्टरी इलाज और दवाओं को प्राथमिकता अवश्य दें।)

कोर्ट-कचहरी के चक्कर से थक गए हो

कोर्ट-कचहरी के चक्कर से थक गए हो? लोना चमारी का यह शाबर मंत्र पलटेगा पासा! ⚖️

राम-राम भाइयों और बहनों! 🙏✨

आजकल की जिंदगी में ना... सब कुछ सही चल रहा होता है, लेकिन अचानक एक कोर्ट-कचहरी या सरकारी विवाद का चक्कर ऐसा फंसता है कि अच्छे-भले इंसान की रातों की नींद और दिन का चैन गायब हो जाता है। वकील की फीस भरते-भरते जेब ढीली हो जाती है, तारीख पर तारीख मिलती है, पर इंसाफ नहीं मिलता।

अगर आप भी किसी ऐसे ही सरकारी पंगे, झूठे मुकदमे या कोर्ट के चक्कर में फंसकर परेशान हो चुके हैं, तो अब निराश मत होइए! हमारे सनातन धर्म और ग्रामीण संस्कृति में शाबर मंत्रों को बहुत ही सीधा और अचूक माना गया है।

आज हम आपके लिए लेकर आए हैं 'लोना चमारी' का वो सिद्ध शाबर मंत्र, जो कोर्ट-कचहरी और सरकारी अधिकारियों को आपके पक्ष में मोड़ने की अद्भुत ताकत रखता है। शाबर मंत्रों की सबसे बड़ी खासियत यही है कि ये बहुत ही सरल, ग्रामीण भाषा में होते हैं और इनका असर एकदम रॉकेट की तरह तुरंत होता है!

📜 महा शक्तिशाली विजय मंत्र:

    "सत्य नाम आदेश गुरु का। हाकिम मोहुँ, कचहरी मोहुँ, मोहुँ सब संसार।
    लोना चमारी आगे चले, जीत हमारी होवे द्वार।
    शब्द सांचा, पिंड कांचा, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।"

🛠️ सिद्ध करने की सरल विधि (Method)

इस मंत्र को एक्टिवेट करना बहुत आसान है, बस आपकी श्रद्धा पक्की होनी चाहिए:

शुभ दिन: इस प्रयोग को किसी भी शनिवार, मंगलवार या अमावस्या की रात से शुरू करें।

समय: रात के 9 बजे के बाद का समय सबसे उत्तम है।

तैयारी: अपने घर के एकांत कोने या पूजा कक्ष में दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें। सामने एक सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

जाप: इस मंत्र का पूरी श्रद्धा के साथ 108 बार (एक माला) जाप करें। लगातार 7 दिनों तक ऐसा करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है।

⚖️ कोर्ट जाते समय प्रयोग (How to Use)

जब भी आपकी कोर्ट में तारीख हो या किसी सरकारी अधिकारी से बड़े काम के लिए मिलना हो, तो घर से निकलने से पहले:

हाथ-मुंह धोकर स्वच्छ हो जाएं।

इस मंत्र को मन ही मन 7 बार बोलें और अपने छाती पर फूंक मार लें।

घर से निकलते समय अपना दाहिना पैर (Right Foot) सबसे पहले दहलीज से बाहर रखें।

💎 इस मंत्र के चमत्कारी लाभ (Benefits)

अधिकारियों का सम्मोहन: इस मंत्र के प्रभाव से सामने वाला हाकिम (जज या सरकारी अफसर) आपकी बात को ध्यान से सुनता है और आपके प्रति नरम रहता है।

झूठे मुकदमों से मुक्ति: अगर किसी ने आपको जलन की वजह से गलत केस में फंसाया है, तो सच की जीत होती है।

दुश्मन का हौसला पस्त: आपके विरोधी और शत्रु कोर्ट के अंदर आपके सामने आते ही ठंडे पड़ जाएंगे, उनका आत्मविश्वास डगमगा जाएगा।

मानसिक शांति: कोर्ट-कचहरी का जो डर आपके दिमाग में बैठा है, वो पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

🔮 जीवन की हर समस्या का पक्का समाधान!

भाइयों, मंत्र अपना काम करते हैं, लेकिन जब तक आपकी कुंडली के ग्रह-नक्षत्र (जैसे शनि, राहु और मंगल) सही नहीं होंगे, तब तक संघर्ष बना रहता है। अगर कोर्ट-कचहरी का मामला बहुत ज्यादा उलझ गया है या जीवन में नौकरी, प्यार, सेहत और तरक्की की रुकावटें खत्म नहीं हो रहीं, तो सीधे एक्सपर्ट की सलाह लें।

📞 Call or WhatsApp now at: 094387 41641

श्री हनुमान जी का यह शाबर मंत्र

श्री हनुमान जी का यह शाबर मंत्र बहुत ही सिद्ध और तुरंत असर करने वाला मंत्र है ! आप पर किसी प्रकार का संकट या बाधा आई हो . कर्ज का कारण या लड़ाई झगड़ा होने वाला हो. भूत प्रेत की बाधा आई हो. प्राण संकट मैं हो. शरीर बीमारियों से ग्रस्त हो तो निम्न मंत्र का 21 बार उच्चारण करते हुए ताली बजाकर अपने शरीर पर फूंक मारे इस प्रकार करने से हर प्रकार का भय दूर होता है !

मंत्र इस प्रकार है-
ऊँ नमो वज्र का कोठा जिसमें पिंड हमारा बैठा । ईश्वर कुंजी ब्रह्मा का ताला मेरे आठो याम का याति , हनुमंत रखवाला ।। 

हमारे गुरु शिक्षण संस्थान के पेज पर दिए गए मंत्रों मैं अगर किसी को कोई शंका होती है तो कोई भी अभ्यास करके एक बार जरूर आजमाएं प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नजर आएगा !

तंत्र मंत्र यंत्र साधक ज्योतिष शास्त्र वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सा मंत्र चिकित्सा यज्ञ चिकित्सा सूर्य चिकित्सा नेचुरोपैथी चिकित्सा पंचगव्य चिकित्सा प्राकृतिक चिकित्सा नाडी परीक्षण विशेषज्ञ
ग्रह क्लेश व्यापार बंधा है तो आप संपर्क कर सकते हैं 9424698865

हनुमान शाबर रक्षा मंत्र — भय, बाधा और अचानक संकट से सुरक्षा की सिद्ध साधना

यह शाबर मंत्र हनुमान वीर की रक्षा-शक्ति से जुड़ा हुआ अत्यंत प्रभावी मंत्र माना जाता है। यह मंत्र विशेष रूप से डर, टोना-टोटका, प्रेत-बाधा, शत्रु भय, अचानक होने वाली अनहोनी और मानसिक घबराहट की स्थिति में प्रयोग किया जाता है। शाबर परंपरा में यह मंत्र तुरंत प्रभाव देने वाला माना गया है, बशर्ते इसे विधि और नियम से सिद्ध किया जाए।

मंत्र (जैसा है, वैसा ही):
ओम् चौकी हनुमंत वीर की बाण ध्वजा फहराय।
मारू मारू मारुतिसुत मुष्टिक शत्रु नशाय।
मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंत वीर।।
चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करे शरीर।।
टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाइन डाइ।
सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई।।

यह मंत्र रक्षा कवच की तरह कार्य करता है। इसमें हनुमान जी के साथ श्रीराम, सुदर्शन चक्र और चौकी (रक्षा-घेरा) का आह्वान किया गया है, जिससे बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार की बाधाएँ निष्फल मानी जाती हैं।

साधना शुरू करने से पहले आवश्यक बातें
इस मंत्र की साधना से पहले गुरु गोरखनाथ का पूजन आवश्यक माना गया है, क्योंकि शाबर परंपरा नाथ संप्रदाय से जुड़ी है। साधना के पहले दिन गुरु गोरखनाथ की चालीसा एक बार अवश्य पढ़ें। उसके बाद भगवान गणेश का पूजन करें, ताकि साधना निर्विघ्न पूर्ण हो।

