ॐ श्री हनुमते नमः

।। ॐ श्री हनुमते नमः ।।

जब दिमाग थक जाए और दिल परेशान हो, तब सिर्फ एक उपाय काम करता है — चिंतामणि हनुमान अष्टक।

जहाँ दवा काम नहीं करती, वहाँ हनुमान जी का यह अष्टक चमत्कार करता है।

।। चिंतामणिहनुमान अष्टकम् ।।

(हिन्दी अर्थ सहित)
​(१)
चिंतामणिं चित्तरत्नं भक्तानां कामदायकम्।
अज्ञानध्वंसममलं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥१॥
​(२)
विषादार्णवमग्नानां त्रातारं धैर्यवर्धनम्।
मानसोल्लासकर्तारं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥२॥
(३)
प्रज्ञाप्रदं महावीरं संशयच्छेदकारकम्।
सत्यसंकल्पसिद्ध्यर्थं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥३॥
(४)
रामभक्तिसुधासक्तं पूर्णकामं जगद्गुरुम्।
विशुद्धज्ञानसम्पन्नं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥४॥
(५)
अस्थिरत्वहरं देवं शान्तिसौख्यप्रदायकम्।
एकाग्रताकरं धीरं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥५॥
(६)
दुश्चिन्ताशमनं सौम्यं सर्वतापह्वरं प्रभुम्।
स्मरणमात्रसंतुष्टं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥६॥
​(७)
अनुभवरूपिणं दिव्यं सर्वसंस्कारदायकम्।
आत्मबोधप्रदं देवं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥७॥
(८)
चिंतामणिस्वरूपं तं चित्तविश्रामकारणम्।
भक्तानां हृदयावासं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥८॥

फलश्रुति
​यः पठेत् प्रातरुत्थाय अष्टकं भक्तिसंयुतः।
सर्वचिन्ताविनिर्मुक्तो धनधान्यसमन्वितः ॥

।। हिंदी में अर्थ ।।

​अर्थ: जो भक्तों के लिए 'चिंतामणि' रत्न के समान हैं, जो चित्त की मलिनता दूर कर सात्विक इच्छाएं पूर्ण करते हैं और अज्ञान के अंधकार का नाश करने वाले निर्मल स्वरूप हैं, उन मारुतात्मज को मैं नमन करता हूँ।1।।

​अर्थ: जो शोक और विषाद (Depression) के समुद्र में डूबे लोगों की रक्षा करने वाले, धैर्य को बढ़ाने वाले और मन में आनंद व उत्साह का संचार करने वाले हैं, उन हनुमान को मेरा प्रणाम।2।।

​अर्थ: जो उत्तम बुद्धि (प्रज्ञा) प्रदान करने वाले, मन के समस्त संशयों और दुविधाओं को काटने वाले तथा सत्य संकल्पों को सिद्ध करने वाले महावीर हैं, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।3।।

​अर्थ: जो निरंतर श्रीराम की भक्ति रूपी अमृत में लीन रहते हैं, जो स्वयं पूर्णकाम (तृप्त) होकर जगत को भक्ति का मार्ग दिखाने वाले गुरु हैं और विशुद्ध ज्ञान से संपन्न हैं, उन हनुमान की मैं वंदना करता हूँ।4।।

​अर्थ: जो मन की चंचलता और अस्थिरता को हरने वाले हैं, परम शांति और आत्मिक सुख देने वाले हैं तथा साधक की एकाग्रता बढ़ाने वाले धीर-वीर हैं, उन्हें मेरा नमन।5।।

​अर्थ: जो बुरी चिंताओं (Anxiety) का शमन करने वाले सौम्य स्वरूप हैं, जो त्रिविध तापों का हरण करते हैं और मात्र स्मरण करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं, उन मारुतात्मज को मैं प्रणाम करता हूँ।6।।

​अर्थ: जो साक्षात् दिव्य अनुभव स्वरूप हैं, जो जीवन में उत्तम संस्कारों का सिंचन करते हैं और आत्मज्ञान (Self-realization) का बोध कराने वाले देव हैं, उन्हें मेरा नमन।7।।

