जय गुरु गोरखनाथ

जय गुरु गोरखनाथ 🙏 अलख निरंजन!🙏🙏🙏

❓ नाथ परंपरा का अमोघ व्यापार वृद्धि मंत्र☘️

नाथ परंपरा – वो परंपरा जिसके सिद्ध योगियों ने अपनी तपस्या से ब्रह्मांड की शक्तियों को वश में किया। इसी महान परंपरा के शिरोमणि हैं महायोगी गुरु गोरखनाथ जी! आज हम आपके लिए लेकर आए हैं गुरु गोरखनाथ जी का एक ऐसा अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध शाबर मंत्र, जो आपके व्यापार में चमत्कारिक वृद्धि कर सकता है। यह कोई सामान्य मंत्र नहीं, बल्कि नाथ सम्प्रदाय का सिद्ध किया हुआ शाबर मंत्र है, जिसकी शक्ति अपार है। चाहे आपकी दुकान हो, शोरूम हो, ऑनलाइन बिजनेस हो या कोई भी व्यापार, यह मंत्र आपके धन-लाभ के सभी मार्ग खोल देगा।

🔍 शाबर मंत्र की महिमा

गुरु गोरखनाथ जी ने अपनी साधना से अनेक शाबर मंत्रों को सिद्ध किया। शाबर मंत्र की विशेषता यह है कि ये लोक भाषा में होते हैं, इनमें संस्कृत की जटिलता नहीं होती, लेकिन इनकी शक्ति किसी भी वैदिक मंत्र से कम नहीं होती। शाबर मंत्र सीधे सिद्ध योगियों की वाणी से निकले हुए मंत्र हैं, जो तुरंत प्रभाव दिखाने की क्षमता रखते हैं। व्यापार वृद्धि के लिए यह मंत्र इसलिए विशेष है क्योंकि इसमें गुरु गोरखनाथ जी की आज्ञा शक्ति, नवनाथों का आशीर्वाद और कुबेर देवता की कृपा – तीनों का संयोग है।

📜 व्यापार वृद्धि का सिद्ध शाबर मंत्र

मन्त्र ||
ओम विष्णु प्रिया लक्ष्मी, शिव प्रिया सती से प्रकट हुई।
कामाक्षा भगवती आदि शक्ति, युगल मुर्ति महिमा अपार,
दोंनो की प्रीती अमर, जानें संसार।
दुहाई कामाक्षा की। आय बढ़ा, व्वय घटा। दया कर माई।
ओम नमः विष्णु प्रियाय। ओम नमः शिव प्रियाय।
ओम नमः कामाक्षाय। ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं फट् स्वाहा॥

⚡ पूरी साधना विधि (21 दिवसीय प्रयोग)

शुभ मुहूर्त – गुरुवार या रविवार के दिन साधना शुरू करें। गुरु पुष्य नक्षत्र का योग मिल जाए तो अत्यंत शुभ।

साधना का समय – प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में (सुबह 4 से 6 बजे) या संध्या काल में सूर्यास्त के समय।

साधना स्थान – व्यापार स्थल पर या घर के पूजा स्थान पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।

आवश्यक सामग्री

➤ पीला कपड़ा, गुरु गोरखनाथ जी का चित्र या मूर्ति

➤ घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती

➤ एक लोटा जल, पीले फूल, अक्षत (चावल)

➤ केसर का तिलक, एक नारियल, गुड़ या मिश्री

➤ रुद्राक्ष की माला

साधना की विधि

➤ स्नान करके स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।

➤ पूजा स्थान पर बैठकर गुरु गोरखनाथ जी का ध्यान करें, केसर का तिलक लगाएं, पीले फूल अर्पित करें।

➤ तीन बार "ॐ नमो आदेश गुरु गोरखनाथ को" बोलकर गुरु वंदना करें।

➤ रुद्राक्ष की माला पर इस मंत्र का जप प्रारंभ करें।

➤ प्रतिदिन 3 माला (324 बार) मंत्र का जप करें।

➤ लगातार 21 दिनों तक बिना नागा साधना करें।

➤ जप के बाद गुरु गोरखनाथ जी को गुड़ या मिश्री का भोग लगाएं।

➤ भोग प्रसाद स्वयं ग्रहण करें या किसी जरूरतमंद को दें।

➤ 21 दिन पूर्ण होने पर अंतिम दिन नारियल चढ़ाकर विशेष पूजा करें।

⚠️ महत्वपूर्ण नियम और सावधानियाँ

➤ साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।

➤ 21 दिन तक सात्विक भोजन करें। मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज वर्जित है।