साधना के नियम
साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन आवश्यक है। साधना शांत स्थान पर करें और साधना काल में अनावश्यक क्रोध, झूठ और तामसिक आचरण से बचें।

जप विधि (11 दिन की साधना)
साधना प्रतिदिन एक ही समय करें। लाल या काले आसन पर बैठें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें।
इस मंत्र का रोज़ 3 माला जप करें।
यह क्रम लगातार 11 दिन तक बिना छोड़े करना है।

जप के समय दीपक अवश्य जलाएं। मन को शांत रखें और केवल रक्षा भाव रखें — किसी को हानि पहुँचाने का संकल्प न करें, क्योंकि यह मंत्र रक्षा के लिए है, आक्रमण के लिए नहीं।

अंतिम दिन हवन विधि
11वें दिन जप के बाद हवन किया जाता है।
हवन सामग्री:
– गुग्गल
– घी

हवन करते समय इसी मंत्र से आहुति दें। हवन के अंत में एक खड़ा नींबू काटकर हवन कुंड में डाल दें। यह क्रिया बाधा-विच्छेदन और रक्षा-सिद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

इस प्रक्रिया के बाद मंत्र को सिद्ध माना जाता है।

सिद्धि के बाद प्रयोग विधि
जब भी अचानक डर, बाधा, घबराहट, नकारात्मक ऊर्जा या अनजाना भय महसूस हो —
इस मंत्र को 3 बार पढ़कर अपनी छाती पर हल्की फूंक मार दें।

या
पानी पर 3 बार मंत्र पढ़कर फूंक मारें और वह पानी पी लें।

रक्षा धारण विधि (बहुत महत्वपूर्ण)
एक लाल धागा लें।
उसमें 21 गांठें लगाएं।
हर गांठ पर 11 बार मंत्र पढ़ें।
इसके बाद उस धागे को अपने शरीर पर धारण करें।

यह धागा चलते-फिरते भी रक्षा कवच की तरह कार्य करता है।

तंत्र मंत्र यंत्र साधक ज्योतिष शास्त्र वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सा मंत्र चिकित्सा यज्ञ चिकित्सा सूर्य चिकित्सा नेचुरोपैथी चिकित्सा पंचगव्य चिकित्सा प्राकृतिक चिकित्सा नाडी परीक्षण विशेषज्ञ
ग्रह क्लेश व्यापार बंधा है तो आप संपर्क कर सकते हैं 9424698865

सबसे शक्तिशाली और प्रामाणिक हनुमान शरीर कीलन और घेरा साबर मंत्र

तंत्र साधना और उग्र साबर मंत्रों के जाप के समय सुरक्षा घेरा बनाना अनिवार्य है। तीव्र मंत्रों की ऊर्जा से कई बार आसपास की अदृश्य या नकारात्मक शक्तियां आकर्षित होती हैं। सुरक्षा घेरा मंत्र आपके चारों ओर एक अभेद्य कवच बना देता है, जिससे कोई भी बुरी शक्ति साधना में विघ्न नहीं डाल पाती और न ही आपको कोई नुकसान पहुँचा पाती है।

यहाँ तंत्र शास्त्र का सबसे शक्तिशाली और प्रामाणिक हनुमान शरीर कीलन और घेरा साबर मंत्र दिया जा रहा है।महाशक्तिशाली सुरक्षा घेरा साबर मंत्र

"ॐ नमो आदेश गुरु को। वज्र का कोठा, वज्र का ताला, वज्र की खाई। जहाँ बैठे हनुमान वीर, तहं आन न जाई। रक्षा करे राजा रामचंद्र, दुहाई लक्ष्मण वीर की। ७२ कोठे की किल्ली, जहाँ मेरा पिंड-प्राण रहे, तहां हनुमान वीर पहरा दे। दुहाई लोना चमारिन की, आन आन आदेश।"

सुरक्षा घेरा बनाने की अत्यंत सरल विधि साधना या मूल मंत्र का जाप शुरू करने से ठीक पहले आपको यह घेरा बनाना होता है:-

सामग्री:- अपने पास एक कटोरी में थोड़ा सा साफ जल रख लें, या थोड़ा शुद्ध सिंदूर, या फिर साबुत पीली सरसों के दाने ले लें।

अभिमंत्रित करना:- ऊपर दिए गए सुरक्षा मंत्र को 7 बार लगातार पढ़ें और हर बार कटोरी के पानी, सिंदूर या पीली सरसों पर फूंक (दम) मारें।

घेरा खींचना (3 तरीके - कोई भी एक चुनें):-

जल से:- अपने दाहिने हाथ की उंगली से अपने बैठने के आसन के चारों ओर जमीन पर पानी की एक गोल रेखा (सर्किल) खींच दें।

सरसों से:- अभिमंत्रित पीली सरसों के दानों को अपने आसन के चारों ओर गोल आकार में बिखेर दें।

चाकू/लोहे की वस्तु से:- यदि जल या सरसों न हो, तो किसी लोहे की साफ छुरी या लोहे की कील से अपने चारों ओर जमीन पर गोल घेरा खींच लें।

जब तक आपकी साधना पूरी नहीं हो जाती, आपको इस घेरे से बाहर नहीं निकलना है। साधना समाप्त होने के बाद भगवान को प्रणाम करके आप घेरे से बाहर आ सकते हैं।

इस सुरक्षा कवच के अद्भुत लाभ भय का नाश:- जाप के दौरान होने वाली अजीब आवाजों या डरावने आभासों से यह पूरी तरह रक्षा करता है।

एकाग्रता:- मन विचलित नहीं होता और साधना में पूरा ध्यान लगता है।

तांत्रिक पलटवार से सुरक्षा:- यदि कोई आपके काम में तांत्रिक बाधा डाल रहा है, तो यह मंत्र उस नकारात्मक ऊर्जा को आपके शरीर को छूने भी नहीं देता।अब आपकी असाध्य कार्य सिद्धि साधना पूरी तरह सुरक्षित है।

गुरु योगी अंचलरुद्रनाथ तंत्र मंत्र यंत्र साधक ज्योतिष शास्त्र वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सा मंत्र चिकित्सा यज्ञ चिकित्सा सूर्य चिकित्सा नेचुरोपैथी चिकित्सा पंचगव्य चिकित्सा प्राकृतिक चिकित्सा नाडी परीक्षण विशेषज्ञ 
9424698865

असाध्य कार्य सिद्धि महाशक्तिशाली साबर मंत्र

असाध्य (असंभव) कार्यों को सिद्ध करने के लिए तंत्र शास्त्र में वीर साधना और काली साबर मंत्र को सबसे अचूक माना गया है। जब इंसान के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं और काम पूरी तरह असंभव लगने लगता है, तब यह तीव्र प्रयोग बंद रास्तों को बलपूर्वक खोल देता है।यहाँ असाध्य कार्यों के लिए सबसे शक्तिशाली साबर मंत्र और उसकी विशेष विधि दी जा रही है।

असाध्य कार्य सिद्धि महाशक्तिशाली साबर मंत्र

"सत्य नाम आदेश गुरु को। काली माई, जोत सवाई। मेरा कारज (यहाँ अपने असंभव काम का नाम लें) न सधै, तो कालभैरव की दुहाई। दुहाई कामरू कामाख्या माई की, दुहाई गौरा पार्वती की। शब्द सांचा, पिंड कांचा, फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।"

विधि:- केवल 3 शनिवार का गुप्त प्रयोग

असंभव कार्यों के लिए यह प्रयोग लगातार 3 शनिवार को किया जाता है। यह बेहद सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली है।

समय और दिन:- शनिवार की रात 10 बजे के बाद इस साधना को शुरू करें।

दिशा और वस्त्र:- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। 
काले या नीले रंग के कपड़े पहनें।

