श्री हनुमान जी का यह शाबर मंत्र

श्री हनुमान जी का यह शाबर मंत्र बहुत ही सिद्ध और तुरंत असर करने वाला मंत्र है ! आप पर किसी प्रकार का संकट या बाधा आई हो . कर्ज का कारण या लड़ाई झगड़ा होने वाला हो. भूत प्रेत की बाधा आई हो. प्राण संकट मैं हो. शरीर बीमारियों से ग्रस्त हो तो निम्न मंत्र का 21 बार उच्चारण करते हुए ताली बजाकर अपने शरीर पर फूंक मारे इस प्रकार करने से हर प्रकार का भय दूर होता है !

मंत्र इस प्रकार है-
ऊँ नमो वज्र का कोठा जिसमें पिंड हमारा बैठा । ईश्वर कुंजी ब्रह्मा का ताला मेरे आठो याम का याति , हनुमंत रखवाला ।। 

हमारे गुरु शिक्षण संस्थान के पेज पर दिए गए मंत्रों मैं अगर किसी को कोई शंका होती है तो कोई भी अभ्यास करके एक बार जरूर आजमाएं प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नजर आएगा !

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ग्रह क्लेश व्यापार बंधा है तो आप संपर्क कर सकते हैं 9424698865

हनुमान शाबर रक्षा मंत्र — भय, बाधा और अचानक संकट से सुरक्षा की सिद्ध साधना

यह शाबर मंत्र हनुमान वीर की रक्षा-शक्ति से जुड़ा हुआ अत्यंत प्रभावी मंत्र माना जाता है। यह मंत्र विशेष रूप से डर, टोना-टोटका, प्रेत-बाधा, शत्रु भय, अचानक होने वाली अनहोनी और मानसिक घबराहट की स्थिति में प्रयोग किया जाता है। शाबर परंपरा में यह मंत्र तुरंत प्रभाव देने वाला माना गया है, बशर्ते इसे विधि और नियम से सिद्ध किया जाए।

मंत्र (जैसा है, वैसा ही):
ओम् चौकी हनुमंत वीर की बाण ध्वजा फहराय।
मारू मारू मारुतिसुत मुष्टिक शत्रु नशाय।
मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंत वीर।।
चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करे शरीर।।
टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाइन डाइ।
सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई।।

यह मंत्र रक्षा कवच की तरह कार्य करता है। इसमें हनुमान जी के साथ श्रीराम, सुदर्शन चक्र और चौकी (रक्षा-घेरा) का आह्वान किया गया है, जिससे बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार की बाधाएँ निष्फल मानी जाती हैं।

साधना शुरू करने से पहले आवश्यक बातें
इस मंत्र की साधना से पहले गुरु गोरखनाथ का पूजन आवश्यक माना गया है, क्योंकि शाबर परंपरा नाथ संप्रदाय से जुड़ी है। साधना के पहले दिन गुरु गोरखनाथ की चालीसा एक बार अवश्य पढ़ें। उसके बाद भगवान गणेश का पूजन करें, ताकि साधना निर्विघ्न पूर्ण हो।

साधना के नियम
साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन आवश्यक है। साधना शांत स्थान पर करें और साधना काल में अनावश्यक क्रोध, झूठ और तामसिक आचरण से बचें।

जप विधि (11 दिन की साधना)
साधना प्रतिदिन एक ही समय करें। लाल या काले आसन पर बैठें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें।
इस मंत्र का रोज़ 3 माला जप करें।
यह क्रम लगातार 11 दिन तक बिना छोड़े करना है।

जप के समय दीपक अवश्य जलाएं। मन को शांत रखें और केवल रक्षा भाव रखें — किसी को हानि पहुँचाने का संकल्प न करें, क्योंकि यह मंत्र रक्षा के लिए है, आक्रमण के लिए नहीं।

अंतिम दिन हवन विधि
11वें दिन जप के बाद हवन किया जाता है।
हवन सामग्री:
– गुग्गल
– घी