➤ साधना काल में किसी से इस मंत्र के बारे में चर्चा न करें, मौन रहें।

➤ मंत्र जप के समय व्यापार वृद्धि का स्पष्ट चित्र मन में बनाएं, संकल्प शक्ति मजबूत रखें।

➤ साधना बीच में न छोड़ें। एक दिन भी छूटने पर पूरी साधना दोबारा शुरू करनी होगी।

✅ साधना के परिणाम

➤ व्यापार स्थल पर ग्राहकों की संख्या में वृद्धि

➤ अटके हुए सौदे बनने लगेंगे

➤ प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलने की शक्ति

➤ धन का प्रवाह निरंतर बना रहेगा

➤ व्यापार की बाधाएं स्वतः दूर होंगी

➤ नए व्यापारिक अवसर सामने आएंगे

🔊 वैकल्पिक उपाय

अगर आप स्वयं मंत्र का जप नहीं कर सकते, तो इस मंत्र को प्रतिदिन अपने व्यापार स्थल पर सुन सकते हैं। सुनने से भी समस्त लाभों की प्राप्ति होगी।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: क्या यह मंत्र हर तरह के व्यापार के लिए प्रभावी है?
उत्तर: हां, यह मंत्र हर प्रकार के व्यापार-व्यवसाय के लिए समान रूप से प्रभावी है। चाहे आप दुकान चलाते हों, शोरूम हो, ऑनलाइन बिजनेस करते हों, फैक्ट्री हो या ऑफिस – इस मंत्र की शक्ति सभी के लिए एक समान काम करती है।

प्रश्न 2: क्या महिलाएं यह साधना कर सकती हैं?
उत्तर: हां, सच्ची श्रद्धा और विश्वास रखने वाली कोई भी महिला इस साधना को कर सकती है। हां, मासिक धर्म के दौरान साधना न करें, उन दिनों में सिर्फ मंत्र का मानसिक जाप करें।

प्रश्न 3: क्या माला का होना अनिवार्य है?
उत्तर: माला से जप करने से मंत्र की ऊर्जा एकाग्र होती है और अधिक प्रभाव मिलता है। रुद्राक्ष की माला सर्वोत्तम मानी गई है। अगर माला न हो तो अंगुलियों से गिनती करके भी जप कर सकते हैं।

प्रश्न 4: अगर एक दिन साधना छूट जाए तो क्या करें?
उत्तर: यदि एक दिन भी साधना छूट जाए तो पूरी 21 दिन की साधना दोबारा शुरू करनी होगी। इसलिए नियमितता बनाए रखना बहुत जरूरी है। साधना शुरू करने से पहले अपनी दिनचर्या देख लें।

प्रश्न 5: क्या सिर्फ मंत्र सुनने से भी लाभ होगा?
उत्तर: हां, यदि स्वयं जप करना संभव न हो तो नियमित रूप से इस मंत्र को सुनने से भी लाभ प्राप्त होता है। मंत्र की तरंगें वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलाती हैं और व्यापार में वृद्धि होती है।

प्रश्न 6: क्या यह मंत्र कर्ज से मुक्ति दिला सकता है?
उत्तर: यह मंत्र सीधे व्यापार वृद्धि के लिए है। व्यापार बढ़ने से आय बढ़ेगी, जिससे कर्ज चुकाने की क्षमता बनेगी। नियमित साधना से आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है और कर्ज का बोझ अपने आप कम होने लगता है।

प्रश्न 7: साधना के दौरान क्या खाने-पीने की कोई पाबंदी है?
उत्तर: हां, साधना काल में सात्विक भोजन करना चाहिए। मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज, तामसी भोजन से दूर रहें। हल्का और पौष्टिक भोजन लें। इससे मन शुद्ध रहता है और मंत्र का प्रभाव बढ़ता है।

