मक्खी पहले तो गुड़ से लिपटी रहती है

 *आज* *के* *विचार* 

 *कबीर* *दास* *जी* *कहते* *हैं* कि मक्खी पहले तो गुड़ से लिपटी रहती है। अपने सारे पंख और मुंह गुड़ से चिपका लेती है लेकिन जब उड़ने प्रयास करती है तो उड़ नहीं पाती तब उसे अफ़सोस होता है। ठीक वैसे ही इंसान भी सांसारिक सुखों में लिपटा रहता है और अंत समय में में अफ़सोस होता है।
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  *आज* *के* *विचार* 

 *कबीर* *साहिब* *कहते* *हैं* कि केवल बातें करने से कुछ प्राप्त नहीं होता। मनुष्य को अपने जीवन में सही आचरण उतारना चाहिए। जैसे केवल "पानी-पानी" कहने से प्यास नहीं बुझती, पानी पीना पड़ेगा तभी प्यास बुझेगी। वैसे ही सच्ची साधना और आचरण के बिना आत्मिक लाभ नहीं मिलता। सच्चा मार्ग करनी में है, जपने में नहीं।

ये किलन मंत्र इतना प्रबल है

ये किलन मंत्र इतना प्रबल है कि एक माला में ही सिद्ध हो जाता है 
मंत्र : “कीलू कीलू महा कीलू ,कीलू अपनी काया
मरघट का मसान कीलू ,हनुमत करे छाया 
इस किलन मंत्र का जाप हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने करना है । लाल आसन ,लाल या सफेद वस्त्र। उत्तर मुख होकर बैठना है । लड्डू का भोग लगाना है।सभी का पंचोपचार पूजन करना है।रूद्राक्ष माला से , पॉच माला करनी है । केवल एक ही मंगलवार में सिद्ध हो जाएगा । ये प्रयोग मंगल वार रात्रि ठीक नौ बजे शुरू करना है। इसमें ये ध्यान रखे कि समय नौ बजे का हो।पूजन पाठ नौ से पहले शुरू कर देना। जाप नौ बजे शुरू हो जाना चाहिए। इन मंत्रो को अलग अलग मंगलवार को सिध्द करना है । आपको कम से कम 5 माला करनी है, किन्तु जो साधक अपनी शक्ति अधिक बढ़ा न चाहते है वे इसका 11, 21, 41, 51 माला अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते है । ये पूरा कार्य करने में सक्षम है ।जाप के बाद 1 माला हवन गुगल गुड घी मिलाकर करे
इसे सिद्ध करके किसी का भी इलाज किया जा सकता है छोटी मोटी झाडफूंक ये आसानी से करता है । इस मंत्र की सबसे अच्छी बात येहै कि इसके द्वारा यदि किसी को मंत्र से पढके धागा या गंडा दिया जाता है तो वो किसी भी सूतक यानि मरण और जनन दोनो सूतको मे काम करता है खण्डित नही होता । इसे पहन कर मरीज कही भी आ या जा सकता है । किसी दूसरे के ऊपर प्रयोग करते समय मंत्र मे अपनी काया की जगह अमुक की काया पढे और अमुक की जगह मरीज का नाम लें । ये एक मंत्र ही पूरी भगतई सम्भाल लेता है ,बस इसे ठीक से सिद्ध करने की जरूरत होती है ।