सामग्री:- एक मिट्टी के दीये में सरसों का तेल डालकर जलाएं। 

सामने मां काली या भैरव जी का मानसिक ध्यान करें। 

भोग के रूप में दो लौंग और एक बताशा दीये के पास रखें।

जाप संख्या:- रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का 3 माला (324 बार) जाप करें। 

तीनों शनिवार को यह प्रक्रिया दोहराएं।

इस साधना के अचूक नियम गुप्त रखें:- इस कार्य और साधना के बारे में अपने परिवार में भी किसी को न बताएं।

 तंत्र में गोपनीयता ही उसकी शक्ति है।

सकारात्मक सोच:- जाप के दौरान मन में यह दृढ़ विश्वास रखें कि आपका असंभव काम अब हर हाल में पूरा होने जा रहा है।

साधना के बाद:- जब 3 शनिवार पूरे हो जाएं, तो किसी चौराहे पर या पीपल के पेड़ के नीचे जाकर एक नींबू काट कर छोड़ आएं और पीछे मुड़कर न देखें।

यह प्रयोग किसी भी कानूनी अड़चन, गंभीर संकट, डूबा हुआ धन, या सालों से रुके हुए बेहद कठिन काम को अनुकूल बनाने की क्षमता रखता है।

                          नजर बुद्धि बांधने का शाबर मंत्र 
विरोधी की नजर और बुद्धि बांधने का अचूक तांत्रिक प्रयोग
नज़र बांधने (सम्मोहन या विरोधियों की दृष्टि और बुद्धि को नियंत्रित करने) के लिए भैरव सिद्ध शाबर मंत्र का प्रयोग बहुत तीव्र माना जाता है। इस मंत्र का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि सामने वाला व्यक्ति आपके प्रभाव में आ जाए, उसकी कुदृष्टि नष्ट हो जाए, या वह आपके विरुद्ध कोई गवाही या गलत कदम न उठा सके।

यहाँ नज़र बांधने का प्रामाणिक भैरव शाबर मंत्र और उसकी संपूर्ण प्रयोग विधि दी गई है:-

सिद्ध भैरव शाबर मंत्र (नज़र बांधने का)

"ॐ नमो आदेश गुरु को।भैरव बाबा वीर, हाथ में लिए तीर।आगे बांधूं, पीछे बांधूं, बांधूं दुष्ट की नजर।देखे जो कुदृष्टि से, उसकी आंख हो जाए पत्थर।चले मंत्र, फुरे वाचा, देखूं भैरव बाबा तेरे इल्म का तमाशा।"

मंत्र को सिद्ध करने की विधि इस मंत्र को पहले से सिद्ध करना होता है ताकि आवश्यकता पड़ने पर यह तुरंत काम करे।

शुभ समय:- किसी भी ग्रहण काल, दीपावली, होली, या शनिवार की रात (10 बजे के बाद)।

स्थान:- घर का कोई एकांत कमरा या भैरव मंदिर।सामग्री: काले हकीक या रुद्राक्ष की माला, सरसों के तेल का दीपक, और भैरव जी को भोग के लिए गुड़-चना या इमरती।

जप संख्या:- इस मंत्र की 5 माला का जप करके इसे सिद्ध कर लें। साधना के समय मुख दक्षिण दिशा की ओर रखें।

कार्य के समय प्रयोग करने के तरीके जब मंत्र सिद्ध हो जाए, तो आप स्थिति के अनुसार नीचे दिए गए तरीकों से इसका प्रयोग कर सकते हैं:-

1. कोर्ट या शत्रु के सामने जाते समय अदालत जाने से पहले या विरोधी के सामने जाने से पहले थोड़ा सा साफ पानी या सफेद भस्म (विभूति) हाथ में लें।

इस मंत्र को 7 बार पढ़ें और हर बार पानी या भस्म पर फूँक मारें (इसे अभिमंत्रित करना कहते हैं)।

उस पानी को पी लें या भस्म का तिलक लगाकर घर से निकलें। सामने वाले की नज़र और बुद्धि आपके पक्ष में बंध जाएगी।

2. कुदृष्टि (बुरी नज़र) से बचने के लिए 

यदि आपको लगता है कि किसी की बुरी नज़र आपके काम या आप पर है, तो 7 साबुत सूखी लाल मिर्च लें।अपने ऊपर से सिर से पैर तक 7 बार उतारें (वारें) और हर बार इस मंत्र को पढ़ें। इसके बाद उन मिर्चों को जलती हुई आग में डाल दें।

अनिवार्य नियम और सावधानियां

गलत इरादा न रखें:- इसका प्रयोग केवल अपनी आत्मरक्षा और न्याय के लिए करें। किसी को बिना वजह सम्मोहित या नुकसान पहुंचाने के लिए करने पर इसका उल्टा प्रभाव हो सकता है।

गोपनीयता:- मंत्र और अपनी साधना को पूरी तरह गुप्त रखें।

मक्खी पहले तो गुड़ से लिपटी रहती है

 *आज* *के* *विचार* 

 *कबीर* *दास* *जी* *कहते* *हैं* कि मक्खी पहले तो गुड़ से लिपटी रहती है। अपने सारे पंख और मुंह गुड़ से चिपका लेती है लेकिन जब उड़ने प्रयास करती है तो उड़ नहीं पाती तब उसे अफ़सोस होता है। ठीक वैसे ही इंसान भी सांसारिक सुखों में लिपटा रहता है और अंत समय में में अफ़सोस होता है।
💥💥💥💥💥💥
  *आज* *के* *विचार* 

 *कबीर* *साहिब* *कहते* *हैं* कि केवल बातें करने से कुछ प्राप्त नहीं होता। मनुष्य को अपने जीवन में सही आचरण उतारना चाहिए। जैसे केवल "पानी-पानी" कहने से प्यास नहीं बुझती, पानी पीना पड़ेगा तभी प्यास बुझेगी। वैसे ही सच्ची साधना और आचरण के बिना आत्मिक लाभ नहीं मिलता। सच्चा मार्ग करनी में है, जपने में नहीं।

ये किलन मंत्र इतना प्रबल है

ये किलन मंत्र इतना प्रबल है कि एक माला में ही सिद्ध हो जाता है 
मंत्र : “कीलू कीलू महा कीलू ,कीलू अपनी काया
मरघट का मसान कीलू ,हनुमत करे छाया 
इस किलन मंत्र का जाप हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने करना है । लाल आसन ,लाल या सफेद वस्त्र। उत्तर मुख होकर बैठना है । लड्डू का भोग लगाना है।सभी का पंचोपचार पूजन करना है।रूद्राक्ष माला से , पॉच माला करनी है । केवल एक ही मंगलवार में सिद्ध हो जाएगा । ये प्रयोग मंगल वार रात्रि ठीक नौ बजे शुरू करना है। इसमें ये ध्यान रखे कि समय नौ बजे का हो।पूजन पाठ नौ से पहले शुरू कर देना। जाप नौ बजे शुरू हो जाना चाहिए। इन मंत्रो को अलग अलग मंगलवार को सिध्द करना है । आपको कम से कम 5 माला करनी है, किन्तु जो साधक अपनी शक्ति अधिक बढ़ा न चाहते है वे इसका 11, 21, 41, 51 माला अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते है । ये पूरा कार्य करने में सक्षम है ।जाप के बाद 1 माला हवन गुगल गुड घी मिलाकर करे
इसे सिद्ध करके किसी का भी इलाज किया जा सकता है छोटी मोटी झाडफूंक ये आसानी से करता है । इस मंत्र की सबसे अच्छी बात येहै कि इसके द्वारा यदि किसी को मंत्र से पढके धागा या गंडा दिया जाता है तो वो किसी भी सूतक यानि मरण और जनन दोनो सूतको मे काम करता है खण्डित नही होता । इसे पहन कर मरीज कही भी आ या जा सकता है । किसी दूसरे के ऊपर प्रयोग करते समय मंत्र मे अपनी काया की जगह अमुक की काया पढे और अमुक की जगह मरीज का नाम लें । ये एक मंत्र ही पूरी भगतई सम्भाल लेता है ,बस इसे ठीक से सिद्ध करने की जरूरत होती है ।