प्रश्न 8: क्या यह मंत्र प्रतिस्पर्धियों को नुकसान पहुंचाने के लिए है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। यह मंत्र आपके अपने व्यापार की वृद्धि के लिए है, किसी को हानि पहुंचाने के लिए नहीं। किसी के प्रति द्वेष भाव रखकर यह साधना न करें। सकारात्मक संकल्प के साथ ही साधना करें।

प्रश्न 9: क्या इस मंत्र का जप किसी भी समय किया जा सकता है?
उत्तर: सबसे अच्छा समय ब्रह्ममुहूर्त (सुबह 4-6 बजे) है। यदि यह संभव न हो तो संध्या काल में सूर्यास्त के समय भी कर सकते हैं। दिन के अन्य समय में भी कर सकते हैं, लेकिन प्रातः और संध्या का समय विशेष प्रभावी है।

प्रश्न 10: क्या यह साधना परिवार के दूसरे सदस्य भी कर सकते हैं?
उत्तर: हां, परिवार का कोई भी सदस्य इस साधना को कर सकता है। सभी मिलकर भी कर सकते हैं। इससे व्यापार में और अधिक वृद्धि होती है।

📚 विशेष सूचना🧿🧿🧿🧿🧿🧿

आने वाली पुस्तक "सिद्ध शाबर मंत्र कोष" में गुरु गोरखनाथ सहित नाथ परंपरा के 101 सिद्ध शाबर मंत्रों का संग्रह होगा। साथ ही हर मंत्र की पूरी साधना विधि, नियम, सावधानियां और अनुभव साधकों के प्रत्यक्ष अनुभव भी इसमें शामिल किए जाएंगे। यह पुस्तक हर उस साधक के लिए अमूल्य है जो शाबर मंत्रों की सिद्धि प्राप्त करना चाहता है। जल्द ही यह पुस्तक आपके लिए उपलब्ध होगी।

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॥ गुरु गोरखनाथ जी की जय ॥
॥ अलख निरंजन ॥

बबूल की फली हड्डियों को बज्र बनाता है

बबूल की फली हड्डियों को बज्र बनाता है टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए गठिया (अर्थराइटिस )जोड़ों का दर्द सूजन बवासीर पाचनतंत्र कमजोरी और शुगर को भी कंट्रोल करने में बहुत अच्छा काम करता है लिकोरिया को 48 घंटे में कंट्रोल करें 
 माउथ#कैंसर में प्रयोग. बबूल का फल और नीम का फल 
 समान मात्रा में लेकर लौंग इलायची डालकर पानी में गर्म करके गलाला करना चाहिए मुंह में गिरा कर घाव को धोना चाहिए दिन में तीन-चार बार करना चाहिए 48 घंटे में आपको राहत पता चल जाएगा

 इसमें उत्तम कोटि का कैल्शियम पाया जाता है बबूल के फल के कई औषधीय फायदे हैं जो आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग किए जाते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख फायदे दिए गए हैं:

1. बवासीर (पाइल्स) में राहत*: बबूल के फल का उपयोग बवासीर के इलाज में किया जाता है। इसके फल का चूर्ण या काढ़ा बनाकर सेवन करने से बवासीर के लक्षणों में राहत मिलती है।

2. पाचन तंत्र की समस्याएं*: बबूल के फल में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह कब्ज, दस्त, और पेट दर्द जैसी समस्याओं में राहत प्रदान कर सकता है।

3. मधुमेह नियंत्रण*: बबूल के फल में #Roman्करा के स्तर को नियंत्रित करने वाले गुण होते हैं। इसका सेवन मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक हो सकता है।

4. त्वचा संबंधी समस्याएं*: बबूल के फल का उपयोग त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे कि एक्जिमा, मुंहासे, और घावों के इलाज में किया जा सकता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

5. मुंह के स्वास्थ्य में सुधार*: बबूल के फल का उपयोग मुंह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। इसके एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह में बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने में मदद करते हैं और दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।

6. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना*: बबूल के फल में विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं और शरीर को विभिन्न संक्रमणों से बचाते हैं।