​अर्थ: जो स्वयं साक्षात् चिंतामणि हैं, जो अशांत चित्त को विश्राम (Peace) देने वाले हैं और सदैव भक्तों के हृदय में निवास करते हैं, उन हनुमान की मैं शरण लेता हूँ।8।।

​भावार्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन प्रातःकाल पूर्ण भक्ति के साथ इस 'चिंतामणि अष्टक' का पाठ करता है, वह मानसिक तनाव और समस्त चिंताओं से मुक्त होकर जीवन में सुख, शांति और ऐश्वर्य प्राप्त करता है।9।।

विधि: 'चिंतामणि हनुमान' का यह पाठ उन लोगों के लिए रामबाण है जो मानसिक उलझनों या अनिद्रा (Insomnia) से परेशान हैं।

 पाठ के समय सफेद या पीले पुष्प अर्पित करना और चंदन की सुगंध का प्रयोग करना मन को स्थिर करने में विशेष सहायक होता है।

।। लाभ (Benefits) ।।

,1=मानसिक शांति और तनाव मुक्ति

इस अष्टक का नियमित पाठ मन की चिंता, घबराहट और नकारात्मक विचारों को शांत करता है। Anxiety और overthinking धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।

2=आत्मविश्वास और धैर्य में वृद्धि

हनुमान जी की कृपा से साहस, धैर्य और निर्णय लेने की शक्ति मजबूत होती है। कठिन परिस्थितियों में मन स्थिर रहता है।

3=एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है

छात्रों और साधकों के लिए यह विशेष लाभकारी है। ध्यान और फोकस बेहतर होता है।

4=नकारात्मक ऊर्जा का नाश

मन के भय, संशय और अस्थिरता दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

5=आध्यात्मिक उन्नति

यह पाठ आत्मज्ञान, संस्कार और भक्ति भाव को जागृत करता है, जिससे जीवन में सही मार्गदर्शन मिलता है।

6=नींद में सुधार

अनिद्रा (Insomnia) से परेशान लोगों को शांति और गहरी नींद प्राप्त करने में मदद मिलती है।

7=इच्छाओं की पूर्ति

सच्चे मन से पाठ करने पर सात्विक इच्छाएं धीरे-धीरे पूर्ण होती हैं।

तिजोरी किस दिशा में शुभ

। । ॐ महालक्ष्मी नमो नमः ।।

।। तिजोरी किस दिशा में शुभ किस दिशा में अशुभ ।।

तिजोरी (सेफ/लॉकर) का सही स्थान वास्तु के अनुसार आपके जीवन में धन के प्रवाह, बचत और स्थिरता पर सीधा प्रभाव डालता है। 

नीचे हर दिशा का विस्तार से अर्थ और उसका प्रभाव समझिए।

 1. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)

 यह दिशा देवताओं की मानी जाती है और अत्यंत पवित्र होती है।
यहां तिजोरी रखने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
धन धीरे-धीरे बढ़ता है और घर में सुख-समृद्धि आती है
लेकिन ध्यान रखें: यह पूजा स्थान के लिए अधिक उपयुक्त है, भारी तिजोरी रखने से ऊर्जा बाधित भी हो सकती है

निष्कर्ष: हल्की अलमारी ठीक है, भारी तिजोरी से बचें।

 2. पूर्व दिशा

 पूर्व दिशा सूर्य की दिशा है, जो ऊर्जा और नए अवसरों का प्रतीक है।
यहां तिजोरी रखने से आय के नए स्रोत बनते हैं
व्यापार और नौकरी में तरक्की मिलती है
धन के साथ सम्मान और प्रतिष्ठा भी बढ़ती है

निष्कर्ष: अच्छी दिशा है, खासकर करियर ग्रोथ के लिए

 3. अग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व)

 यह अग्नि तत्व की दिशा है।
यहां तिजोरी रखने से अनावश्यक खर्च बढ़ता है
अचानक धन हानि या कर्ज की स्थिति बन सकती है
घर में तनाव और अस्थिरता आती है

