भूत को भूल जाइए, क्योंकि वो आपके हाथ से निकल चुका है

भूत को भूल जाइए, क्योंकि वो आपके हाथ से निकल चुका है! भविष्य को भूल जाइए, क्योंकि वो आपकी पहुँच से बहार है! वर्तमान को नियंत्रण करिए! अभी एकदम अच्छे से रहिये! यही बुद्धिमान लोगों का रास्ता है।
कितने नादान है हम दुःख आता है तो, अटक जाते है।औऱ सुख आता है तो,भटक जाते हैं।
खेत में बोए हुए सभी बीज अंकुरित नहीं होते..परंतु जीवन में किए गए सत्कर्म का एक भी बीज व्यर्थ नहीं जाता ..!!.               सोच बड़ी रखो। क्योंकि जहां तक सोचोगे, वहां तक पहुंचोगे।
हँसते रहें मुस्कुराते रहें स्वस्थ रहें l

तन की सेवा *सत‌गुरु* और साध संगत के चरणो में अर्पण

 💥🪷🪷🪷 *सतनाम🪷🪷🪷💥 एक बहन ने पूछा है मालिक का नाम लेने के क्या फायदे हैं???.... भाई ऐसा विश्वास करें कि मालिक दाता जी अपने नाम में पूरे के पूरे समाये हुए हैं, यानी उनकी संपूर्ण शक्ति नाम में विराजमान रहती है। अब जो भाई निस्वार्थ भाव से विश्वास व प्रेम पूर्वक उठते, बैठते, चलते, फिरते, काम करते किसी भी परिस्थिति में हो अपने मालिक का नाम लेता है, और उन्हें पुकारता है, और उनकी शरण हो जाता है, तो मालिक दाता जी ऐसे साधक की सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लेते हैं, और नाम लेने वाला साधक जन्म मरण तथा सभी दुखों से पार हो जाता है। प्रेम पूर्वक मालिक का नाम लेते रहे शर्त एक है कि नाम की परीक्षा न करें कि मैं बहुत नाम ले रहा हूं अभी मेरे अंदर कुछ नहीं हुआ ऐसा भाव ना रखें। कल्याण निश्चित होगा...


 !! *आज* *के* *विचार* !!

 *सेवा* - *सिमरन* - *संगत* 

तन की सेवा *सत‌गुरु* और साध संगत के चरणो में अर्पण
करने से मनुष्य तन से सुखी हो जाता है। मन से सतगुरु का गुणगान करने से मन में शान्ति आ जाती है और धन की सेवा करने से मनुष्य के पास धन की कमी नहीं रहती है। इस प्रकार मनुष्य के जीवन में सतगुर की अपार कृपा से साध संगत और सिमरन करने से जब सेवा भावना भी आ जाती है। तो इससे मनुष्य के जीवन में खुशियां आ जाती है काम, क्रोध ,लोभ, मोह और अंहकार , परोपकार भक्ति और नम्रता, प्रीत, सत्कार में बदलने से मनुष्य महापुरुष बन ‌जाता है !!
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शब्द को परखना* 

 *चर्चा करै शब्द को परखै,* 
 *निर्भय नाम सीख से निरखै ।* 

 निर्वाण ज्ञान की यह सीख केवल शब्द की चर्चा करने की नहीं, *शब्द को अपने जीवन में परखने* की है । नाम की सच्ची सीख वही है जो सुरति को भय, भरम और मन की चंचलता से निकालकर *निर्भय सत में टिकाए ।* 

 *भावार्थ :* बोलना सरल है, सुनना भी सरल है; पर *शब्द की कसौटी पर अपनी सुरति, अपनी चाल और अपना जीवन परखना ही असली साधना है ।* 

 *सार : शब्द की चर्चा बाहर होय, परख भीतर होय; और जब नाम की सीख भीतर उतरै — तभी सुरति निर्भय होय ।*


सब जग सत् स्वरूप है* 

 ज्ञानी संसार से माने हुए मैं और मेरा सम्बन्ध का त्याग करता है; भक्त एक *सत् करतार* के अतिरिक्त किसी से अपना सम्बन्ध मानता ही नहीं । 

 ज्ञानी कहता है — *न मैं, न मेरा ।* 
 भक्त कहता है — *सब तू, सब तेरा ।* 

 ज्ञानी अहंता - ममता छोड़ता है, भक्त अपने समस्त अस्तित्व को *सत् करतार के प्रेम, अपनत्व और पूर्ण समर्पण* में अर्पित कर देता है । अन्ततः दोनों में मैं मिटता है और एक *सत् करतार ही अपना सर्वस्व* रह जाता है ।

मन और विवेक

 *मन* *और* *विवेक* "

 "*मन*" एक अथाह सागर है, जिसमें चाहनाये लहरों की तरह निरंतर उठती-गिरती रहती हैं। अधिकांश लोग इन चाहनाओं  और भौतिक लालसाओं में उलझकर जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटक जाते हैं और आत्मिक शांति खो बैठते हैं।

 इस चाह के सागर से वही पार हो सकता है, जिसके हृदय में *विवेक* , *आत्म* - *जागरूकता* *और* *सही* - *गलत* *का* *ज्ञान* *हो* । *विवेक* ही मन को स्थिर करता है और जीवन को सही दिशा देता है।

*आज* *के* *विचार* !!

