विटामिन बी 12 गुड बैक्टीरिया और एंटी ऑक्सीडेंट

एक महीना है लगभग रोज पिओ पूरे वर्ष विटामिन B12 बनाने व रोगों से लड़ने वाले नन्हे पर बलशाली रक्षकों वाली फौज प्राप्त होगी 
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कांजी:- ***विटामिन बी 12 गुड बैक्टीरिया और एंटी ऑक्सीडेंट का महानतम स्त्रोत पारंपरिक भारतीय पेय ***

कांजी को आयुर्वेद में एक चमत्कारी पेय भी कहा जाता है जो आपके शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाती है। यह एक फर्मेंटेड ड्रिंक होती है जिसे पानी काली गाजर चुकंदर राई या पीली सरसों आंवला हल्दी  और काली मिर्च के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है।

 एक कांच के जार को गरम पानी से धो कर सुखा कर लीजिए.  इसमें 5 लीटर पानी कटी हुई 4 गाजर, 2आंवला हल्दी 1 बड़ा चकुंदर डालें 50ग्राम कच्ची हल्दी के टुकड़े 1 छोटी चम्मच सादा नमक, 2 छोटी चम्मच काला नमक, ½ छोटी चम्मच दरदरी कुटी काली मिर्च, 1 पिंच हींग और 2 बड़े चम्मच दरदरी कुटी राई या पीली सरसों डालिए.  अब इन्हें अच्छे से मिलाएं, फिर इसमें उबालकर ठंडा हुआ हुआ पानी डाल कर अच्छे से मिला कर सूती कपड़े से ढाक दीजिए.
इसे ढाक कर 3 से 4 दिन तक धूप में रखिए और शाम में अंदर रख लीजिए.  अगर धूप ना हो तो रसोई में किसी गरम जगह रखिए.  चौथे दिन इसे खोल कर मिला कर परोसें, इस तरह ये बनकर तैयार हो जाएगा.
सुबह एक गिलास खाली पेट पिएं 
कांजी पीने से इम्यूनिटी मज़बूत होती है.
 इसमें में घुलनशील फ़ाइबर होता है , जो पाचन के लिए फ़ायदेमंद होता है क्योंकि वो गुड बैक्टीरिया का भोजन होता है 
कांजी में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो आंतों के लिए बेहद फ़ायदेमंद होते हैं.
 एनर्जी का स्तर बढ़ता है.  सूजन कम होती है.
 वज़न नियंत्रण में रहता है.
मेटाबॉलिक रेट बढ़ती है.
आंखों की कमज़ोरी दूर होती है.
गाजर बीटा कैरोटीन और विटामिन-ए, सी ,के और जिंक से भरपूर होता है। वहींं चुकंदर एंटी ऑक्सीडेंट और विटामिन-सी से भरपूर होता है। इससे बनने वाली कांजी पोषक तत्वों का खजाना है।  एंटीऑक्सीडेंट शरीर में मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) को निष्क्रिय करने, ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है

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हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है बैक्टीरिया जो हमारे शरीर की रक्षा प्रणाली विकास और पुनर्निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण साधन हैं 

क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर के अंदर विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया रहते हैं? माना जाता है की बैक्टीरिया बीमारी पैदा करते हैं, लेकिन उनमें से सभी हानिकारक नहीं होते हैं, सच तो यह है की उनमें से ज्यादातर कुछ नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और जीवन के लिए आवश्यक हैं।
भी। 5,000 से ज्यादा प्रकार के बैक्टीरिया पेट-आंत में पाए जाते हैं। इनमें से कुछ मित्र होते हैं व कुछ शत्रु।
ज्‍यादातर लोगों को लगता है कि बैक्‍टीरिया माने बीमारी। और वे उन्‍हें परास्‍त करने की अंधाधुंध लड़ाई का हिस्‍सा बन जाते हैं। लेकिन बाद हमें पता चला कि सारे बैक्टीरिया हमारे शत्रु नहीं होते हैं। कुछ अच्छे बैक्टीरिया भी हैं जो हमारे शरीर में एक मित्र की तरह मौजूद हैं। यह कई तरह के घातक हमलों से हमारी रक्षा करने की क्षमता रखते हैं।
कुछ बैक्टीरियाज ऐसे होते हैं जो हमारी सेहत की रक्षा करने के लिए दवाओं तक से लड़ जाते हैं पर हम उनके बारे में जान ही नहीं पाते और उनका अंधाधुंध कत्ल करते रहते हैं। ये उन बीमारियों से भी शरीर की रक्षा करने  में  सक्षम है जिनपर एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो चुकी हैं 