निष्कर्ष: इस दिशा में तिजोरी रखने से बचें।

 4. दक्षिण दिशा

 दक्षिण दिशा यम और स्थिरता से जुड़ी है, लेकिन धन के लिए शुभ नहीं मानी जाती।
यहां रखा धन टिकता नहीं
बार-बार खर्च और नुकसान होता है
मेहनत के बावजूद बचत नहीं बनती

निष्कर्ष: धन रखने के लिए यह दिशा अनुकूल नहीं

 5. नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम)

 यह दिशा स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक है।
यहां तिजोरी रखने से धन सुरक्षित रहता है
बचत मजबूत होती है और धन जमा होता है
परिवार में आर्थिक स्थिरता आती है

निष्कर्ष: तिजोरी रखने के लिए सबसे मजबूत और सुरक्षित दिशा

 6. पश्चिम दिशा

 पश्चिम दिशा परिणाम और उपलब्धि की दिशा है।
यहां तिजोरी रखने से आय स्थिर रहती है
धन धीरे-धीरे बढ़ता है
सामान्य जीवन में संतुलन बना रहता है

निष्कर्ष: मध्यम शुभ दिशा

 7. वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)

 यह वायु तत्व की दिशा है, जो अस्थिरता दर्शाती है।
यहां रखा धन टिकता नहीं
बार-बार खर्च या नुकसान होता है
आर्थिक निर्णय अस्थिर रहते हैं

निष्कर्ष: इस दिशा में तिजोरी नहीं रखें

 8. उत्तर दिशा (सबसे शुभ)

 उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है।
यहां तिजोरी रखने से धन वृद्धि होती है
आय के नए अवसर मिलते हैं
घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है

निष्कर्ष: तिजोरी के लिए सबसे उत्तम दिशा

 विशेष वास्तु टिप्स (बहुत जरूरी)

तिजोरी का मुंह हमेशा उत्तर या पूर्व की ओर खुलना चाहिए

तिजोरी जमीन से थोड़ा ऊंची रखें (लकड़ी के स्टैंड पर)

तिजोरी के अंदर लाल कपड़ा या पीला कपड़ा रखें

तिजोरी के ऊपर भारी सामान न रखें

तिजोरी के पास साफ-सफाई और सुगंध बनाए रखें

जय मां लक्ष्मी जी ।

ॐ श्री हनुमते नमः

।।ॐ श्री हनुमते नमः ।।

।। सर्प दोष और दुर्भाग्य से छुटकारा पाने का सरल और सिद्ध उपाय ।।

।। “श्रीहनुमत्-कालसर्पपीडाहर स्तवन” ।।

कालसर्प दोष से परेशान हैं? यह एक स्तोत्र बदल सकता है आपकी किस्मत।

राहु-केतु की पीड़ा से मुक्ति चाहिए? हनुमान जी का यह रहस्य जानिए।

जीवन में अचानक रुकावटें क्यों आ रही हैं? कारण और समाधान दोनों यहाँ।

।। श्रीहनुमत्-कालसर्पपीडाहर स्तवन ।।

​​॥ विनियोगः-अस्य श्री हनुमत् कालसर्प पीडा निवारण स्तोत्र मन्त्रस्य, भगवान् शिव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्री एकादशमुखी हनुमान देवता, ह्रां बीजं, ह्रीं शक्तिः, राहु-केतु जनित कालसर्प एवं षोडश-नाग दोष शान्त्यर्थे जपे विनियोगः।

​॥ अथ स्तोत्रम् ॥

​ १. राहु-दर्प-दलु:
राहु-ग्रस्ते यदा सूर्ये, मुक्तवान् यः क्षणात् विभुः।
स मे राहु-कृतं दोषं, हन्तु देवः कपीश्वरः॥

​ २. केतु-पीडा-हर:
धूम्र-वर्णं ध्वजा-रूपं, केतु-पीडा-निवारकम्।
पुच्छ-ज्वाला-करालं च, ध्यायेत् पावन-सम्भवम्॥