7. महिलाओं के स्वास्थ्य में लाभ*: बबूल के फल का उपयोग महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी समस्याओं और श्वेत प्रदर जैसी समस्याओं के इलाज में किया जा सकता है।

बबूल की फलियों का प्रयोग करते समय इनके बीज निकालने की आवश्यकता नहीं होती; पूरी फली को बीजों सहित ही सुखाकर चूर्ण बनाया जाता है।
​विभिन्न रोगों के लिए इसके सेवन की विधियाँ नीचे दी गई हैं:
​हड्डियों, जोड़ों और कमर दर्द: फली के बारीक चूर्ण को समान मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम 1 चम्मच गुनगुने दूध के साथ लें। यह फ्रैक्चर जोड़ने और कैल्शियम की कमी दूर करने में रामबाण है।
​मुँह के रोग: फलियों को पानी में उबालकर उस काढ़े से कुल्ला (गरारे) करें।
​श्वेत प्रदर और स्वप्नदोष: फलियों के चूर्ण में पिसी हुई मिश्री मिलाकर ठंडे पानी या गाय के दूध के साथ नियमित सेवन करें।
​बवासीर और मधुमेह: बिना मिश्री मिलाया हुआ शुद्ध फली चूर्ण आधा चम्मच सुबह-शाम ताजे पानी के साथ लें।
​कैंसर: आयुर्वेद में इसे सहायक औषधि (Imunomodulator) के रूप में देखा जाता है, परंतु गंभीर रोगों में इसका प्रयोग केवल अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में ही करें।

 सेवन करने की विधि. बबूल के फल को छाया में सुखाकर पाउडर  बनाकर भी सेवन कर सकते हैं 
 और ताजा का काढ़ा बनाकर भी सेवन कर सकते हैं
 लिकोरिया में ताजा फल को पीसकर मिश्री मिलाकर शर्बत बनाकर पीना चाहिए श्वेत प्रदर नष्ट हो जाता है
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किसी को पता नहीं सुख 7 नहीं 8 होते हैं

किसी को पता नहीं सुख 7 नहीं 8 होते हैं

1. पहला सुख निरोगी काया!
अर्थात हमारे शरीर में किसी भी प्रकार का कोई भी रोग नहीं होना चाहिए कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए कोई कष्ट नहीं होना चाहिए किसी भी प्रकार की पीड़ा से मुक्त शरीर ही पहला सुख है।

2. दूसरा सुख घर में माया!
अर्थात जीवन जीने के लिए, दान पुण्य करने के लिए, और आनंद से जीवन व्यतीत करने के लिए हमारे घर में पर्याप्त माया हो।माया अर्थात धन होना चाहिए।

3. तीसरा सुख पुत्र आज्ञाकारी!
यदि किसी के पास अपार धन-दौलत हो रूप हो गुण हो ऐश्वर्या हो इज्जत हो लेकिन यदि उसका पुत्र उसकी ही आज्ञा नहीं मानता है तो वे तमाम सुख सुविधाएं उसके लिए नर्क के समान है पुत्र का आज्ञाकारी होना अति आवश्यक है।

4. चौथा सुख सुलक्षणा नारी!
सभी प्रकार के सुख सुविधाएं होते हुए रूप सौंदर्य होते हुए विभिन्न प्रकार के विलासिता के साधन होते हुए भी यदि पत्नी अच्छे लक्षणों वाली नहीं है तो जीवन में सुख नहीं हो सकता इसलिए एक पत्नी का सुलक्षणा होना अति आवश्यक है।

5. पांचवा सुख राज में पाया!
अर्थात यदि घर में मुख्य पुरुष के सरकारी नौकरी हो या वह राज्य कार्यों से जुड़ा हुआ हो राज्य से उसको आमदनी प्राप्त होती हो और राजकाज आसानी से हो जाते हो।

6. छठा सुख पड़ोसी "भाया"!
अर्थात हमारे पड़ोस में रहने वाले लोग इस प्रकार के होने चाहिए कि हमारे विचार उनसे मिलते हो और उनके विचार हमसे मिलते हैं वह हमारे साथ हमेशा अच्छा सोचते हो और हमारे सुख-दुख में सहयोगी होने चाहिए अन्यथा यदि सभी प्रकार की सुख सुविधाएं होने के बावजूद भी यदि पड़ोसी कुटिल है और हमारी हानि करने वाला है तो वह भी एक प्रकार का दुख है इसलिए पड़ोसी का अच्छा होना सुख माना गया है।