हवन करते समय इसी मंत्र से आहुति दें। हवन के अंत में एक खड़ा नींबू काटकर हवन कुंड में डाल दें। यह क्रिया बाधा-विच्छेदन और रक्षा-सिद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

इस प्रक्रिया के बाद मंत्र को सिद्ध माना जाता है।

सिद्धि के बाद प्रयोग विधि
जब भी अचानक डर, बाधा, घबराहट, नकारात्मक ऊर्जा या अनजाना भय महसूस हो —
इस मंत्र को 3 बार पढ़कर अपनी छाती पर हल्की फूंक मार दें।

या
पानी पर 3 बार मंत्र पढ़कर फूंक मारें और वह पानी पी लें।

रक्षा धारण विधि (बहुत महत्वपूर्ण)
एक लाल धागा लें।
उसमें 21 गांठें लगाएं।
हर गांठ पर 11 बार मंत्र पढ़ें।
इसके बाद उस धागे को अपने शरीर पर धारण करें।

यह धागा चलते-फिरते भी रक्षा कवच की तरह कार्य करता है।

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सबसे शक्तिशाली और प्रामाणिक हनुमान शरीर कीलन और घेरा साबर मंत्र

तंत्र साधना और उग्र साबर मंत्रों के जाप के समय सुरक्षा घेरा बनाना अनिवार्य है। तीव्र मंत्रों की ऊर्जा से कई बार आसपास की अदृश्य या नकारात्मक शक्तियां आकर्षित होती हैं। सुरक्षा घेरा मंत्र आपके चारों ओर एक अभेद्य कवच बना देता है, जिससे कोई भी बुरी शक्ति साधना में विघ्न नहीं डाल पाती और न ही आपको कोई नुकसान पहुँचा पाती है।

यहाँ तंत्र शास्त्र का सबसे शक्तिशाली और प्रामाणिक हनुमान शरीर कीलन और घेरा साबर मंत्र दिया जा रहा है।महाशक्तिशाली सुरक्षा घेरा साबर मंत्र

"ॐ नमो आदेश गुरु को। वज्र का कोठा, वज्र का ताला, वज्र की खाई। जहाँ बैठे हनुमान वीर, तहं आन न जाई। रक्षा करे राजा रामचंद्र, दुहाई लक्ष्मण वीर की। ७२ कोठे की किल्ली, जहाँ मेरा पिंड-प्राण रहे, तहां हनुमान वीर पहरा दे। दुहाई लोना चमारिन की, आन आन आदेश।"

सुरक्षा घेरा बनाने की अत्यंत सरल विधि साधना या मूल मंत्र का जाप शुरू करने से ठीक पहले आपको यह घेरा बनाना होता है:-

सामग्री:- अपने पास एक कटोरी में थोड़ा सा साफ जल रख लें, या थोड़ा शुद्ध सिंदूर, या फिर साबुत पीली सरसों के दाने ले लें।

अभिमंत्रित करना:- ऊपर दिए गए सुरक्षा मंत्र को 7 बार लगातार पढ़ें और हर बार कटोरी के पानी, सिंदूर या पीली सरसों पर फूंक (दम) मारें।

घेरा खींचना (3 तरीके - कोई भी एक चुनें):-

जल से:- अपने दाहिने हाथ की उंगली से अपने बैठने के आसन के चारों ओर जमीन पर पानी की एक गोल रेखा (सर्किल) खींच दें।

सरसों से:- अभिमंत्रित पीली सरसों के दानों को अपने आसन के चारों ओर गोल आकार में बिखेर दें।

चाकू/लोहे की वस्तु से:- यदि जल या सरसों न हो, तो किसी लोहे की साफ छुरी या लोहे की कील से अपने चारों ओर जमीन पर गोल घेरा खींच लें।