​ ३. नाग-पाश-विमोचक:
लक्ष्मणस्य जय-दात्री, नाग-पाश-विमोचनी।
शक्तिः सा हनुमद्-रूपा, कालसर्पं व्यपोहतु॥

​ ४. अष्ट-नाग स्मरण (प्रथम):
अनन्तं कुलिकं चैव, वासुकिं च च तक्षकम्।
कर्कोटं शंखपालं च, महापद्मं च शंखचूड़म्॥

​ ५. अष्ट-नाग स्मरण (द्वितीय):
पद्मं च कम्बलं चैव, अश्वतरं च धृतराष्ट्रम्।
बलाहकं च मणिनागं, ऐरावतं च कौख्यकम्॥

​ ६. विष-शमन:
एतेषां षोडशानां च, नागानीं विष-नाशनम्।
हनुमत्-पाद-घातेन, सर्वे यान्तु दिगन्तरम्॥

​ ७. तंत्रमय विग्रह:
दश-बाहुं त्रिनेत्रं च, सर्व-शस्त्र-समन्वितम्।
पाशाङ्कुश-धरं धीरं, ध्यायेत् काल-भयापहम्॥

​ ८. विष-निवारण विग्रह:
गरुड़-ध्वज-संकाशं, सर्प-भूषण-भूषितम्।
विष-वीर्य-हरं देवं, नमामि पवनात्मजम्॥

​ ९. एकादश-रुद्र प्रभाव:
एकादश-मुखं रुद्रं, घोर-रूपं महाबलम्।
अनन्त-कुलिका-दीनां, सर्पाणां भय-नाशनम्॥

​ १०. वज्र-देह एवं यज्ञोपवीत:
वज्र-कायाय वीराय, नाग-यज्ञोपवीतिने।
सर्व-कल्याण-कर्त्रे च, नमोऽस्तु हनुमन्-मणे॥

​ ११. बीज मंत्र:
ॐ ह्रां ह्रीं राहु-केतु-भ्यां, हुं फट् कार-मण्डितम्।
कालसर्प-विनाशाय, हनुमन्तं नमाम्यहम्॥

​ १२. रक्षा कवच:
यत्र यत्र स्थितः सर्पः, पीडां कुर्वन्ति मानवे।
तत्र तत्र हनूमान् वै, रक्षां करोतु सर्वदा॥

​ १३. फलश्रुति:
इति ते कथितं दिव्यं, कालसर्प-विनाशनम्।
यः पठेत् प्रयतो नित्यं, स सर्वजयमाप्नुयात्॥

विनियोग का अर्थ=

इस स्तोत्र का जप भगवान शिव को ऋषि मानकर, अनुष्टुप छंद में, एकादशमुखी हनुमान जी को देवता मानकर किया जाता है। इसका उद्देश्य राहु-केतु से उत्पन्न कालसर्प दोष और सर्प दोष की शांति है।

श्लोक अनुसार अर्थ=

1. राहु दोष नाशक
जब सूर्य को राहु ग्रसित करता है (ग्रहण लगता है), तब जिस हनुमान जी ने तुरंत उसे मुक्त किया, वे ही मेरे राहु से बने दोषों को दूर करें।

2. केतु पीड़ा हर
केतु के धूम्र (धुएँ जैसे) स्वरूप को शांत करने वाले, अग्नि समान तेजस्वी हनुमान जी का ध्यान करने से केतु की पीड़ा दूर होती है।

3. नागपाश से मुक्ति
जैसे हनुमान जी ने लक्ष्मण जी को नागपाश से मुक्त कराया, वैसे ही वे कालसर्प दोष को समाप्त करें।

4–5. अष्ट एवं षोडश नाग स्मरण
अनंत, वासुकी, तक्षक आदि सभी प्रमुख नागों का स्मरण किया गया है, जो कालसर्प दोष से जुड़े माने जाते हैं।

6. विष शमन
हनुमान जी के चरणों के प्रभाव से इन सभी नागों का विष नष्ट हो जाता है और वे दूर चले जाते हैं।