7. सातवा सुख मात पिता का साया!
जिस व्यक्ति के माता और पिता जीवित होते हैं वह व्यक्ति सभी सुखों को पा लेता है माता पिता की सेवा करने का अवसर प्राप्त होता है और माता-पिता का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है तो माता-पिता का जीवित रहना भी एक प्रकार का सुख है।

8. आठवां सुख पुत्री का साया!
वैसे तो सुख सात ही प्रकार के माने गए हैं किंतु घर में पुत्री का होना आठवां सुख माना गया है इसलिए घर में 🌿यदि पुत्री हो और उपरोक्त सभी सुख उपलब्ध हो तो ये आठों सुख माने गए हैं।

महाभारत का सार सिर्फ़ नौ लाइनों में

महाभारत का सार सिर्फ़ नौ लाइनों में समझें, जिसमें पाँच लाख श्लोक हैं....*

आप किसी भी धर्म के हों,
चाहे आप औरत हों या मर्द,
चाहे आप गरीब हों या अमीर,
चाहे आप अपने देश में हों या विदेश में,
संक्षेप में...
*अगर आप इंसान हैं, तो महाभारत के ये 9 अनमोल मोती ज़रूर पढ़ें और समझें....*

1. `अगर आप समय रहते अपने बच्चों की बेवजह की मांगों और इच्छाओं पर कंट्रोल नहीं करेंगे, तो आप ज़िंदगी में लाचार हो जाएँगे...` *'कौरव'*

2. `आप कितने भी ताकतवर क्यों न हों, अगर आप अधर्म का साथ देंगे, तो आपकी ताकत, हथियार, हुनर और आशीर्वाद सब बेकार हो जाएँगे...` *'कर्ण'*

3. `अपने बच्चों को इतना बड़ा न बनाएँ कि वे अपने ज्ञान का गलत इस्तेमाल करके पूरी तबाही मचा दें...`
*'अश्वत्थामा'*

4. `कभी ऐसे वादे न करें कि आपको अधर्मियों के आगे झुकना पड़े...`  *'भीष्म पितामह'*

5. `अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल *धन, शक्ति, अधिकार और गलत लोगों का साथ आखिर में पूरी बर्बादी की ओर ले जाता है...`
*'दुर्योधन'*

6. `कभी भी सत्ता की बागडोर किसी अंधे व्यक्ति को मत दो, यानी जो स्वार्थ, धन, घमंड, ज्ञान, मोह या वासना में अंधा हो, क्योंकि वह बर्बादी की ओर ले जाएगा...`
*'धृतराष्ट्र'*

7. `अगर ज्ञान के साथ समझदारी है, तो आप ज़रूर जीतेंगे...` *'अर्जुन'*

8. `धोखा आपको हर मामले में सफलता नहीं दिलाएगा...`
*'शकुनि'*

9. `अगर आप नैतिकता, नेकी और कर्तव्य को सफलतापूर्वक बनाए रखते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकती।`
*'युधिष्ठिर'*

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*सर्वे सन्तु निरामयाः*

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*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, वो पर्याप्त है। ओम शांति।*
     `

विटामिन बी 12 गुड बैक्टीरिया और एंटी ऑक्सीडेंट

एक महीना है लगभग रोज पिओ पूरे वर्ष विटामिन B12 बनाने व रोगों से लड़ने वाले नन्हे पर बलशाली रक्षकों वाली फौज प्राप्त होगी 
पुनः पोस्ट 
कांजी:- ***विटामिन बी 12 गुड बैक्टीरिया और एंटी ऑक्सीडेंट का महानतम स्त्रोत पारंपरिक भारतीय पेय ***

कांजी को आयुर्वेद में एक चमत्कारी पेय भी कहा जाता है जो आपके शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाती है। यह एक फर्मेंटेड ड्रिंक होती है जिसे पानी काली गाजर चुकंदर राई या पीली सरसों आंवला हल्दी  और काली मिर्च के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है।