यह विश्वास करना मुश्किल हो सकता है लेकिन वास्तव में 100 ट्रिलियन बैक्टीरिया हमारे शरीर में होते हैं, जिनमें से अधिकांश आंत में पाए जाते हैं। उन्हें आँतों के फूल कहा जाता है और इसका वजन लगभग 600ग्राम से 1.5किलोग्राम होता है जितना हमारे लिवर का वजन है। वैज्ञानिक उन्हें “Forgotten Organ” कहते हैं क्योंकि वे हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं, हमारे स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं और हमारे शरीर को आकार देते हैं।

 आपको पता होना चाहिए कि हम बैक्टीरिया के बिना नहीं रह सकते- ये वे हैं जो भोजन के पाचन में और हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं ताकि हम infection से लड़ सकें और आराम से रह सकें। वे कई मायनों में हमारे Health Heroes हैं

अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित करने के लिए हमें बैक्टीरिया की आवश्यकता होती है; विशेष रूप से हमारी आंत में जिसमें हमारे शरीर की लगभग 70% प्रतिरोधक क्षमता होती है। ये बैक्टीरिया रोगों की गंभीरता को कम करने वाली हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पाचन तंत्र में बैक्टीरिया पोषक तत्वों को शोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें हमारे शरीर पचा नहीं पाते हैं। आप यह जानकर हैरान होंगे की खाने से लगभग 30% calories हमारे आंत के बैक्टीरिया की मदद से मिलते हैं।
हमारी आंतों की दीवाऱों को सुरक्षित रखने रिपेयर करने में सबसे बड़ा दायित्व यही सूक्ष्म यौद्धा व श्रमिक निभाते हैं जिससे हमारी रक्तवाहिकाओं में प्रदूषित रक्त का प्रवाह रूकता है 
कोई भी अल्सर या कैंसर शरीर में तभी पनपता है खासकर आंतों और लीवर में जब आपकी आंतों में ये सूक्ष्म यौद्धा कमजोर व संख्या में कम पड़ जाते हैं 

मैंने पचासों बार लिखा है कि विटामिन बी12 के लिए मांसाहार की आवश्यकता नहीं 
कुछ बैक्टीरिया हमारी आँतों में विटामिन्स बना सकते हैं जैसे की विटामिन K और विटामिन बी 12। खाना पकाने से विटामिन B आसानी से नष्ट हो जाता है और हम में से कई इस महत्वपूर्ण विटामिन की कमी से पीड़ित हैं। बैक्टीरिया इसे दूर करने में मदद कर सकते हैं।
हमारे मूड को प्रभावित करता है- गुड बैक्टीरिया बायो फर्मेंटेशन से विटामिन बी 12 का निर्माण करता है 
क्या कभी आप घबराहट या डर से बीमार पड़े हैं या आपके पेट में हलचल मची है। वैज्ञानिकों के अनुसार हमारे आंत के बैक्टीरिया डोपामाइन और सेरोटोनिन (हमारे आँतों के अच्छे हार्मोन हैं ये) जैसे हार्मोन का उत्पादन करके हमारे मूड को प्रभावित कर सकते हैं जो तनाव और चिंता को कम करते हैं।
ये नन्हे बैक्टीरिया भयंकर से भयंकर डिप्रेशन से बाहर निकाल सकते हैं 

इसलिए अच्छे बैक्टीरिया को बनाए रखना हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

एक अच्छी तरह से संतुलित आहार लेना, व्यायाम, पर्याप्त नींद, अधिक फाइबर, पानी और प्रोबायोटिक्स, ये सारे जीवन के लिए आवश्यक बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं।

अगर किसी व्यक्ति को हर समय पेट में भारीपन या फूला हुआ महसूस होता है, कब्ज या दिन में दो या ज्यादा बार मल त्याग करना पड़ता है, मुंह की उचित साफ-सफाई के बावजूद भी सांसों से दुर्गंध आती है. इसका मतलब आपकी आंत अस्वस्थ है. वहां बैड बैक्टीरिया या बुरे परजीवी अपना घर बना रहे हैं 