समय का चक्र और हमारे जीवन

समय का चक्र और हमारे जीवन की परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, शुरुआत करने की कोई अंतिम तिथि नहीं होती। अक्सर लोग किसी नए काम को शुरू करने, कोई नया हुनर सीखने या अपने सपनों को पूरा करने से सिर्फ इसलिए पीछे हट जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अब सही समय हाथ से निकल चुका है। लेकिन यह सत्य नहीं  है । 
जब तक हमारे भीतर जीवन की डोर यानी सांसें चल रही हैं, तब तक हर पल एक नया अवसर है।
असली शुरुआत किसी बाहरी तारीख या उम्र से नहीं, बल्कि हमारे 'मन की चाह' से होती है। जब मन में कुछ नया रचने, कुछ कर गुजरने या खुद को बदलने का पक्का इरादा जाग उठता है, तो वहीं से एक नया जीवन शुरू हो जाता है। इच्छाशक्ति और आत्मबल के सामने सब कुछ छोटा पड़ जाता है। जब तक भीतर का यह उत्साह और संकल्प जीवित है, तब तक अतीत की असफलताएं या बीता हुआ समय कोई मायने नहीं रखता। इतिहास गवाह है कि दुनिया में बड़े और क्रांतिकारी बदलाव अक्सर उन लोगों ने किए, जिन्होंने जीवन के उस पड़ाव पर शुरुआत की जहाँ बाकी लोग हार मानकर बैठ जाते हैं।
इसलिए खुद को कभी भी 'वक्त बीत जाने' के बहाने के पीछे नहीं छिपाना चाहिए। जीवन एक निरंतर बहती हुई नदी की तरह है, जिसमें हर मोड़ पर एक नई धारा फूटना संभव है। जब तक आपके भीतर कुछ बेहतर करने की तड़प और अपनी मंजिलों को पाने की आस जिंदा है, तब तक हर सुबह आपके लिए एक कोरा पन्ना लेकर आती है, जहाँ आप अपनी कहानी को नए सिरे से लिख सकते हैं। इसलिए, जब तक सांस बाकी है, तब तक उम्मीद और प्रयास का दामन थामे रखना ही जीवन की असली सार्थकता है।

ओम शांति। 
आपका हर पल मंगलमय हो।
शुभ रात्रि।

ॐ श्री हनुमते नमः

।। ॐ श्री हनुमते नमः ।।

जब दिमाग थक जाए और दिल परेशान हो, तब सिर्फ एक उपाय काम करता है — चिंतामणि हनुमान अष्टक।

जहाँ दवा काम नहीं करती, वहाँ हनुमान जी का यह अष्टक चमत्कार करता है।

।। चिंतामणिहनुमान अष्टकम् ।।

(हिन्दी अर्थ सहित)
​(१)
चिंतामणिं चित्तरत्नं भक्तानां कामदायकम्।
अज्ञानध्वंसममलं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥१॥
​(२)
विषादार्णवमग्नानां त्रातारं धैर्यवर्धनम्।
मानसोल्लासकर्तारं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥२॥
(३)
प्रज्ञाप्रदं महावीरं संशयच्छेदकारकम्।
सत्यसंकल्पसिद्ध्यर्थं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥३॥
(४)
रामभक्तिसुधासक्तं पूर्णकामं जगद्गुरुम्।
विशुद्धज्ञानसम्पन्नं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥४॥
(५)
अस्थिरत्वहरं देवं शान्तिसौख्यप्रदायकम्।
एकाग्रताकरं धीरं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥५॥
(६)
दुश्चिन्ताशमनं सौम्यं सर्वतापह्वरं प्रभुम्।
स्मरणमात्रसंतुष्टं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥६॥
​(७)
अनुभवरूपिणं दिव्यं सर्वसंस्कारदायकम्।
आत्मबोधप्रदं देवं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥७॥
(८)
चिंतामणिस्वरूपं तं चित्तविश्रामकारणम्।
भक्तानां हृदयावासं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥८॥

फलश्रुति
​यः पठेत् प्रातरुत्थाय अष्टकं भक्तिसंयुतः।
सर्वचिन्ताविनिर्मुक्तो धनधान्यसमन्वितः ॥

।। हिंदी में अर्थ ।।

​अर्थ: जो भक्तों के लिए 'चिंतामणि' रत्न के समान हैं, जो चित्त की मलिनता दूर कर सात्विक इच्छाएं पूर्ण करते हैं और अज्ञान के अंधकार का नाश करने वाले निर्मल स्वरूप हैं, उन मारुतात्मज को मैं नमन करता हूँ।1।।

​अर्थ: जो शोक और विषाद (Depression) के समुद्र में डूबे लोगों की रक्षा करने वाले, धैर्य को बढ़ाने वाले और मन में आनंद व उत्साह का संचार करने वाले हैं, उन हनुमान को मेरा प्रणाम।2।।

​अर्थ: जो उत्तम बुद्धि (प्रज्ञा) प्रदान करने वाले, मन के समस्त संशयों और दुविधाओं को काटने वाले तथा सत्य संकल्पों को सिद्ध करने वाले महावीर हैं, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।3।।

​अर्थ: जो निरंतर श्रीराम की भक्ति रूपी अमृत में लीन रहते हैं, जो स्वयं पूर्णकाम (तृप्त) होकर जगत को भक्ति का मार्ग दिखाने वाले गुरु हैं और विशुद्ध ज्ञान से संपन्न हैं, उन हनुमान की मैं वंदना करता हूँ।4।।

​अर्थ: जो मन की चंचलता और अस्थिरता को हरने वाले हैं, परम शांति और आत्मिक सुख देने वाले हैं तथा साधक की एकाग्रता बढ़ाने वाले धीर-वीर हैं, उन्हें मेरा नमन।5।।

​अर्थ: जो बुरी चिंताओं (Anxiety) का शमन करने वाले सौम्य स्वरूप हैं, जो त्रिविध तापों का हरण करते हैं और मात्र स्मरण करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं, उन मारुतात्मज को मैं प्रणाम करता हूँ।6।।

​अर्थ: जो साक्षात् दिव्य अनुभव स्वरूप हैं, जो जीवन में उत्तम संस्कारों का सिंचन करते हैं और आत्मज्ञान (Self-realization) का बोध कराने वाले देव हैं, उन्हें मेरा नमन।7।।

​अर्थ: जो स्वयं साक्षात् चिंतामणि हैं, जो अशांत चित्त को विश्राम (Peace) देने वाले हैं और सदैव भक्तों के हृदय में निवास करते हैं, उन हनुमान की मैं शरण लेता हूँ।8।।

​भावार्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन प्रातःकाल पूर्ण भक्ति के साथ इस 'चिंतामणि अष्टक' का पाठ करता है, वह मानसिक तनाव और समस्त चिंताओं से मुक्त होकर जीवन में सुख, शांति और ऐश्वर्य प्राप्त करता है।9।।

विधि: 'चिंतामणि हनुमान' का यह पाठ उन लोगों के लिए रामबाण है जो मानसिक उलझनों या अनिद्रा (Insomnia) से परेशान हैं।

 पाठ के समय सफेद या पीले पुष्प अर्पित करना और चंदन की सुगंध का प्रयोग करना मन को स्थिर करने में विशेष सहायक होता है।

।। लाभ (Benefits) ।।

,1=मानसिक शांति और तनाव मुक्ति

इस अष्टक का नियमित पाठ मन की चिंता, घबराहट और नकारात्मक विचारों को शांत करता है। Anxiety और overthinking धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।

2=आत्मविश्वास और धैर्य में वृद्धि

हनुमान जी की कृपा से साहस, धैर्य और निर्णय लेने की शक्ति मजबूत होती है। कठिन परिस्थितियों में मन स्थिर रहता है।