जब तक आपकी साधना पूरी नहीं हो जाती, आपको इस घेरे से बाहर नहीं निकलना है। साधना समाप्त होने के बाद भगवान को प्रणाम करके आप घेरे से बाहर आ सकते हैं।

इस सुरक्षा कवच के अद्भुत लाभ भय का नाश:- जाप के दौरान होने वाली अजीब आवाजों या डरावने आभासों से यह पूरी तरह रक्षा करता है।

एकाग्रता:- मन विचलित नहीं होता और साधना में पूरा ध्यान लगता है।

तांत्रिक पलटवार से सुरक्षा:- यदि कोई आपके काम में तांत्रिक बाधा डाल रहा है, तो यह मंत्र उस नकारात्मक ऊर्जा को आपके शरीर को छूने भी नहीं देता।अब आपकी असाध्य कार्य सिद्धि साधना पूरी तरह सुरक्षित है।

गुरु योगी अंचलरुद्रनाथ तंत्र मंत्र यंत्र साधक ज्योतिष शास्त्र वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सा मंत्र चिकित्सा यज्ञ चिकित्सा सूर्य चिकित्सा नेचुरोपैथी चिकित्सा पंचगव्य चिकित्सा प्राकृतिक चिकित्सा नाडी परीक्षण विशेषज्ञ 
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असाध्य कार्य सिद्धि महाशक्तिशाली साबर मंत्र

असाध्य (असंभव) कार्यों को सिद्ध करने के लिए तंत्र शास्त्र में वीर साधना और काली साबर मंत्र को सबसे अचूक माना गया है। जब इंसान के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं और काम पूरी तरह असंभव लगने लगता है, तब यह तीव्र प्रयोग बंद रास्तों को बलपूर्वक खोल देता है।यहाँ असाध्य कार्यों के लिए सबसे शक्तिशाली साबर मंत्र और उसकी विशेष विधि दी जा रही है।

असाध्य कार्य सिद्धि महाशक्तिशाली साबर मंत्र

"सत्य नाम आदेश गुरु को। काली माई, जोत सवाई। मेरा कारज (यहाँ अपने असंभव काम का नाम लें) न सधै, तो कालभैरव की दुहाई। दुहाई कामरू कामाख्या माई की, दुहाई गौरा पार्वती की। शब्द सांचा, पिंड कांचा, फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।"

विधि:- केवल 3 शनिवार का गुप्त प्रयोग

असंभव कार्यों के लिए यह प्रयोग लगातार 3 शनिवार को किया जाता है। यह बेहद सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली है।

समय और दिन:- शनिवार की रात 10 बजे के बाद इस साधना को शुरू करें।

दिशा और वस्त्र:- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। 
काले या नीले रंग के कपड़े पहनें।

सामग्री:- एक मिट्टी के दीये में सरसों का तेल डालकर जलाएं। 

सामने मां काली या भैरव जी का मानसिक ध्यान करें। 

भोग के रूप में दो लौंग और एक बताशा दीये के पास रखें।

जाप संख्या:- रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का 3 माला (324 बार) जाप करें। 

तीनों शनिवार को यह प्रक्रिया दोहराएं।

इस साधना के अचूक नियम गुप्त रखें:- इस कार्य और साधना के बारे में अपने परिवार में भी किसी को न बताएं।

 तंत्र में गोपनीयता ही उसकी शक्ति है।

सकारात्मक सोच:- जाप के दौरान मन में यह दृढ़ विश्वास रखें कि आपका असंभव काम अब हर हाल में पूरा होने जा रहा है।

साधना के बाद:- जब 3 शनिवार पूरे हो जाएं, तो किसी चौराहे पर या पीपल के पेड़ के नीचे जाकर एक नींबू काट कर छोड़ आएं और पीछे मुड़कर न देखें।

यह प्रयोग किसी भी कानूनी अड़चन, गंभीर संकट, डूबा हुआ धन, या सालों से रुके हुए बेहद कठिन काम को अनुकूल बनाने की क्षमता रखता है।