7. तांत्रिक स्वरूप ध्यान
हनुमान जी के दस भुजाओं और तीन नेत्रों वाले, शस्त्रधारी रूप का ध्यान करने से भय और संकट दूर होते हैं।

8. विष निवारण
गरुड़ के समान तेजस्वी और सर्पों को नियंत्रित करने वाले हनुमान जी सभी विष और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करते हैं।

9. एकादश रुद्र रूप
हनुमान जी रुद्र के अवतार हैं, उनका यह रूप सभी सर्पों के भय को समाप्त करता है।

10. वज्र शरीर
वज्र समान शरीर वाले, नागों को यज्ञोपवीत रूप में धारण करने वाले हनुमान जी सबका कल्याण करते हैं।

11. बीज मंत्र
यह मंत्र विशेष रूप से राहु-केतु और कालसर्प दोष को समाप्त करने वाला है।

12. रक्षा कवच
जहाँ कहीं भी सर्प या सर्पजन्य पीड़ा हो, वहाँ हनुमान जी सदैव रक्षा करते हैं।

13. फलश्रुति
जो व्यक्ति इस स्तोत्र का नित्य श्रद्धा से पाठ करता है, उसे सभी कार्यों में विजय प्राप्त होती है।

।। पाठ करने के लाभ ।।

1=कालसर्प दोष शांति
कुंडली में राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

2=सर्प दोष से मुक्ति
नाग दोष, पितृ दोष से संबंधित समस्याओं में राहत मिलती है।

3=अचानक आने वाली बाधाओं का नाश
जीवन में रुकावटें, विघ्न और अड़चनें कम होती हैं।

4=भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
डर, बुरे सपने, मानसिक तनाव कम होता है।

5=स्वास्थ्य में सुधार
विशेष रूप से विष, रोग और अज्ञात परेशानियों में लाभ मिलता है।

6=कार्य में सफलता और विजय
नौकरी, व्यापार और जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता मिलती है।

7=आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि
आत्मविश्वास, साहस और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

।। पाठ विधि (संक्षेप में) ।।

मंगलवार या शनिवार से शुरू करें

हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर बैठें

कम से कम 11 या 21 बार पाठ करें

40 दिन नियमित करने से विशेष फल मिलता है।

जय हनुमान जी ।

उनके लिए जो मुझे कहते हैं

उनके लिए जो मुझे कहते हैं कि इतने वर्ष में तुमने क्या बदल लिया 

एक बार प्रसिद्ध उपन्यासकार नानक सिंह जी कहीं बोल रहे थे।
एक महिला ने उनसे सवाल किया—
“नानक सिंह, तुमने इतने सामाजिक उपन्यास लिखे, इतना कागज़ खराब कर दिया, पूरी ज़िंदगी समाज सुधार के लिए लगा दी… लेकिन क्या तुम्हारे कहने से समाज सुधर गया?”
नानक सिंह जी ने बड़ी सहजता से पूछा—“बीबी, आपके घर की सफाई कौन करता है?”
“जी, मैं करती हूँ।”

“कितने साल से?”
“बीस साल से।”

“उससे पहले कौन करता था?”
“जी, मेरी सास करती थी।”

“तुम्हारी सास से पहले कौन करता था?”
“जी, मेरी सास की सास करती होंगी।”

“तो फिर तुम ही बताओ, तुम्हारे घर की सफाई होते कितना समय हो गया?”
“सत्तर साल तो हो ही गए होंगे।”

“तो बताओ, क्या तुम्हारे घर में कूड़ा आना बंद हो गया?”
महिला बोली—
“यह कैसे हो सकता है, कूड़ा तो रोज़ ही होता है, रोज़ साफ करना पड़ता है।”
नानक सिंह जी मुस्कुराकर बोले—
“तो बीबी, यही बात समाज पर भी लागू होती है। तुम्हारे घर की सफाई सत्तर साल से हो रही है, लेकिन कूड़ा आना बंद नहीं हुआ। फिर तुम सफाई करना क्यों नहीं छोड़ देतीं? क्योंकि कूड़ा तो आता ही रहेगा।”