3=एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है

छात्रों और साधकों के लिए यह विशेष लाभकारी है। ध्यान और फोकस बेहतर होता है।

4=नकारात्मक ऊर्जा का नाश

मन के भय, संशय और अस्थिरता दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

5=आध्यात्मिक उन्नति

यह पाठ आत्मज्ञान, संस्कार और भक्ति भाव को जागृत करता है, जिससे जीवन में सही मार्गदर्शन मिलता है।

6=नींद में सुधार

अनिद्रा (Insomnia) से परेशान लोगों को शांति और गहरी नींद प्राप्त करने में मदद मिलती है।

7=इच्छाओं की पूर्ति

सच्चे मन से पाठ करने पर सात्विक इच्छाएं धीरे-धीरे पूर्ण होती हैं।

तिजोरी किस दिशा में शुभ

। । ॐ महालक्ष्मी नमो नमः ।।

।। तिजोरी किस दिशा में शुभ किस दिशा में अशुभ ।।

तिजोरी (सेफ/लॉकर) का सही स्थान वास्तु के अनुसार आपके जीवन में धन के प्रवाह, बचत और स्थिरता पर सीधा प्रभाव डालता है। 

नीचे हर दिशा का विस्तार से अर्थ और उसका प्रभाव समझिए।

 1. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)

 यह दिशा देवताओं की मानी जाती है और अत्यंत पवित्र होती है।
यहां तिजोरी रखने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
धन धीरे-धीरे बढ़ता है और घर में सुख-समृद्धि आती है
लेकिन ध्यान रखें: यह पूजा स्थान के लिए अधिक उपयुक्त है, भारी तिजोरी रखने से ऊर्जा बाधित भी हो सकती है

निष्कर्ष: हल्की अलमारी ठीक है, भारी तिजोरी से बचें।

 2. पूर्व दिशा

 पूर्व दिशा सूर्य की दिशा है, जो ऊर्जा और नए अवसरों का प्रतीक है।
यहां तिजोरी रखने से आय के नए स्रोत बनते हैं
व्यापार और नौकरी में तरक्की मिलती है
धन के साथ सम्मान और प्रतिष्ठा भी बढ़ती है

निष्कर्ष: अच्छी दिशा है, खासकर करियर ग्रोथ के लिए

 3. अग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व)

 यह अग्नि तत्व की दिशा है।
यहां तिजोरी रखने से अनावश्यक खर्च बढ़ता है
अचानक धन हानि या कर्ज की स्थिति बन सकती है
घर में तनाव और अस्थिरता आती है

निष्कर्ष: इस दिशा में तिजोरी रखने से बचें।

 4. दक्षिण दिशा

 दक्षिण दिशा यम और स्थिरता से जुड़ी है, लेकिन धन के लिए शुभ नहीं मानी जाती।
यहां रखा धन टिकता नहीं
बार-बार खर्च और नुकसान होता है
मेहनत के बावजूद बचत नहीं बनती

निष्कर्ष: धन रखने के लिए यह दिशा अनुकूल नहीं

 5. नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम)

 यह दिशा स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक है।
यहां तिजोरी रखने से धन सुरक्षित रहता है
बचत मजबूत होती है और धन जमा होता है
परिवार में आर्थिक स्थिरता आती है

निष्कर्ष: तिजोरी रखने के लिए सबसे मजबूत और सुरक्षित दिशा

 6. पश्चिम दिशा

 पश्चिम दिशा परिणाम और उपलब्धि की दिशा है।
यहां तिजोरी रखने से आय स्थिर रहती है
धन धीरे-धीरे बढ़ता है
सामान्य जीवन में संतुलन बना रहता है

निष्कर्ष: मध्यम शुभ दिशा

 7. वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)

 यह वायु तत्व की दिशा है, जो अस्थिरता दर्शाती है।
यहां रखा धन टिकता नहीं
बार-बार खर्च या नुकसान होता है
आर्थिक निर्णय अस्थिर रहते हैं

निष्कर्ष: इस दिशा में तिजोरी नहीं रखें

 8. उत्तर दिशा (सबसे शुभ)

 उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है।
यहां तिजोरी रखने से धन वृद्धि होती है
आय के नए अवसर मिलते हैं
घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है

निष्कर्ष: तिजोरी के लिए सबसे उत्तम दिशा

 विशेष वास्तु टिप्स (बहुत जरूरी)

तिजोरी का मुंह हमेशा उत्तर या पूर्व की ओर खुलना चाहिए

तिजोरी जमीन से थोड़ा ऊंची रखें (लकड़ी के स्टैंड पर)

तिजोरी के अंदर लाल कपड़ा या पीला कपड़ा रखें

तिजोरी के ऊपर भारी सामान न रखें

तिजोरी के पास साफ-सफाई और सुगंध बनाए रखें

जय मां लक्ष्मी जी ।

ॐ श्री हनुमते नमः

।।ॐ श्री हनुमते नमः ।।

।। सर्प दोष और दुर्भाग्य से छुटकारा पाने का सरल और सिद्ध उपाय ।।

।। “श्रीहनुमत्-कालसर्पपीडाहर स्तवन” ।।

कालसर्प दोष से परेशान हैं? यह एक स्तोत्र बदल सकता है आपकी किस्मत।

राहु-केतु की पीड़ा से मुक्ति चाहिए? हनुमान जी का यह रहस्य जानिए।

जीवन में अचानक रुकावटें क्यों आ रही हैं? कारण और समाधान दोनों यहाँ।

।। श्रीहनुमत्-कालसर्पपीडाहर स्तवन ।।

​​॥ विनियोगः-अस्य श्री हनुमत् कालसर्प पीडा निवारण स्तोत्र मन्त्रस्य, भगवान् शिव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्री एकादशमुखी हनुमान देवता, ह्रां बीजं, ह्रीं शक्तिः, राहु-केतु जनित कालसर्प एवं षोडश-नाग दोष शान्त्यर्थे जपे विनियोगः।

​॥ अथ स्तोत्रम् ॥

​ १. राहु-दर्प-दलु:
राहु-ग्रस्ते यदा सूर्ये, मुक्तवान् यः क्षणात् विभुः।
स मे राहु-कृतं दोषं, हन्तु देवः कपीश्वरः॥

​ २. केतु-पीडा-हर:
धूम्र-वर्णं ध्वजा-रूपं, केतु-पीडा-निवारकम्।
पुच्छ-ज्वाला-करालं च, ध्यायेत् पावन-सम्भवम्॥

​ ३. नाग-पाश-विमोचक:
लक्ष्मणस्य जय-दात्री, नाग-पाश-विमोचनी।
शक्तिः सा हनुमद्-रूपा, कालसर्पं व्यपोहतु॥

​ ४. अष्ट-नाग स्मरण (प्रथम):
अनन्तं कुलिकं चैव, वासुकिं च च तक्षकम्।
कर्कोटं शंखपालं च, महापद्मं च शंखचूड़म्॥

​ ५. अष्ट-नाग स्मरण (द्वितीय):
पद्मं च कम्बलं चैव, अश्वतरं च धृतराष्ट्रम्।
बलाहकं च मणिनागं, ऐरावतं च कौख्यकम्॥

​ ६. विष-शमन:
एतेषां षोडशानां च, नागानीं विष-नाशनम्।
हनुमत्-पाद-घातेन, सर्वे यान्तु दिगन्तरम्॥

​ ७. तंत्रमय विग्रह:
दश-बाहुं त्रिनेत्रं च, सर्व-शस्त्र-समन्वितम्।
पाशाङ्कुश-धरं धीरं, ध्यायेत् काल-भयापहम्॥

​ ८. विष-निवारण विग्रह:
गरुड़-ध्वज-संकाशं, सर्प-भूषण-भूषितम्।
विष-वीर्य-हरं देवं, नमामि पवनात्मजम्॥