 एक कांच के जार को गरम पानी से धो कर सुखा कर लीजिए.  इसमें 5 लीटर पानी कटी हुई 4 गाजर, 2आंवला हल्दी 1 बड़ा चकुंदर डालें 50ग्राम कच्ची हल्दी के टुकड़े 1 छोटी चम्मच सादा नमक, 2 छोटी चम्मच काला नमक, ½ छोटी चम्मच दरदरी कुटी काली मिर्च, 1 पिंच हींग और 2 बड़े चम्मच दरदरी कुटी राई या पीली सरसों डालिए.  अब इन्हें अच्छे से मिलाएं, फिर इसमें उबालकर ठंडा हुआ हुआ पानी डाल कर अच्छे से मिला कर सूती कपड़े से ढाक दीजिए.
इसे ढाक कर 3 से 4 दिन तक धूप में रखिए और शाम में अंदर रख लीजिए.  अगर धूप ना हो तो रसोई में किसी गरम जगह रखिए.  चौथे दिन इसे खोल कर मिला कर परोसें, इस तरह ये बनकर तैयार हो जाएगा.
सुबह एक गिलास खाली पेट पिएं 
कांजी पीने से इम्यूनिटी मज़बूत होती है.
 इसमें में घुलनशील फ़ाइबर होता है , जो पाचन के लिए फ़ायदेमंद होता है क्योंकि वो गुड बैक्टीरिया का भोजन होता है 
कांजी में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो आंतों के लिए बेहद फ़ायदेमंद होते हैं.
 एनर्जी का स्तर बढ़ता है.  सूजन कम होती है.
 वज़न नियंत्रण में रहता है.
मेटाबॉलिक रेट बढ़ती है.
आंखों की कमज़ोरी दूर होती है.
गाजर बीटा कैरोटीन और विटामिन-ए, सी ,के और जिंक से भरपूर होता है। वहींं चुकंदर एंटी ऑक्सीडेंट और विटामिन-सी से भरपूर होता है। इससे बनने वाली कांजी पोषक तत्वों का खजाना है।  एंटीऑक्सीडेंट शरीर में मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) को निष्क्रिय करने, ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है

#गुड_बैक्टीरिया #प्री_बायोटिक #प्रोबायोटिक्स #स्ट्रेस #डिप्रेशन #एंजायटी #इम्युनिटी #ऑटोइम्यून 

हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है बैक्टीरिया जो हमारे शरीर की रक्षा प्रणाली विकास और पुनर्निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण साधन हैं 

क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर के अंदर विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया रहते हैं? माना जाता है की बैक्टीरिया बीमारी पैदा करते हैं, लेकिन उनमें से सभी हानिकारक नहीं होते हैं, सच तो यह है की उनमें से ज्यादातर कुछ नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और जीवन के लिए आवश्यक हैं।
भी। 5,000 से ज्यादा प्रकार के बैक्टीरिया पेट-आंत में पाए जाते हैं। इनमें से कुछ मित्र होते हैं व कुछ शत्रु।
ज्‍यादातर लोगों को लगता है कि बैक्‍टीरिया माने बीमारी। और वे उन्‍हें परास्‍त करने की अंधाधुंध लड़ाई का हिस्‍सा बन जाते हैं। लेकिन बाद हमें पता चला कि सारे बैक्टीरिया हमारे शत्रु नहीं होते हैं। कुछ अच्छे बैक्टीरिया भी हैं जो हमारे शरीर में एक मित्र की तरह मौजूद हैं। यह कई तरह के घातक हमलों से हमारी रक्षा करने की क्षमता रखते हैं।
कुछ बैक्टीरियाज ऐसे होते हैं जो हमारी सेहत की रक्षा करने के लिए दवाओं तक से लड़ जाते हैं पर हम उनके बारे में जान ही नहीं पाते और उनका अंधाधुंध कत्ल करते रहते हैं। ये उन बीमारियों से भी शरीर की रक्षा करने  में  सक्षम है जिनपर एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो चुकी हैं 