“समाज भी एक डस्टबिन की तरह है, इसमें रोज़ कूड़ा आता रहेगा। आपको सफाई करने की अपनी जिम्मेदारी निभाते रहना चाहिए, अपनी क्षमता के अनुसार अपना काम करते रहना चाहिए। अगर आप रुक गए, तो समाज एक दिन उस कूड़े के ढेर के नीचे दब जाएगा।”

“इसीलिए मैं अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूँ। मैं कितना सफल हो रहा हूँ या असफल—इस बारे में नहीं सोचता। बस जितनी सफाई कर सकता हूँ, करता जा रहा हूँ।” 👍

कामदेव_साबरमंत्रस्तोत्र

#कामदेव_साबरमंत्रस्तोत्र!! 
  ॐ क्लीं कामदेवाय नमः।
जिन स्त्री पुरुषों को जीवन में रस नहीं रहा, काम और भोग का आनंद लेना चाहते हैं ये मंत्र स्तोत्र बहुत ही लाभप्रद है। शुक्रवार या पुष्य नक्षत्र में शुरु करें वस्त्र आसन लाल रखें एवं मुख पश्चिम की ओर हो। गुरुदेव गणपति को प्रणाम करके संकल्प ले कर करें।

ॐ नमो आदेश गुरु को।गुरूजी को आदेश।
कामदेव कामदेव क्या करें।
तुम मेरे निकट हाजिर होकर सब स्त्रीपुरुष को मेरे वश में करें।
हर वक्त मेरे साथ रहे। मेरा कारज सिद्ध करें।
काम देव ब्रह्म का पूत,ब्रह्म के स्वेद से प्रकटे।
लेके सुन्दर पुष्प बाण, वश में करे सारा जहाँ।
हर्षण रोचन मोहन शोषण मारण हुए एक से एक महान।
वशीभूत करे सब जन फुलावे तीर कमान।
मन्मथ ,काम ,मनोभव ,मदन,कंन्दर्प।
अनंग ,कामदेव ,रागवृंत,मनसिजा और रतिकांत।
पुष्पवान ,पुष्पधंव ,प्रद्युम्न तथा भस्मशरीर।
नमन करने भस्मशरीर पुकारे।
वश करने हेतु मोहन क्रिया सुधारे।
रती ,प्रीती,रेवा ,मन्मथप्रिया,रागलता।
शुभांगी .कामकला ,कामप्रिया ,प्रीती-कामा ,मायावती।
सुन्दर काम की होवे मोहक कामिनी ।
अटल से अटल वश में करे ,मुग्ध दामिनी।
कुमकुम चन्दन कपूर गोरोचन सुहागा ।
टीका करके कामदेव सवारे भागा ।
प्रेम का तारा मोहय मोहय वश्य वश्य आकर्षय आकर्षय कामय कामय पूरय पूरय क्लेदय क्लेदय।
चाँद को जैसे चांदनी प्यारी प्रेम की भक्ति मन ही मन तारी।

ॐ कामाय नमः सम्मोहय सम्मोहय ।
ॐ भस्म शरीराय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ अनंगाय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ मन्मथाय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ वसंत सखाय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ इक्षु धनुर्धराय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ भस्म शरीराय नमः सम्मोहय सम्मोहय।
ॐ पुष्प बाणय नमः सम्मोहय सम्मोहय।

केसर वेलची लोंग कुमकुम तथा सिंदूर।
मुट्ठी में लेकर मंत्र पंचम पढावे।
चुटकी में सुन्दर से सुन्दर वश में करावे।

ॐ कामदेवाय: विदमहे पुष्पबाणाय धीमहि तन्नो अनंग: प्रचोदयात।

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै।
अष्ट लक्ष्मी निज वास करवाई।
शिव पारवती प्रचुर आशीर्वाद देवे।
विष्णु लक्ष्मी सदा निकट होवे ।
माजी सागर में नैय्या तैरावे ।
कामदेव रति सौभाग्य दिलावे।
ॐ स्वामी ॐ स्वामी ॐ स्वामी
ॐ तत्सत।