​ ९. एकादश-रुद्र प्रभाव:
एकादश-मुखं रुद्रं, घोर-रूपं महाबलम्।
अनन्त-कुलिका-दीनां, सर्पाणां भय-नाशनम्॥

​ १०. वज्र-देह एवं यज्ञोपवीत:
वज्र-कायाय वीराय, नाग-यज्ञोपवीतिने।
सर्व-कल्याण-कर्त्रे च, नमोऽस्तु हनुमन्-मणे॥

​ ११. बीज मंत्र:
ॐ ह्रां ह्रीं राहु-केतु-भ्यां, हुं फट् कार-मण्डितम्।
कालसर्प-विनाशाय, हनुमन्तं नमाम्यहम्॥

​ १२. रक्षा कवच:
यत्र यत्र स्थितः सर्पः, पीडां कुर्वन्ति मानवे।
तत्र तत्र हनूमान् वै, रक्षां करोतु सर्वदा॥

​ १३. फलश्रुति:
इति ते कथितं दिव्यं, कालसर्प-विनाशनम्।
यः पठेत् प्रयतो नित्यं, स सर्वजयमाप्नुयात्॥

विनियोग का अर्थ=

इस स्तोत्र का जप भगवान शिव को ऋषि मानकर, अनुष्टुप छंद में, एकादशमुखी हनुमान जी को देवता मानकर किया जाता है। इसका उद्देश्य राहु-केतु से उत्पन्न कालसर्प दोष और सर्प दोष की शांति है।

श्लोक अनुसार अर्थ=

1. राहु दोष नाशक
जब सूर्य को राहु ग्रसित करता है (ग्रहण लगता है), तब जिस हनुमान जी ने तुरंत उसे मुक्त किया, वे ही मेरे राहु से बने दोषों को दूर करें।

2. केतु पीड़ा हर
केतु के धूम्र (धुएँ जैसे) स्वरूप को शांत करने वाले, अग्नि समान तेजस्वी हनुमान जी का ध्यान करने से केतु की पीड़ा दूर होती है।

3. नागपाश से मुक्ति
जैसे हनुमान जी ने लक्ष्मण जी को नागपाश से मुक्त कराया, वैसे ही वे कालसर्प दोष को समाप्त करें।

4–5. अष्ट एवं षोडश नाग स्मरण
अनंत, वासुकी, तक्षक आदि सभी प्रमुख नागों का स्मरण किया गया है, जो कालसर्प दोष से जुड़े माने जाते हैं।

6. विष शमन
हनुमान जी के चरणों के प्रभाव से इन सभी नागों का विष नष्ट हो जाता है और वे दूर चले जाते हैं।

7. तांत्रिक स्वरूप ध्यान
हनुमान जी के दस भुजाओं और तीन नेत्रों वाले, शस्त्रधारी रूप का ध्यान करने से भय और संकट दूर होते हैं।

8. विष निवारण
गरुड़ के समान तेजस्वी और सर्पों को नियंत्रित करने वाले हनुमान जी सभी विष और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करते हैं।

9. एकादश रुद्र रूप
हनुमान जी रुद्र के अवतार हैं, उनका यह रूप सभी सर्पों के भय को समाप्त करता है।

10. वज्र शरीर
वज्र समान शरीर वाले, नागों को यज्ञोपवीत रूप में धारण करने वाले हनुमान जी सबका कल्याण करते हैं।

11. बीज मंत्र
यह मंत्र विशेष रूप से राहु-केतु और कालसर्प दोष को समाप्त करने वाला है।

12. रक्षा कवच
जहाँ कहीं भी सर्प या सर्पजन्य पीड़ा हो, वहाँ हनुमान जी सदैव रक्षा करते हैं।

13. फलश्रुति
जो व्यक्ति इस स्तोत्र का नित्य श्रद्धा से पाठ करता है, उसे सभी कार्यों में विजय प्राप्त होती है।

।। पाठ करने के लाभ ।।

1=कालसर्प दोष शांति
कुंडली में राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

2=सर्प दोष से मुक्ति
नाग दोष, पितृ दोष से संबंधित समस्याओं में राहत मिलती है।

3=अचानक आने वाली बाधाओं का नाश
जीवन में रुकावटें, विघ्न और अड़चनें कम होती हैं।

4=भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
डर, बुरे सपने, मानसिक तनाव कम होता है।

5=स्वास्थ्य में सुधार
विशेष रूप से विष, रोग और अज्ञात परेशानियों में लाभ मिलता है।

6=कार्य में सफलता और विजय
नौकरी, व्यापार और जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता मिलती है।

7=आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि
आत्मविश्वास, साहस और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

।। पाठ विधि (संक्षेप में) ।।

मंगलवार या शनिवार से शुरू करें

हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर बैठें

कम से कम 11 या 21 बार पाठ करें

40 दिन नियमित करने से विशेष फल मिलता है।

जय हनुमान जी ।

उनके लिए जो मुझे कहते हैं

उनके लिए जो मुझे कहते हैं कि इतने वर्ष में तुमने क्या बदल लिया 

एक बार प्रसिद्ध उपन्यासकार नानक सिंह जी कहीं बोल रहे थे।
एक महिला ने उनसे सवाल किया—
“नानक सिंह, तुमने इतने सामाजिक उपन्यास लिखे, इतना कागज़ खराब कर दिया, पूरी ज़िंदगी समाज सुधार के लिए लगा दी… लेकिन क्या तुम्हारे कहने से समाज सुधर गया?”
नानक सिंह जी ने बड़ी सहजता से पूछा—“बीबी, आपके घर की सफाई कौन करता है?”
“जी, मैं करती हूँ।”

“कितने साल से?”
“बीस साल से।”

“उससे पहले कौन करता था?”
“जी, मेरी सास करती थी।”

“तुम्हारी सास से पहले कौन करता था?”
“जी, मेरी सास की सास करती होंगी।”

“तो फिर तुम ही बताओ, तुम्हारे घर की सफाई होते कितना समय हो गया?”
“सत्तर साल तो हो ही गए होंगे।”

“तो बताओ, क्या तुम्हारे घर में कूड़ा आना बंद हो गया?”
महिला बोली—
“यह कैसे हो सकता है, कूड़ा तो रोज़ ही होता है, रोज़ साफ करना पड़ता है।”
नानक सिंह जी मुस्कुराकर बोले—
“तो बीबी, यही बात समाज पर भी लागू होती है। तुम्हारे घर की सफाई सत्तर साल से हो रही है, लेकिन कूड़ा आना बंद नहीं हुआ। फिर तुम सफाई करना क्यों नहीं छोड़ देतीं? क्योंकि कूड़ा तो आता ही रहेगा।”

“समाज भी एक डस्टबिन की तरह है, इसमें रोज़ कूड़ा आता रहेगा। आपको सफाई करने की अपनी जिम्मेदारी निभाते रहना चाहिए, अपनी क्षमता के अनुसार अपना काम करते रहना चाहिए। अगर आप रुक गए, तो समाज एक दिन उस कूड़े के ढेर के नीचे दब जाएगा।”

“इसीलिए मैं अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूँ। मैं कितना सफल हो रहा हूँ या असफल—इस बारे में नहीं सोचता। बस जितनी सफाई कर सकता हूँ, करता जा रहा हूँ।” 👍

कामदेव_साबरमंत्रस्तोत्र

#कामदेव_साबरमंत्रस्तोत्र!! 
  ॐ क्लीं कामदेवाय नमः।
जिन स्त्री पुरुषों को जीवन में रस नहीं रहा, काम और भोग का आनंद लेना चाहते हैं ये मंत्र स्तोत्र बहुत ही लाभप्रद है। शुक्रवार या पुष्य नक्षत्र में शुरु करें वस्त्र आसन लाल रखें एवं मुख पश्चिम की ओर हो। गुरुदेव गणपति को प्रणाम करके संकल्प ले कर करें।