                          नजर बुद्धि बांधने का शाबर मंत्र 
विरोधी की नजर और बुद्धि बांधने का अचूक तांत्रिक प्रयोग
नज़र बांधने (सम्मोहन या विरोधियों की दृष्टि और बुद्धि को नियंत्रित करने) के लिए भैरव सिद्ध शाबर मंत्र का प्रयोग बहुत तीव्र माना जाता है। इस मंत्र का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि सामने वाला व्यक्ति आपके प्रभाव में आ जाए, उसकी कुदृष्टि नष्ट हो जाए, या वह आपके विरुद्ध कोई गवाही या गलत कदम न उठा सके।

यहाँ नज़र बांधने का प्रामाणिक भैरव शाबर मंत्र और उसकी संपूर्ण प्रयोग विधि दी गई है:-

सिद्ध भैरव शाबर मंत्र (नज़र बांधने का)

"ॐ नमो आदेश गुरु को।भैरव बाबा वीर, हाथ में लिए तीर।आगे बांधूं, पीछे बांधूं, बांधूं दुष्ट की नजर।देखे जो कुदृष्टि से, उसकी आंख हो जाए पत्थर।चले मंत्र, फुरे वाचा, देखूं भैरव बाबा तेरे इल्म का तमाशा।"

मंत्र को सिद्ध करने की विधि इस मंत्र को पहले से सिद्ध करना होता है ताकि आवश्यकता पड़ने पर यह तुरंत काम करे।

शुभ समय:- किसी भी ग्रहण काल, दीपावली, होली, या शनिवार की रात (10 बजे के बाद)।

स्थान:- घर का कोई एकांत कमरा या भैरव मंदिर।सामग्री: काले हकीक या रुद्राक्ष की माला, सरसों के तेल का दीपक, और भैरव जी को भोग के लिए गुड़-चना या इमरती।

जप संख्या:- इस मंत्र की 5 माला का जप करके इसे सिद्ध कर लें। साधना के समय मुख दक्षिण दिशा की ओर रखें।

कार्य के समय प्रयोग करने के तरीके जब मंत्र सिद्ध हो जाए, तो आप स्थिति के अनुसार नीचे दिए गए तरीकों से इसका प्रयोग कर सकते हैं:-

1. कोर्ट या शत्रु के सामने जाते समय अदालत जाने से पहले या विरोधी के सामने जाने से पहले थोड़ा सा साफ पानी या सफेद भस्म (विभूति) हाथ में लें।

इस मंत्र को 7 बार पढ़ें और हर बार पानी या भस्म पर फूँक मारें (इसे अभिमंत्रित करना कहते हैं)।

उस पानी को पी लें या भस्म का तिलक लगाकर घर से निकलें। सामने वाले की नज़र और बुद्धि आपके पक्ष में बंध जाएगी।

2. कुदृष्टि (बुरी नज़र) से बचने के लिए 

यदि आपको लगता है कि किसी की बुरी नज़र आपके काम या आप पर है, तो 7 साबुत सूखी लाल मिर्च लें।अपने ऊपर से सिर से पैर तक 7 बार उतारें (वारें) और हर बार इस मंत्र को पढ़ें। इसके बाद उन मिर्चों को जलती हुई आग में डाल दें।

अनिवार्य नियम और सावधानियां

गलत इरादा न रखें:- इसका प्रयोग केवल अपनी आत्मरक्षा और न्याय के लिए करें। किसी को बिना वजह सम्मोहित या नुकसान पहुंचाने के लिए करने पर इसका उल्टा प्रभाव हो सकता है।