 "*धैर्य*" *व्यर्थ* *नहीं* *जाता* 

हर अच्छी चीज तुरंत नहीं मिलती। कुछ फल समय लेते हैं ताकि तुम्हारे भीतर भी उतनी ही परिपक्वता आ सके।
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बिल्व वृक्ष

1. बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते l
2. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है l
3. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है l
4. चार, पांच, छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्र पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है l 
5. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है एवं बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
6. सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता है।
7. बेल वृक्ष को सींचने से पित्र तृप्त होते है।
8. बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
9. बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।
10. जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी शिव लिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी जीव सभी पापों से मुक्त हो जाते है l
11. बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।
कृपया बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाये । बिल्व पत्र के लिए पेड़ को क्षति न पहुचाएं l

शिवजी की पूजा में ध्यान रखने योग्य बात l 

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को कौन सी चीज़ चढाने से मिलता है क्या फल - 
किसी भी देवी-देवता का पूजन करते समय उनको अनेक चीज़ें अर्पित की जाती है। प्रायः भगवान को अर्पित की जाने वाली हर चीज़ का फल अलग होता है। शिव पुराण में इस बात का वर्णन मिलता है की भगवान शिव को अर्पित करने वाली अलग-अलग चीज़ों का क्या फल होता है। शिवपुराण के अनुसार जानिए कौन सा अनाज भगवान शिव को चढ़ाने से क्या फल मिलता है:
1. भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
2. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
3. जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
4. गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद गरीबों में वितरीत कर देना चाहिए।

शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से उसका क्या फल मिलता है -
1. ज्वर (बुखार) होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।
2. नपुंसक व्यक्ति अगर शुद्ध घी से भगवान शिव का अभिषेक करे, ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा सोमवार का व्रत करे तो उसकी समस्या का निदान संभव है।
3. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिश्रित दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।
4. सुगंधित तेल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में वृद्धि होती है।
5. शिवलिंग पर ईख (गन्ना) का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।
6. शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
7. मधु (शहद) से भगवान शिव का अभिषेक करने से राजयक्ष्मा (टीबी) रोग में आराम मिलता है।

शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन का फूल चढ़ाया जाए तो उसका क्या फल मिलता है -
1. लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
3. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
4. शमी पत्रों (पत्तों) से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
6. जूही के फूल से शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
7. कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर
 सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
10. लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है।
11. दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।💐💐
 आचार्य

हर गंभीर शारीरिक कष्ट और नकारात्मक

हर गंभीर शारीरिक कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाएगा 'लोना चमारी रोग नाशक मंत्र'! ✨

जय गुरु गोरखनाथ! 🙏✨

क्या आप या आपके परिवार में कोई लंबे समय से शारीरिक दर्द, सिरदर्द या अज्ञात बीमारियों से परेशान है? सनातन परंपरा में 'शाबर मंत्रों' को सबसे शक्तिशाली और तुरंत असर दिखाने वाला माना गया है। आज मैं आपके साथ साझा कर रहा हूँ "लोना चमारी रोग नाशक शाबर मंत्र", जो तन और मन के हर मर्ज को पल भर में दूर करने की क्षमता रखता है।

📜 दिव्य शाबर मंत्र:

    "ॐ नमो आदेश गुरु को।
    लोना चमारीन जगत की माई, जहाँ जाय तहाँ करे सवाई।
    बैठी आसन, बांधे काया, छप्पन कोटि रोग को भगाया।
    सिर की पीड़ा, अंग का दर्द, पेट की व्याधि, तन का मर्ज,
    पल में भागे, क्षण में जाए, गुरु गोरखनाथ की दुहाई।
    लोना चमारीन का मंत्र साचा, पिंड काचा।
    फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।"

🌟 इस मंत्र के अद्भुत लाभ (Benefits):

शारीरिक कष्टों से मुक्ति: सिरदर्द, पेट दर्द, जोड़ों का दर्द और शरीर की किसी भी गुप्त व्याधि में यह तुरंत राहत देता है।

नकारात्मक ऊर्जा का नाश: अगर किसी बीमारी पर दवाई असर नहीं कर रही है या नजर दोष/बुरी नजर के कारण स्वास्थ्य खराब है, तो यह मंत्र उसे काट देता है।

मानसिक शांति और सुरक्षा कवच: यह मंत्र शरीर के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा (काया बंधन) बनाता है, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है।

🔧 प्रयोग और उपयोग की सरल विधि (How to Use):

घर पर करने की बेहद आसान विधि:

सिद्ध काल (पावर बढ़ाने के लिए): शाबर मंत्र वैसे तो स्वयं सिद्ध होते हैं, लेकिन किसी भी शुभ शनिवार, ग्रहण, होली या दीपावली के दिन इसे बस १०८ बार जप लें, तो इसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

प्रयोग कैसे करें: एक तांबे के लोटे या पात्र में साफ पानी रखें। इस मंत्र को ७ या ११ बार पूरी श्रद्धा से पढ़ें और हर बार पानी पर 'फूंक' (फूत्कार) मारें।

उपयोग: इस अभिमंत्रित जल को बीमार व्यक्ति को पिलाएं और थोड़ा सा पानी उसके शरीर पर छिड़क दें। पुरानी से पुरानी बीमारी में आराम मिलना शुरू हो जाएगा और तबियत सुधरने लगेगी।

📢 आखरी बात: जागिए और अंधविश्वास से बचिए!

किसी पाखंडी के सामने हाथ जोड़ने की बजाय, अपने भीतर के विश्वास को जगाइए। महादेव को गुरु बनाइए, मंत्र का पाठ कीजिए और रोगों को जड़ से भगाइए।

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(Disclaimer: यह धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था पर आधारित उपाय है। गंभीर बीमारियों में डॉक्टरी इलाज और दवाओं को प्राथमिकता अवश्य दें।)