ॐ नमो आदेश गुरु को।गुरूजी को आदेश।
कामदेव कामदेव क्या करें।
तुम मेरे निकट हाजिर होकर सब स्त्रीपुरुष को मेरे वश में करें।
हर वक्त मेरे साथ रहे। मेरा कारज सिद्ध करें।
काम देव ब्रह्म का पूत,ब्रह्म के स्वेद से प्रकटे।
लेके सुन्दर पुष्प बाण, वश में करे सारा जहाँ।
हर्षण रोचन मोहन शोषण मारण हुए एक से एक महान।
वशीभूत करे सब जन फुलावे तीर कमान।
मन्मथ ,काम ,मनोभव ,मदन,कंन्दर्प।
अनंग ,कामदेव ,रागवृंत,मनसिजा और रतिकांत।
पुष्पवान ,पुष्पधंव ,प्रद्युम्न तथा भस्मशरीर।
नमन करने भस्मशरीर पुकारे।
वश करने हेतु मोहन क्रिया सुधारे।
रती ,प्रीती,रेवा ,मन्मथप्रिया,रागलता।
शुभांगी .कामकला ,कामप्रिया ,प्रीती-कामा ,मायावती।
सुन्दर काम की होवे मोहक कामिनी ।
अटल से अटल वश में करे ,मुग्ध दामिनी।
कुमकुम चन्दन कपूर गोरोचन सुहागा ।
टीका करके कामदेव सवारे भागा ।
प्रेम का तारा मोहय मोहय वश्य वश्य आकर्षय आकर्षय कामय कामय पूरय पूरय क्लेदय क्लेदय।
चाँद को जैसे चांदनी प्यारी प्रेम की भक्ति मन ही मन तारी।

ॐ कामाय नमः सम्मोहय सम्मोहय ।
ॐ भस्म शरीराय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ अनंगाय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ मन्मथाय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ वसंत सखाय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ इक्षु धनुर्धराय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ भस्म शरीराय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ पुष्प बाणय नमः सम्मोहय सम्मोहय।

केसर वेलची लोंग कुमकुम तथा सिंदूर।
मुट्ठी में लेकर मंत्र पंचम पढावे।
चुटकी में सुन्दर से सुन्दर वश में करावे।

ॐ कामदेवाय: विदमहे पुष्पबाणाय धीमहि तन्नो अनंग: प्रचोदयात।

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै।
अष्ट लक्ष्मी निज वास करवाई।
शिव पारवती प्रचुर आशीर्वाद देवे।
विष्णु लक्ष्मी सदा निकट होवे ।
माजी सागर में नैय्या तैरावे ।
कामदेव रति सौभाग्य दिलावे।
ॐ स्वामी ॐ स्वामी ॐ स्वामी
ॐ तत्सत। 

पान एक बारहमासी बेल है

पान एक बारहमासी बेल है, जो औषधीय गुणों और धार्मिक महत्व के लिए जानी जाती है। इसके पत्तों में एंटीसेप्टिक, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। पान सांस संबंधी समस्याओं को कम करने, जोड़ों के दर्द में राहत देने और पूजा-अर्चना में उपयोग के लिए भी प्रसिद्ध है।

🔵 गमले में पान की बेल उगाने की विधि :--

✅ सही मौसम और समय :
पान लगाने के लिए वसंत और बरसात का मौसम सबसे उपयुक्त है, क्योंकि इस समय नमी और गर्मी का संतुलन बेल की वृद्धि में मदद करता है।

✅ गमले का चयन :
12–15 इंच गहरा और चौड़ा गमला चुनें। गमले में जल-निकासी के लिए छेद ज़रूर हों।

✅ मिट्टी की तैयारी :
भुरभुरी और कार्बनिक पदार्थों से भरपूर मिट्टी लें। मिश्रण तैयार करें:

● 50% बगीचे की मिट्टी
● 30% गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट
● 20% रेत

✅ पान की बेल कैसे लगाएँ :

● बेल को कटिंग (4–5 गांठों वाली) या तैयार पौधे से लगाया जा सकता है।

● कटिंग को मिट्टी में 2–3 इंच गहराई में रोपें।

● शुरुआत में छायादार जगह पर रखें और रोज़ हल्का पानी दें।

🔵 पान के पौधे की देखभाल :--

✅ पौधे को छायादार या अप्रत्यक्ष धूप में रखें, सीधी धूप से बचाएँ।

✅ मिट्टी को नम रखें लेकिन ओवर-वॉटरिंग न करें।

✅ बेल को सहारा देने के लिए लकड़ी की छड़ी या जाली लगाएँ।

✅ पत्तियों पर हर 15 दिन में पानी का छिड़काव करें ताकि धूल हटे और पत्ते चमकदार दिखें।

✅ हर 30–35 दिन में मिट्टी की गुड़ाई कर 2 मुट्ठी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें।

✅ महीने में एक बार नीम की खली का घोल दें, इससे कीट व फंगस नहीं लगेंगे।

✅ पत्तियाँ पीली होने पर जैविक नाइट्रोजन खाद दें।

✅ सर्दियों में बेल की वृद्धि धीमी हो जाती है, इसलिए इसे घर के अंदर रखकर ठंडी हवा से बचाएँ।

✅ हर 2–3 साल में गमला बदलें ताकि जड़ों को फैलने की जगह मिल सके।

✅ बेल को घना बनाने के लिए समय-समय पर प्रूनिंग करें।

अगर जानकारी अच्छी लगी हो तो पोस्ट को Like करके हमारे फेसबुक पेज को Follow जरूर कीजिए, धन्यवाद 

#pan #betelleaf #herbalplants #herbalplants #gardening #fblifestyle #ashiyanakhayalonka

शिवलिंगी गर्भधारण की एक प्रमुख औषधि है

शिवलिंगी गर्भधारण की एक प्रमुख औषधि है,,। इसके अलावा यह बुखार चर्म रोग ल्यूकोरिया,धातु रोग तथा पुरुष यौन शक्ति बढ़ाने में उपयोगी है। यह शरीर के धातुओं को पुष्ट करती है। यह सभी कुष्ठ रोग को ठीक करने वाली होती है। शिवलिंगी हल्की वीरेचक यानी मल निकालने वाली और शरीर को ताकत देने वाली होती है।
शिवलिंगी के बीज लिवर,सांस की बीमारी, पाचन तंत्र आदि के लिए भी लाभदायक होते हैं। यह शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।
शिवलिंगी बीज के औषधीय गुण,,,,,

गर्भधारण विकार में शिवलिंगी का बीज उपयोगी होता है: 
प्रजनन का सीधा संबंध अंडाणुओं और शुक्राणुओं की संख्या और स्वस्थ से है । शिवलिंगी के बीज ओवेरियन रिजर्व जैसी समस्याओं को दूर करते हैं और मासिक धर्म को नियमित करते हैं। इसके बीज चूर्ण का प्रयोग गर्भधारण हेतु किया जाता है। 

कई महात्मा लोग स्त्री या पुरुष को संतान प्राप्ति हेतु मासिक धर्म के चार दिन बाद एक माह तक सुबह शाम शिवलिंगी बीज एक एक ग्राम की मात्रा में खाली पेट दूध के साथ सेवन कराते हैं।

जिनको पुत्र प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़े वाले गाय के दूध के साथ सेवन करना उपयुक्त होता है,और जिन्हें पुत्री प्राप्ति की कामना होती है उन्हें बछड़ी वाली गाय के दूध के साथ सेवन करना उत्तम रहता है।

जिन महिलाओं को गर्भ नहीं ठहरता हो अर्थात बार-बार गर्भ गिर जाता हो उन लोगों को मासिक धर्म के बाद पहले दिन से एक शिवलिंगी बीज का शुरुआत करते हुए प्रत्येक दिन एक बी बढ़ते जाएं और इस तरह 21 दिन करने से बांझ औरत मां बन जाती है और अगर बार-बार गर्भपात होता हो तो वह भी ठीक होकर गर्भ ठहर जाता है।