समय का चक्र और हमारे जीवन

समय का चक्र और हमारे जीवन की परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, शुरुआत करने की कोई अंतिम तिथि नहीं होती। अक्सर लोग किसी नए काम को शुरू करने, कोई नया हुनर सीखने या अपने सपनों को पूरा करने से सिर्फ इसलिए पीछे हट जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अब सही समय हाथ से निकल चुका है। लेकिन यह सत्य नहीं  है । 
जब तक हमारे भीतर जीवन की डोर यानी सांसें चल रही हैं, तब तक हर पल एक नया अवसर है।
असली शुरुआत किसी बाहरी तारीख या उम्र से नहीं, बल्कि हमारे 'मन की चाह' से होती है। जब मन में कुछ नया रचने, कुछ कर गुजरने या खुद को बदलने का पक्का इरादा जाग उठता है, तो वहीं से एक नया जीवन शुरू हो जाता है। इच्छाशक्ति और आत्मबल के सामने सब कुछ छोटा पड़ जाता है। जब तक भीतर का यह उत्साह और संकल्प जीवित है, तब तक अतीत की असफलताएं या बीता हुआ समय कोई मायने नहीं रखता। इतिहास गवाह है कि दुनिया में बड़े और क्रांतिकारी बदलाव अक्सर उन लोगों ने किए, जिन्होंने जीवन के उस पड़ाव पर शुरुआत की जहाँ बाकी लोग हार मानकर बैठ जाते हैं।
इसलिए खुद को कभी भी 'वक्त बीत जाने' के बहाने के पीछे नहीं छिपाना चाहिए। जीवन एक निरंतर बहती हुई नदी की तरह है, जिसमें हर मोड़ पर एक नई धारा फूटना संभव है। जब तक आपके भीतर कुछ बेहतर करने की तड़प और अपनी मंजिलों को पाने की आस जिंदा है, तब तक हर सुबह आपके लिए एक कोरा पन्ना लेकर आती है, जहाँ आप अपनी कहानी को नए सिरे से लिख सकते हैं। इसलिए, जब तक सांस बाकी है, तब तक उम्मीद और प्रयास का दामन थामे रखना ही जीवन की असली सार्थकता है।

ओम शांति। 
आपका हर पल मंगलमय हो।
शुभ रात्रि।

ॐ श्री हनुमते नमः

।। ॐ श्री हनुमते नमः ।।

जब दिमाग थक जाए और दिल परेशान हो, तब सिर्फ एक उपाय काम करता है — चिंतामणि हनुमान अष्टक।

जहाँ दवा काम नहीं करती, वहाँ हनुमान जी का यह अष्टक चमत्कार करता है।

।। चिंतामणिहनुमान अष्टकम् ।।

(हिन्दी अर्थ सहित)
​(१)
चिंतामणिं चित्तरत्नं भक्तानां कामदायकम्।
अज्ञानध्वंसममलं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥१॥
​(२)
विषादार्णवमग्नानां त्रातारं धैर्यवर्धनम्।
मानसोल्लासकर्तारं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥२॥
(३)
प्रज्ञाप्रदं महावीरं संशयच्छेदकारकम्।
सत्यसंकल्पसिद्ध्यर्थं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥३॥
(४)
रामभक्तिसुधासक्तं पूर्णकामं जगद्गुरुम्।
विशुद्धज्ञानसम्पन्नं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥४॥
(५)
अस्थिरत्वहरं देवं शान्तिसौख्यप्रदायकम्।
एकाग्रताकरं धीरं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥५॥
(६)
दुश्चिन्ताशमनं सौम्यं सर्वतापह्वरं प्रभुम्।
स्मरणमात्रसंतुष्टं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥६॥
​(७)
अनुभवरूपिणं दिव्यं सर्वसंस्कारदायकम्।
आत्मबोधप्रदं देवं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥७॥
(८)
चिंतामणिस्वरूपं तं चित्तविश्रामकारणम्।
भक्तानां हृदयावासं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥८॥

फलश्रुति
​यः पठेत् प्रातरुत्थाय अष्टकं भक्तिसंयुतः।
सर्वचिन्ताविनिर्मुक्तो धनधान्यसमन्वितः ॥

।। हिंदी में अर्थ ।।

​अर्थ: जो भक्तों के लिए 'चिंतामणि' रत्न के समान हैं, जो चित्त की मलिनता दूर कर सात्विक इच्छाएं पूर्ण करते हैं और अज्ञान के अंधकार का नाश करने वाले निर्मल स्वरूप हैं, उन मारुतात्मज को मैं नमन करता हूँ।1।।