गोपनीयता:- मंत्र और अपनी साधना को पूरी तरह गुप्त रखें।

मक्खी पहले तो गुड़ से लिपटी रहती है

 *आज* *के* *विचार* 

 *कबीर* *दास* *जी* *कहते* *हैं* कि मक्खी पहले तो गुड़ से लिपटी रहती है। अपने सारे पंख और मुंह गुड़ से चिपका लेती है लेकिन जब उड़ने प्रयास करती है तो उड़ नहीं पाती तब उसे अफ़सोस होता है। ठीक वैसे ही इंसान भी सांसारिक सुखों में लिपटा रहता है और अंत समय में में अफ़सोस होता है।
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  *आज* *के* *विचार* 

 *कबीर* *साहिब* *कहते* *हैं* कि केवल बातें करने से कुछ प्राप्त नहीं होता। मनुष्य को अपने जीवन में सही आचरण उतारना चाहिए। जैसे केवल "पानी-पानी" कहने से प्यास नहीं बुझती, पानी पीना पड़ेगा तभी प्यास बुझेगी। वैसे ही सच्ची साधना और आचरण के बिना आत्मिक लाभ नहीं मिलता। सच्चा मार्ग करनी में है, जपने में नहीं।

ये किलन मंत्र इतना प्रबल है

ये किलन मंत्र इतना प्रबल है कि एक माला में ही सिद्ध हो जाता है 
मंत्र : “कीलू कीलू महा कीलू ,कीलू अपनी काया
मरघट का मसान कीलू ,हनुमत करे छाया 
इस किलन मंत्र का जाप हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने करना है । लाल आसन ,लाल या सफेद वस्त्र। उत्तर मुख होकर बैठना है । लड्डू का भोग लगाना है।सभी का पंचोपचार पूजन करना है।रूद्राक्ष माला से , पॉच माला करनी है । केवल एक ही मंगलवार में सिद्ध हो जाएगा । ये प्रयोग मंगल वार रात्रि ठीक नौ बजे शुरू करना है। इसमें ये ध्यान रखे कि समय नौ बजे का हो।पूजन पाठ नौ से पहले शुरू कर देना। जाप नौ बजे शुरू हो जाना चाहिए। इन मंत्रो को अलग अलग मंगलवार को सिध्द करना है । आपको कम से कम 5 माला करनी है, किन्तु जो साधक अपनी शक्ति अधिक बढ़ा न चाहते है वे इसका 11, 21, 41, 51 माला अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते है । ये पूरा कार्य करने में सक्षम है ।जाप के बाद 1 माला हवन गुगल गुड घी मिलाकर करे
इसे सिद्ध करके किसी का भी इलाज किया जा सकता है छोटी मोटी झाडफूंक ये आसानी से करता है । इस मंत्र की सबसे अच्छी बात येहै कि इसके द्वारा यदि किसी को मंत्र से पढके धागा या गंडा दिया जाता है तो वो किसी भी सूतक यानि मरण और जनन दोनो सूतको मे काम करता है खण्डित नही होता । इसे पहन कर मरीज कही भी आ या जा सकता है । किसी दूसरे के ऊपर प्रयोग करते समय मंत्र मे अपनी काया की जगह अमुक की काया पढे और अमुक की जगह मरीज का नाम लें । ये एक मंत्र ही पूरी भगतई सम्भाल लेता है ,बस इसे ठीक से सिद्ध करने की जरूरत होती है ।