यह विश्वास करना मुश्किल हो सकता है लेकिन वास्तव में 100 ट्रिलियन बैक्टीरिया हमारे शरीर में होते हैं, जिनमें से अधिकांश आंत में पाए जाते हैं। उन्हें आँतों के फूल कहा जाता है और इसका वजन लगभग 600ग्राम से 1.5किलोग्राम होता है जितना हमारे लिवर का वजन है। वैज्ञानिक उन्हें “Forgotten Organ” कहते हैं क्योंकि वे हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं, हमारे स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं और हमारे शरीर को आकार देते हैं।

 आपको पता होना चाहिए कि हम बैक्टीरिया के बिना नहीं रह सकते- ये वे हैं जो भोजन के पाचन में और हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं ताकि हम infection से लड़ सकें और आराम से रह सकें। वे कई मायनों में हमारे Health Heroes हैं

अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित करने के लिए हमें बैक्टीरिया की आवश्यकता होती है; विशेष रूप से हमारी आंत में जिसमें हमारे शरीर की लगभग 70% प्रतिरोधक क्षमता होती है। ये बैक्टीरिया रोगों की गंभीरता को कम करने वाली हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पाचन तंत्र में बैक्टीरिया पोषक तत्वों को शोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें हमारे शरीर पचा नहीं पाते हैं। आप यह जानकर हैरान होंगे की खाने से लगभग 30% calories हमारे आंत के बैक्टीरिया की मदद से मिलते हैं।
हमारी आंतों की दीवाऱों को सुरक्षित रखने रिपेयर करने में सबसे बड़ा दायित्व यही सूक्ष्म यौद्धा व श्रमिक निभाते हैं जिससे हमारी रक्तवाहिकाओं में प्रदूषित रक्त का प्रवाह रूकता है 
कोई भी अल्सर या कैंसर शरीर में तभी पनपता है खासकर आंतों और लीवर में जब आपकी आंतों में ये सूक्ष्म यौद्धा कमजोर व संख्या में कम पड़ जाते हैं 

मैंने पचासों बार लिखा है कि विटामिन बी12 के लिए मांसाहार की आवश्यकता नहीं 
कुछ बैक्टीरिया हमारी आँतों में विटामिन्स बना सकते हैं जैसे की विटामिन K और विटामिन बी 12। खाना पकाने से विटामिन B आसानी से नष्ट हो जाता है और हम में से कई इस महत्वपूर्ण विटामिन की कमी से पीड़ित हैं। बैक्टीरिया इसे दूर करने में मदद कर सकते हैं।
हमारे मूड को प्रभावित करता है- गुड बैक्टीरिया बायो फर्मेंटेशन से विटामिन बी 12 का निर्माण करता है 
क्या कभी आप घबराहट या डर से बीमार पड़े हैं या आपके पेट में हलचल मची है। वैज्ञानिकों के अनुसार हमारे आंत के बैक्टीरिया डोपामाइन और सेरोटोनिन (हमारे आँतों के अच्छे हार्मोन हैं ये) जैसे हार्मोन का उत्पादन करके हमारे मूड को प्रभावित कर सकते हैं जो तनाव और चिंता को कम करते हैं।
ये नन्हे बैक्टीरिया भयंकर से भयंकर डिप्रेशन से बाहर निकाल सकते हैं 

इसलिए अच्छे बैक्टीरिया को बनाए रखना हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

एक अच्छी तरह से संतुलित आहार लेना, व्यायाम, पर्याप्त नींद, अधिक फाइबर, पानी और प्रोबायोटिक्स, ये सारे जीवन के लिए आवश्यक बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं।

अगर किसी व्यक्ति को हर समय पेट में भारीपन या फूला हुआ महसूस होता है, कब्ज या दिन में दो या ज्यादा बार मल त्याग करना पड़ता है, मुंह की उचित साफ-सफाई के बावजूद भी सांसों से दुर्गंध आती है. इसका मतलब आपकी आंत अस्वस्थ है. वहां बैड बैक्टीरिया या बुरे परजीवी अपना घर बना रहे हैं 

इस पर पूरी पुस्तिका लिखी जा सकती है 42 तरह से शरीर में काम करते हैं ये नन्हे हीरो 

DrJaibir Singh 
 9350272972
अवधूत आयुर्विज्ञान संस्थान जींद हरियाणा