​अर्थ: जो शोक और विषाद (Depression) के समुद्र में डूबे लोगों की रक्षा करने वाले, धैर्य को बढ़ाने वाले और मन में आनंद व उत्साह का संचार करने वाले हैं, उन हनुमान को मेरा प्रणाम।2।।

​अर्थ: जो उत्तम बुद्धि (प्रज्ञा) प्रदान करने वाले, मन के समस्त संशयों और दुविधाओं को काटने वाले तथा सत्य संकल्पों को सिद्ध करने वाले महावीर हैं, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।3।।

​अर्थ: जो निरंतर श्रीराम की भक्ति रूपी अमृत में लीन रहते हैं, जो स्वयं पूर्णकाम (तृप्त) होकर जगत को भक्ति का मार्ग दिखाने वाले गुरु हैं और विशुद्ध ज्ञान से संपन्न हैं, उन हनुमान की मैं वंदना करता हूँ।4।।

​अर्थ: जो मन की चंचलता और अस्थिरता को हरने वाले हैं, परम शांति और आत्मिक सुख देने वाले हैं तथा साधक की एकाग्रता बढ़ाने वाले धीर-वीर हैं, उन्हें मेरा नमन।5।।

​अर्थ: जो बुरी चिंताओं (Anxiety) का शमन करने वाले सौम्य स्वरूप हैं, जो त्रिविध तापों का हरण करते हैं और मात्र स्मरण करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं, उन मारुतात्मज को मैं प्रणाम करता हूँ।6।।

​अर्थ: जो साक्षात् दिव्य अनुभव स्वरूप हैं, जो जीवन में उत्तम संस्कारों का सिंचन करते हैं और आत्मज्ञान (Self-realization) का बोध कराने वाले देव हैं, उन्हें मेरा नमन।7।।

​अर्थ: जो स्वयं साक्षात् चिंतामणि हैं, जो अशांत चित्त को विश्राम (Peace) देने वाले हैं और सदैव भक्तों के हृदय में निवास करते हैं, उन हनुमान की मैं शरण लेता हूँ।8।।

​भावार्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन प्रातःकाल पूर्ण भक्ति के साथ इस 'चिंतामणि अष्टक' का पाठ करता है, वह मानसिक तनाव और समस्त चिंताओं से मुक्त होकर जीवन में सुख, शांति और ऐश्वर्य प्राप्त करता है।9।।

विधि: 'चिंतामणि हनुमान' का यह पाठ उन लोगों के लिए रामबाण है जो मानसिक उलझनों या अनिद्रा (Insomnia) से परेशान हैं।

 पाठ के समय सफेद या पीले पुष्प अर्पित करना और चंदन की सुगंध का प्रयोग करना मन को स्थिर करने में विशेष सहायक होता है।

।। लाभ (Benefits) ।।

,1=मानसिक शांति और तनाव मुक्ति

इस अष्टक का नियमित पाठ मन की चिंता, घबराहट और नकारात्मक विचारों को शांत करता है। Anxiety और overthinking धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।

2=आत्मविश्वास और धैर्य में वृद्धि

हनुमान जी की कृपा से साहस, धैर्य और निर्णय लेने की शक्ति मजबूत होती है। कठिन परिस्थितियों में मन स्थिर रहता है।

3=एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है

छात्रों और साधकों के लिए यह विशेष लाभकारी है। ध्यान और फोकस बेहतर होता है।

4=नकारात्मक ऊर्जा का नाश

मन के भय, संशय और अस्थिरता दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

5=आध्यात्मिक उन्नति

यह पाठ आत्मज्ञान, संस्कार और भक्ति भाव को जागृत करता है, जिससे जीवन में सही मार्गदर्शन मिलता है।

6=नींद में सुधार

अनिद्रा (Insomnia) से परेशान लोगों को शांति और गहरी नींद प्राप्त करने में मदद मिलती है।