इस पर पूरी पुस्तिका लिखी जा सकती है 42 तरह से शरीर में काम करते हैं ये नन्हे हीरो 

DrJaibir Singh 
 9350272972
अवधूत आयुर्विज्ञान संस्थान जींद हरियाणा

शरीर की सभी नसों को खोलने का आयुर्वेदिक समाधान

शरीर की सभी नसों को खोलने का आयुर्वेदिक समाधान

➡️कपूर और नींबु कितने उपयोगी है👉दिन में सिर्फ़ एक बार यह साधारण सा उपाय करके देखिए, सिर के बाल से पैर की उंगली तक सारी नसें मुक्त होने का आपको स्पष्ट अनुभव होगा कि सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा, आपके शरीर की नसें मुक्त होने का स्पष्ट अनुभव होगा। हाथ–पैर में होने वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) तुरंत बंद हो जाती हैं।।

➡️पुराना घुटनों का दर्द और कमर, गर्दन या रीड की हड्डी (मणके) में कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगी, पुराना एड़ी का दर्द भी ठीक हो जाएगा। 

➡️इस उपाये से बहुत से लोगों के लाखों रुपए बच सकते हैं। पैर में फटी एड़ियां और डैड स्किन रिमूव हो जाती है और पैर कोमल हो जाते हैं और इसके पीछे जो विज्ञान और आयुर्वेद है. 

➡️यह उपाय करने के लिए हमें घर में ही उपलब्ध कपूर और नींबू, ये दो चीजें चाहियें। इस उपाय को करने के लिए डेढ़ से दो लीटर गुनगुना पानी लें, जिसका तापमान पैर को सहन होने जितना गरम हो, उसमे आधे नींबू का रस निचोड़े और फिर नींबू को भी उस पानी में डाल दें

➡️फिर दूसरी चीज कपूर है–कोई भी कपूर हो। कपूर की तीन गोलिय् बारीक पीस कर उसका पाउडर बना लें, यह भी उस पानी में मिला लें, फिर पांच से दस मिनट तक पैरों को इस पानी में डाल कर रखें।

➡️जैसे ही आप पैरों को पानी में डालेंगे, तो आपको इससे सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा। आपके सिर के बालों से पैर तक की सारी नसें मुक्त होने का स्पष्ट रूप से अनुभव होगा। इसका कारण यह है कि हमारे पैरों में 172 प्रकार के प्रेशर पॉइंट होते हैं, जो हमारे शरीर की सभी नसों के साथ जुडे होते हैं। 

➡️यह नींबू और कपूर वाला गुनगुना पानी इन 172 प्रकार के प्रेशर पॉइंट्स को मुक्त कर देता है और इससे शरीर की सारी नसें एकदम से रीएक्टिवेट हो जाती हैं और पूरी तरह से मुक्त हो जाती हैं, ऐसा अनुभव होता है।

➡️इस उपाय में सिर्फ पांच से दस मिनट तक इस पानी में पैर डाल कर रखने है और यह दिन में कभी भी सुबह या शाम को कर सकते हैं।

➡️इससे हाथ, पैर में होने वाली झनझनाहट (खाली चढ़ना) बंद हो जाती हैं और कोई नस दबी या अकड़ गई हो, तो वह खुल जाएगी और सिरदर्द भी इस उपाय से बंद हो जाता है।

➡️जिन लोगों को माइग्रेन की तकलीफ हो वह भी, पानी में पैर रखने के साथ ही बन्द हो जायेगी। अगर स्नायु अकड़ गये हों या शरीर दर्द कर रहा हो तो यह उपाय करके देखिए।

➡️इसका कोई साइड इफैक्ट नहीं है और यह उपाय सरल रूप से किया जा सकता है।

➡️यह उपाय पांच दिन करना है। यह उपाय दिखने में तो सरल लगता है मगर इस का रिज़ल्ट बहुत ही अच्छा और असरदार होता है आपको इससे नुकसान कुछ नहीं होगा फायदा ही होगा

Avena Sativa

दिमाग की ताकत बढ़ाने वाली एक बहुत ही शक्तिशाली नर्व टॉनिक है होम्योपैथिक दवा Avena Sativa Q