समय का चक्र और हमारे जीवन

समय का चक्र और हमारे जीवन की परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, शुरुआत करने की कोई अंतिम तिथि नहीं होती। अक्सर लोग किसी नए काम को शुरू करने, कोई नया हुनर सीखने या अपने सपनों को पूरा करने से सिर्फ इसलिए पीछे हट जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अब सही समय हाथ से निकल चुका है। लेकिन यह सत्य नहीं  है । 
जब तक हमारे भीतर जीवन की डोर यानी सांसें चल रही हैं, तब तक हर पल एक नया अवसर है।
असली शुरुआत किसी बाहरी तारीख या उम्र से नहीं, बल्कि हमारे 'मन की चाह' से होती है। जब मन में कुछ नया रचने, कुछ कर गुजरने या खुद को बदलने का पक्का इरादा जाग उठता है, तो वहीं से एक नया जीवन शुरू हो जाता है। इच्छाशक्ति और आत्मबल के सामने सब कुछ छोटा पड़ जाता है। जब तक भीतर का यह उत्साह और संकल्प जीवित है, तब तक अतीत की असफलताएं या बीता हुआ समय कोई मायने नहीं रखता। इतिहास गवाह है कि दुनिया में बड़े और क्रांतिकारी बदलाव अक्सर उन लोगों ने किए, जिन्होंने जीवन के उस पड़ाव पर शुरुआत की जहाँ बाकी लोग हार मानकर बैठ जाते हैं।
इसलिए खुद को कभी भी 'वक्त बीत जाने' के बहाने के पीछे नहीं छिपाना चाहिए। जीवन एक निरंतर बहती हुई नदी की तरह है, जिसमें हर मोड़ पर एक नई धारा फूटना संभव है। जब तक आपके भीतर कुछ बेहतर करने की तड़प और अपनी मंजिलों को पाने की आस जिंदा है, तब तक हर सुबह आपके लिए एक कोरा पन्ना लेकर आती है, जहाँ आप अपनी कहानी को नए सिरे से लिख सकते हैं। इसलिए, जब तक सांस बाकी है, तब तक उम्मीद और प्रयास का दामन थामे रखना ही जीवन की असली सार्थकता है।

ओम शांति। 
आपका हर पल मंगलमय हो।
शुभ रात्रि।

ॐ श्री हनुमते नमः

।। ॐ श्री हनुमते नमः ।।

जब दिमाग थक जाए और दिल परेशान हो, तब सिर्फ एक उपाय काम करता है — चिंतामणि हनुमान अष्टक।

जहाँ दवा काम नहीं करती, वहाँ हनुमान जी का यह अष्टक चमत्कार करता है।

।। चिंतामणिहनुमान अष्टकम् ।।

(हिन्दी अर्थ सहित)
​(१)
चिंतामणिं चित्तरत्नं भक्तानां कामदायकम्।
अज्ञानध्वंसममलं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥१॥
​(२)
विषादार्णवमग्नानां त्रातारं धैर्यवर्धनम्।
मानसोल्लासकर्तारं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥२॥
(३)
प्रज्ञाप्रदं महावीरं संशयच्छेदकारकम्।
सत्यसंकल्पसिद्ध्यर्थं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥३॥
(४)
रामभक्तिसुधासक्तं पूर्णकामं जगद्गुरुम्।
विशुद्धज्ञानसम्पन्नं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥४॥
(५)
अस्थिरत्वहरं देवं शान्तिसौख्यप्रदायकम्।
एकाग्रताकरं धीरं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥५॥
(६)
दुश्चिन्ताशमनं सौम्यं सर्वतापह्वरं प्रभुम्।
स्मरणमात्रसंतुष्टं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥६॥
​(७)
अनुभवरूपिणं दिव्यं सर्वसंस्कारदायकम्।
आत्मबोधप्रदं देवं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥७॥
(८)
चिंतामणिस्वरूपं तं चित्तविश्रामकारणम्।
भक्तानां हृदयावासं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥८॥

फलश्रुति
​यः पठेत् प्रातरुत्थाय अष्टकं भक्तिसंयुतः।
सर्वचिन्ताविनिर्मुक्तो धनधान्यसमन्वितः ॥

।। हिंदी में अर्थ ।।

​अर्थ: जो भक्तों के लिए 'चिंतामणि' रत्न के समान हैं, जो चित्त की मलिनता दूर कर सात्विक इच्छाएं पूर्ण करते हैं और अज्ञान के अंधकार का नाश करने वाले निर्मल स्वरूप हैं, उन मारुतात्मज को मैं नमन करता हूँ।1।।