शिवलिंगी बीज आधा ग्राम और पुत्र जीवक एक ग्राम की मात्रा में लेकर के पाउडर बनाकर इसी के बराबर धागे वाली मिश्री मिक्स करके सुबह और शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से संतान की प्राप्ति होती है और बांझपन दूर हो जाता है।

बुखार में फायदेमंद,,,,,,
डिलीवरी के बाद जिन महिलाओं को बुखार आ जाता हो उसमें यह बहुत ही कारगर होता है शिवलिंगी के पंचांग के चूर्ण का 2 से 4 ग्राम की मात्रा में काढ़ा बनाकर सुबह शाम सेवन करने से बुखार उतर जाता है। 

शिवलिंगी के बीजों का काढ़ा बनाकर सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय में आई हुई सुजन तथा गर्भाशय का दर्द भी खत्म हो जाता है।

ल्यूकोरिया में फायदेमंद: - 
शिवलिंगी बीज 50 ग्राम 
रसवंती 50 ग्राम 
मोचरस 50 ग्राम 
 नागकेसर 50 ग्राम
धागे वाली मिश्री 100 ग्राम 
सबको लेकर के कूट पीसकर पाउडर बना कर रख ले। सुबह शाम 5/5 ग्राम के करीब खाना खाने के पश्चात सेवन करने से ल्यूकोरिया अर्थात सफेद पानी का आना बंद हो जाता है।

▪️कुष्ठ रोग में फायदेमंद: - 
शिवलिंगी बीज के रस में लाल चंदन घिसकर प्रभावित स्थान पर लेप करने से कुष्ठ रोग नष्ट होने लगता है। 

▪️ शिवलिंगी बीज शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाता है: ......
जिन पुरुषों को वीर्य में शुक्राणु की कमी हो जाती है वह लोग संतान सुख से वंचित रह जाते हैं। उन लोगों के लिए शिवलिंगी का बीज बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए लेना होगा 
शिवलिंगी बीज 300 ग्राम 
शतावरी 200 ग्राम 
सफेद मूसली 200 ग्राम 
शुद्ध कौंच बीज 200 ग्राम
अश्वगंधा 200 ग्राम 
बिनोली गिरी 200 ग्राम
सभी को कूट पीसकर पाउडर बनाकर रख लें 5/5 ग्राम सुबह शाम दूध में मिश्री मिलाकर सेवन करने से शुक्राणुओं के संख्या में वृद्धि होने लगती है और यौन रोग से संबंधित सारी समस्याएं दूर हो जाती है।

गर्भ धारण करने के ५२ दिन से पहले ही सुबह सुबह सूर्योदय से पहले पूर्व की ओर मुंह करके बछड़े ्वाली गाय के कच्चे दूध से आधा चम्मच पिसी हुई शिवलिंगी ली जाय एक सप्ताह ऐसा करें तो पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी ,,,

नोट:- .......
अगर आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो इसका उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदाचार्य से परामर्श लें। 

इस तरह की हेल्थ से जुड़ी जानकारी के लिए हमें फॉलो करें!
धन्यवाद!।।।
#food #healthandwellness #health #painrelief 

सफेद बाल और दाढ़ी के लिए देसी नुस्खा

🌿 सफेद बाल और दाढ़ी के लिए देसी नुस्खा 🌿

अगर बाल या दाढ़ी समय से पहले सफेद हो रहे हैं, तो करी पत्ते और नारियल तेल का यह पारंपरिक उपाय बालों की सेहत सुधारने में मदद कर सकता है।

✨ फायदे:
• बालों की जड़ों को पोषण देता है
• सफेद बालों की गति को धीमा करने में सहायक
• बालों को मजबूत और घना बनाता है
• स्कैल्प को हेल्दी रखता है

🌱 इस्तेमाल करने का तरीका:
• 1 कप नारियल तेल लें
• उसमें एक मुट्ठी करी पत्ते डालें
• इसे धीमी आंच पर तब तक गर्म करें जब तक पत्ते काले न हो जाएं
• ठंडा होने पर तेल छान लें
• रात को सोने से पहले बालों और दाढ़ी में हल्के हाथ से लगाएं
• सुबह हल्के शैम्पू से धो लें
• हफ्ते में 3–4 बार इस्तेमाल करें

⚠️ सावधानियां:
• बहुत ज्यादा गर्म तेल न लगाएं
• आंखों में जाने से बचाएं
• अगर एलर्जी या खुजली हो तो उपयोग बंद करें
• यह नुस्खा धीरे-धीरे असर करता है, तुरंत परिणाम की उम्मीद न करें

🌿 यह सरल नुस्खा बालों को पोषण देकर उनकी प्राकृतिक सेहत बनाए रखने में मदद कर सकता है।

#HairCare #HomeRemedy #NaturalCare #HealthyHair #Wellness

खाने के बाद पान क्यों दिया जाता था?

खाने के बाद पान क्यों दिया जाता था? Ayurveda का पुराना विज्ञान | Why Paan Was Given After Meals in Ayurveda

Ayurveda के अनुसार भोजन के बाद सादा पान (बिना तंबाकू) देने की परंपरा सिर्फ स्वाद के लिए नहीं थी, बल्कि digestion support के लिए मानी जाती थी।
पान के पत्ते में मौजूद प्राकृतिक गुण कफ को कम करने, मुंह की दुर्गंध घटाने और जठराग्नि को हल्का support देने में सहायक माने जाते हैं। खासकर heavy भोजन के बाद सादा पान mouth freshness और saliva flow बढ़ाने में मदद करता है।

✔ लार (saliva) बढ़ाता है – इससे food breakdown बेहतर होता है
✔ मुंह की दुर्गंध कम करता है – natural mouth freshener की तरह काम
✔ भारीपन कम महसूस होता है – oily या sweet food के बाद lightness
✔ कफ tendency में helpful – mucus heaviness कम करने में सहायक
✔ भोजन के बाद संतुष्टि feel – cravings कम हो सकती हैं

🌿 Simple Ayurvedic Way
1 सादा पान पत्ता
थोड़ा सौंफ
1 चुटकी इलायची powder
बहुत थोड़ा गुलकंद (optional)

तंबाकू, जर्दा, सुपारी ज्यादा मात्रा में avoid करें, क्योंकि Ayurveda natural digestive support की बात करता है, harmful additives की नहीं।

अगर आपको acidity, mouth ulcers, piles, या sugar issue है तो मीठा पान या ज्यादा गुलकंद avoid करें। हमेशा plain herbal paan style बेहतर माना जाता है।

sperm और blood count बढ़ाने का असरदार आयुर्वेदिक तरीका

sperm और blood count बढ़ाने का असरदार आयुर्वेदिक तरीका | Effective Ayurvedic Ways to Boost Sperm & Blood Count 🌿

🍯 असरदार आयुर्वेदिक चीज़ें (Short Points)

✔ मुलठी (Mulethi):
👉 कब्ज़ खत्म करके digestion सुधारती है

✔ सफेद मूसली (Safed Musli):
👉 शरीर में खून (Blood) बढ़ाने और ताकत देने में मदद

✔ कौंच बीज (Kaunch Beej):
👉 वीर्य (Sperm) को मजबूत और गाढ़ा करने में सहायक

✔ अश्वगंधा (Ashwagandha):
👉 नाड़ी तंत्र (Nervous System) को मजबूत करती है
👉 stamina और energy बढ़ाती है

✔ शतावरी (Shatavari):
👉 महिला और पुरुष दोनों के reproductive organs को मजबूत करती है

✔ गोक्षुर (Gokshur):
👉 urine infection और urinary problems में लाभकारी

🌿 कैसे लें?

👉 इन सभी को संतुलित मात्रा में powder या churn के रूप में दूध के साथ लिया जा सकता है (expert की सलाह से)

⚠️ Caution:
बिना सही मात्रा और सलाह के सेवन न करें, शरीर की प्रकृति के अनुसार असर अलग हो सकता है।