Avena Sativa Q  साधारण जई (Common Oat) के हरे-ताज़े पौधे से बनाई जाती है, जिसे हिंदी में जई का सत्व या ओट्स टिंक्चर कहते हैं। यह मुख्य रूप से नर्वस कमजोरी, नींद न आना, दिमागी थकान, शराब-नशा छुड़ाने, पुरुषों में कमजोरी, और तनाव के लिए इस्तेमाल होती है। 

लक्षण 

पढ़ाई में एकाग्रता नहीं, रात को नींद नहीं आती, हाथ-पैर में कमजोरी, या नशा छोड़ने में दिक्कत है तो यह दवा आपके लिए रामबाण है। 

खुराक

दिमागी थकान, पढ़ाई में ध्यान नहीं, याददाश्त कम।

पोटेंसी -30C

5-5 बूंद 3 baar

नर्वस कमजोरी: हाथ-पैर में कमजोरी, काँपना। 

पोटेंसी: 30C, 200C।

5-5 बूंद 3 बार

राब-नशा छुड़ाना: नशा छोड़ने पर बेचैनी, चिड़चिड़ापन। पोटेंसी: 30C

5 5 बूंद 3 baar

पुरुषों में कमजोरी: स्पर्मेटोरिया, नाइट फॉल, कमजोरी। 

पोटेंसी: 30C, 200C।

5 5 बूंद 3 बार

तनाव-डिप्रेशन: चिंता, बेचैनी, एकाग्रता की कमी। पोटेंसी: 200C।

5 5 बूंद 3 बार

बुजुर्गों में कमजोरी: पैरों में कमजोरी, चलने में दिक्कत।

 पोटेंसी: 30C।

5 5 बूंद 3 बार

परीक्षा का डर: स्टूडेंट्स में घबराहट, पसीना।

पोटेंसी: 30C।

हृदय की घबराहट: तनाव से धड़कन तेज। 

पोटेंसी: 30C। 
रिसर्च:-
 
नोट-एविना सटाइवा क्यू एक नेचुरल नर्व टॉनिक है जो दिमाग, नसें, नींद और ताकत को बढ़ाती है। यह पढ़ाई, नशा छुड़ाना, कमजोरी, और तनाव में रामबाण है। रिसर्च इसकी ब्रेन पावर और स्लीप क्वालिटी में सुधार को साबित करती है। हमेशा होम्योपैथिक डॉक्टर से सलाह लें।

अलसी के मुख्य फायदे (Benefits)

अगर आपके भी घुटने से आवाज़ आती हैं तो रात में एक चम्मच भूनी हुई अलसी का पाउडर गरम पानी के साथ लेने से हैरान करने वाले फायदे दिखेंगे आपको !

अलसी के मुख्य फायदे (Benefits)
. जोड़ों के दर्द में राहत: अलसी में 'ओमेगा-3 फैटी एसिड' और 'लिग्नन्स' होते हैं, जो घुटनों की ग्रीस (lubrication) बढ़ाने और सूजन कम करने में मदद करते हैं।

. दिल के लिए अच्छा: यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करके दिल की धमनियों को स्वस्थ रखता है।

. पाचन में सुधार: इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो कब्ज की समस्या को दूर करता है।

. त्वचा और बाल: अलसी के सेवन से त्वचा में चमक आती है और बालों का झड़ना कम होता है।

. शुगर कंट्रोल: यह ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखने में सहायक है।

इस्तेमाल करने का सही तरीका (How to Use)

. भूनकर पाउडर बनाएं: अलसी को हल्का सा भून लें (बिना तेल के) और फिर उसे पीसकर पाउडर बना लें।

. तस्वीर के अनुसार उपाय: रात को 1 चम्मच भुनी अलसी का पाउडर (या पेस्ट) गुनगुने पानी के साथ लें।

. अन्य तरीके: आप इसे दही, स्मूदी या सलाद के ऊपर छिड़क कर भी खा सकते हैं।

नोट: अलसी को हमेशा भूनकर पीसकर ही खाना चाहिए, क्योंकि साबुत अलसी के बीज हर किसी के शरीर में पच नहीं पाते ! 
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आयुर्वेद की अमूल्य देन — कालमेघ (Kalmegh