​अर्थ: जो शोक और विषाद (Depression) के समुद्र में डूबे लोगों की रक्षा करने वाले, धैर्य को बढ़ाने वाले और मन में आनंद व उत्साह का संचार करने वाले हैं, उन हनुमान को मेरा प्रणाम।2।।

​अर्थ: जो उत्तम बुद्धि (प्रज्ञा) प्रदान करने वाले, मन के समस्त संशयों और दुविधाओं को काटने वाले तथा सत्य संकल्पों को सिद्ध करने वाले महावीर हैं, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।3।।

​अर्थ: जो निरंतर श्रीराम की भक्ति रूपी अमृत में लीन रहते हैं, जो स्वयं पूर्णकाम (तृप्त) होकर जगत को भक्ति का मार्ग दिखाने वाले गुरु हैं और विशुद्ध ज्ञान से संपन्न हैं, उन हनुमान की मैं वंदना करता हूँ।4।।

​अर्थ: जो मन की चंचलता और अस्थिरता को हरने वाले हैं, परम शांति और आत्मिक सुख देने वाले हैं तथा साधक की एकाग्रता बढ़ाने वाले धीर-वीर हैं, उन्हें मेरा नमन।5।।

​अर्थ: जो बुरी चिंताओं (Anxiety) का शमन करने वाले सौम्य स्वरूप हैं, जो त्रिविध तापों का हरण करते हैं और मात्र स्मरण करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं, उन मारुतात्मज को मैं प्रणाम करता हूँ।6।।

​अर्थ: जो साक्षात् दिव्य अनुभव स्वरूप हैं, जो जीवन में उत्तम संस्कारों का सिंचन करते हैं और आत्मज्ञान (Self-realization) का बोध कराने वाले देव हैं, उन्हें मेरा नमन।7।।

​अर्थ: जो स्वयं साक्षात् चिंतामणि हैं, जो अशांत चित्त को विश्राम (Peace) देने वाले हैं और सदैव भक्तों के हृदय में निवास करते हैं, उन हनुमान की मैं शरण लेता हूँ।8।।

​भावार्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन प्रातःकाल पूर्ण भक्ति के साथ इस 'चिंतामणि अष्टक' का पाठ करता है, वह मानसिक तनाव और समस्त चिंताओं से मुक्त होकर जीवन में सुख, शांति और ऐश्वर्य प्राप्त करता है।9।।

विधि: 'चिंतामणि हनुमान' का यह पाठ उन लोगों के लिए रामबाण है जो मानसिक उलझनों या अनिद्रा (Insomnia) से परेशान हैं।

 पाठ के समय सफेद या पीले पुष्प अर्पित करना और चंदन की सुगंध का प्रयोग करना मन को स्थिर करने में विशेष सहायक होता है।

।। लाभ (Benefits) ।।

,1=मानसिक शांति और तनाव मुक्ति

इस अष्टक का नियमित पाठ मन की चिंता, घबराहट और नकारात्मक विचारों को शांत करता है। Anxiety और overthinking धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।

2=आत्मविश्वास और धैर्य में वृद्धि

हनुमान जी की कृपा से साहस, धैर्य और निर्णय लेने की शक्ति मजबूत होती है। कठिन परिस्थितियों में मन स्थिर रहता है।

3=एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है

छात्रों और साधकों के लिए यह विशेष लाभकारी है। ध्यान और फोकस बेहतर होता है।

4=नकारात्मक ऊर्जा का नाश

मन के भय, संशय और अस्थिरता दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

5=आध्यात्मिक उन्नति

यह पाठ आत्मज्ञान, संस्कार और भक्ति भाव को जागृत करता है, जिससे जीवन में सही मार्गदर्शन मिलता है।

6=नींद में सुधार

अनिद्रा (Insomnia) से परेशान लोगों को शांति और गहरी नींद प्राप्त करने में मदद मिलती है।

7=इच्छाओं की पूर्ति

सच्चे मन से पाठ करने पर सात्विक इच्छाएं धीरे-धीरे पूर्ण होती हैं।