7=इच्छाओं की पूर्ति

सच्चे मन से पाठ करने पर सात्विक इच्छाएं धीरे-धीरे पूर्ण होती हैं।

तिजोरी किस दिशा में शुभ

। । ॐ महालक्ष्मी नमो नमः ।।

।। तिजोरी किस दिशा में शुभ किस दिशा में अशुभ ।।

तिजोरी (सेफ/लॉकर) का सही स्थान वास्तु के अनुसार आपके जीवन में धन के प्रवाह, बचत और स्थिरता पर सीधा प्रभाव डालता है। 

नीचे हर दिशा का विस्तार से अर्थ और उसका प्रभाव समझिए।

 1. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)

 यह दिशा देवताओं की मानी जाती है और अत्यंत पवित्र होती है।
यहां तिजोरी रखने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
धन धीरे-धीरे बढ़ता है और घर में सुख-समृद्धि आती है
लेकिन ध्यान रखें: यह पूजा स्थान के लिए अधिक उपयुक्त है, भारी तिजोरी रखने से ऊर्जा बाधित भी हो सकती है

निष्कर्ष: हल्की अलमारी ठीक है, भारी तिजोरी से बचें।

 2. पूर्व दिशा

 पूर्व दिशा सूर्य की दिशा है, जो ऊर्जा और नए अवसरों का प्रतीक है।
यहां तिजोरी रखने से आय के नए स्रोत बनते हैं
व्यापार और नौकरी में तरक्की मिलती है
धन के साथ सम्मान और प्रतिष्ठा भी बढ़ती है

निष्कर्ष: अच्छी दिशा है, खासकर करियर ग्रोथ के लिए

 3. अग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व)

 यह अग्नि तत्व की दिशा है।
यहां तिजोरी रखने से अनावश्यक खर्च बढ़ता है
अचानक धन हानि या कर्ज की स्थिति बन सकती है
घर में तनाव और अस्थिरता आती है

निष्कर्ष: इस दिशा में तिजोरी रखने से बचें।

 4. दक्षिण दिशा

 दक्षिण दिशा यम और स्थिरता से जुड़ी है, लेकिन धन के लिए शुभ नहीं मानी जाती।
यहां रखा धन टिकता नहीं
बार-बार खर्च और नुकसान होता है
मेहनत के बावजूद बचत नहीं बनती

निष्कर्ष: धन रखने के लिए यह दिशा अनुकूल नहीं

 5. नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम)

 यह दिशा स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक है।
यहां तिजोरी रखने से धन सुरक्षित रहता है
बचत मजबूत होती है और धन जमा होता है
परिवार में आर्थिक स्थिरता आती है

निष्कर्ष: तिजोरी रखने के लिए सबसे मजबूत और सुरक्षित दिशा

 6. पश्चिम दिशा

 पश्चिम दिशा परिणाम और उपलब्धि की दिशा है।
यहां तिजोरी रखने से आय स्थिर रहती है
धन धीरे-धीरे बढ़ता है
सामान्य जीवन में संतुलन बना रहता है

निष्कर्ष: मध्यम शुभ दिशा

 7. वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)

 यह वायु तत्व की दिशा है, जो अस्थिरता दर्शाती है।
यहां रखा धन टिकता नहीं
बार-बार खर्च या नुकसान होता है
आर्थिक निर्णय अस्थिर रहते हैं

निष्कर्ष: इस दिशा में तिजोरी नहीं रखें

 8. उत्तर दिशा (सबसे शुभ)

 उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है।
यहां तिजोरी रखने से धन वृद्धि होती है
आय के नए अवसर मिलते हैं
घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है

निष्कर्ष: तिजोरी के लिए सबसे उत्तम दिशा

 विशेष वास्तु टिप्स (बहुत जरूरी)

तिजोरी का मुंह हमेशा उत्तर या पूर्व की ओर खुलना चाहिए

तिजोरी जमीन से थोड़ा ऊंची रखें (लकड़ी के स्टैंड पर)

तिजोरी के अंदर लाल कपड़ा या पीला कपड़ा रखें

तिजोरी के ऊपर भारी सामान न रखें

तिजोरी के पास साफ-सफाई और सुगंध बनाए रखें

जय मां लक्ष्मी जी ।