🌿 आयुर्वेद की अमूल्य देन — कालमेघ (Kalmegh)

एक शक्तिशाली औषधीय पौधा

Maharshi Charak Yog Dham

आयुर्वेद में ऐसे अनेक दुर्लभ पेड़-पौधों का उल्लेख मिलता है, जिनकी अद्भुत औषधीय शक्तियों से आज भी अधिकांश लोग अनजान हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत प्रभावशाली औषधि है कालमेघ, जिसे प्राचीन काल से भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में विविध रोगों के उपचार हेतु उपयोग किया जाता रहा है।

कालमेघ का प्रयोग सामान्य बुखार, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पेट की गैस, कब्ज, आंतों के कीड़े, लिवर विकार, त्वचा रोग तथा कई जटिल समस्याओं में अत्यंत लाभकारी माना गया है।


✅ कालमेघ का परिचय एवं औषधीय गुण

कालमेघ मुख्यतः उत्तर भारत, बंगाल और मध्य भारत के क्षेत्रों में पाया जाता है। इसका स्वाद अत्यंत कड़वा होता है, इसी कारण इसे
👉 “बिटर का राजा” (King of Bitters) कहा जाता है।

🔬 इसका वैज्ञानिक नाम — Andrographis paniculata
🌿 इसमें पाया जाने वाला प्रमुख सक्रिय तत्व — एन्ड्रोग्राफोलाइड (Andrographolide)
जो इसे बहुआयामी औषधीय गुण प्रदान करता है।


✅ कालमेघ के चमत्कारी औषधीय लाभ

1️⃣ रक्त शुद्धिकरण में सहायक

कालमेघ रक्त को शुद्ध करता है। इसके पत्तों का काढ़ा फ्लू, वायरल संक्रमण, मलेरिया और पुराने ज्वर में लाभकारी माना जाता है।

2️⃣ मधुमेह (डायबिटीज) में लाभकारी

इसमें मौजूद एंटी-डायबेटिक गुण रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं। सीमित मात्रा में सेवन से मधुमेह रोगियों को लाभ मिलता है।

3️⃣ लिवर को रखे स्वस्थ

कालमेघ लिवर में पित्त स्राव को संतुलित करता है।
✔ फैटी लिवर
✔ पीलिया
✔ लिवर टॉक्सिसिटी
जैसी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है।

4️⃣ त्वचा रोगों में अत्यंत लाभकारी

रक्त शुद्धि के माध्यम से यह
✔ मुंहासे
✔ फोड़े-फुंसी
✔ खुजली
✔ त्वचा संक्रमण
में राहत देता है। इसके पत्तों का लेप सूजन व जलन कम करता है।

5️⃣ हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी

कालमेघ में एंटी-क्लॉटिंग गुण होते हैं, जो रक्त के थक्के बनने से रोकते हैं और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाते हैं।

6️⃣ रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए

यह इम्यून सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे शरीर वायरल, बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण से बेहतर लड़ पाता है।

7️⃣ सूजन एवं दर्द में राहत

कालमेघ के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण
✔ जोड़ों के दर्द
✔ गठिया
✔ शरीर की सूजन
में उपयोगी माने जाते हैं।

8️⃣ बार-बार होने वाले बुखार में लाभकारी

मलेरिया, टायफाइड और वायरल फीवर में यह शरीर की रिकवरी को तेज करता है।

9️⃣ अनिद्रा व तनाव में सहायक

यह नर्वस सिस्टम को शांत करता है, जिससे तनाव कम होता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है।

🔟 पाचन तंत्र को मजबूत करे

कालमेघ पाचन रसों को बढ़ाकर
✔ कब्ज
✔ गैस
✔ अपच
जैसी समस्याओं में राहत देता है।


⚠️ कालमेघ के नुकसान व सावधानियाँ

हालाँकि कालमेघ एक सुरक्षित औषधि है, परंतु अत्यधिक सेवन से निम्न दुष्प्रभाव हो सकते हैं—

❌ एलर्जी
❌ चक्कर आना
❌ उल्टी या पेट फूलना
❌ हृदय संबंधी परेशानी
❌ अन्य दवाओं के साथ प्रतिक्रिया

👉 गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान सेवन से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।


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