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देशी गाय के घी के फायदे

ए-२ जीनोटाईप मूल भारतीय नस्ल की देशी गाय के ए-२ दूध से जमाया हुवा दही का बिलोना करके मक्खन निकालकर उससे बनाये हुए घी का महत्व ?
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1. देशी गाय का घी की 2 बूंद नाक में डालने से पागलपन दूर होता है।
2. देशी गाय का घी की 2 बूंद नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है।
3. देशी गाय का घी 3 बूंद नाक में डालने से लकवा के रोग में भी उपचार होता है।
4. 20-25 ग्राम देशी गाय का घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गाजे का नशा कम हो जाता है।
5. देशी गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना अॉपरेशन के ही ठीक हो जाता है।
6. नाक में देशी गाय का घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तरोताजा हो जाताहै।
7. देशी गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बाहर निकल कर चेतना वापस लौट आती है।
8. देशी गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते हैं ।
9. देशी गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है।
10. हाथ पाव में जलन होने पर देशी गाय के घी को तलवो में मालिश करें जलन ठीक होता है।
11. हिचकी के न रुकने पर खाली देशी गाय का आधा चम्मच घी खाएं, हिचकी स्वयं रुक जाएगी।
12. देशी गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है।
13. देशी गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है !
14 .देशी गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है।
15. अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच देशी गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें।
16. हथेली और पांव के तलवो में जलन होने पर देशी गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा।
17. देशी गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।
18. जिस व्यक्ति को हार्ट की नली ब्लाक हो और चिकनाई खाने की मनाही है तो एक गिलास देशी गाय के गर्म दुध मे 3 चम्मच देशी गाय का घी मिलाकर 25 से 30 ऊपर नीचे फैट कर 40 दिन तक रात के समय खड़े होकर पिए  हृदय मज़बूत होगा और ब्लोकेज  ख़त्म  हों जायेंगे।
19. देशी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है।
20. देशी गाय का घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बाँध लें। प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा गुनगुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है.
21. फफोलों पर गाय का देशी घी लगाने से आराम मिलता है।
22. देशी गाय के घी की छाती पर मालिस करने से बच्चों के बलगम को बाहर निकालने में सहायक होता है।
23. सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम देशी गाय का घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा।
24. दो बूंद देशी गाय का घी नाक में सुबह शाम 48 दिन लगातार  डालने
से माइग्रेन दर्द ठीक होता है।
25. सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो देशी  गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करें..सर दर्द ठीक हो जायेगा।
26. यह स्मरण रहे कि देशी गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन भी नही बढ़ता, बल्कि वजन को संतुलित करता है ।यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।
27.एक चम्मच देशी गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच देशी बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
28. देशी गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारी औषधि की तरह  इस्तेमाल कर सकते हैं । यह सौराइशिस के लिए भी कारगर है।
29.देशी गाय का घी एक अच्छा (HDL) कोलेस्ट्रॉल है। उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है।
30. अगर आप देशी गाय के घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार, नाक में प्रयोग करेंगे तो यह त्रिदोष (वात पित्त और कफ) को संतुलित करता है।
31- देशी गाय का घी नाक में डालने से खर्राटे 15 दिन में ठीक हो जाते है।
32- देशी गाय का घी पाईल्स, बवासीर, की जगह 10 दिन लगाने से बिल्कुल ठीक होते है।
33- हरपीस एक बीमारी है जो होने पर बड़ा दर्द होता है और ठीक होने ने 20 दिन लगते है देशी गाय के घी को लगाने से 5 से 7 दिन में बील्कुल ठीक हो जाता है।                                             नोट - खाने में देशी गाय का मक्खन  से निकाला हुआ घी और बाकी सभी काम में पञ्चगव्य घी का उपयोग करेगे तो ज्यादा लाभ मिलेगा।

प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली

*"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"*

पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!!

धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!!

ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!!

प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!!

ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!!

भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!!

प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!!

प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार!                                                  तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!!

भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!
डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !!

घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!!

अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!
पानी पीजै बैठकर,  कभी न आवें पास!!

रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय!
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!!

सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश!
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश!!

देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल!
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल^^

दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ!
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!!

सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर!
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!!

भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ!
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड!!

अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल!
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल!

पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान!
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!!

अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग!
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!!

फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर!
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!!

चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति!
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!!

रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय!
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!!

भोजन करके खाइए, सौंफ,  गुड, अजवान!
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!!

लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान!
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान!

चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे !
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !!

सौ वर्षों तक वह जिए, लेते नाक से सांस!
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!!

सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान!
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!!

हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान!
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!!

अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर!
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!!

तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग!
मिट जाते हर उम्र में,तन में सारे रोग। 🌸

42 दिनों में कैंसर ख़तम ! 45000 से ज्यादा लोगों को ठीक करने का दावा ऑस्ट्रिया के प्राकृतिक चिकित्सक Rudolf Breuss के विशेष जूस से..!

42 दिनों में कैंसर ख़तम ! 45000 से ज्यादा लोगों को ठीक करने का दावा ऑस्ट्रिया के  प्राकृतिक चिकित्सक Rudolf Breuss के विशेष जूस से..!!

ऑस्ट्रिया के  रुडोल्फ Breuss ने  कैंसर के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक इलाज खोजने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया है। Rudolf Breuss  ने  बताया के कैंसर ठोस भोजन पर ही जिंदा रहता है , कैंसर को बढ़ने से रोका  जा सकता है अगर कैंसर का मरीज़ 42 दिन तक सिर्फ सब्जिओं का रस और चाय ही ले |

Rudolf Breuss ने एक ख़ास जूस तयार किया जिसके बहुत ही शानदार नतीजे देखने को मिले , उन्होंने इस तरीके से 45,000 से भी ज़यादा लोग जिन्हें कैंसर या कई इसी लाइलाज बीमारियाँ थी को ठीक किया | ब्रोज्स का कहना था के कैंसर सिर्फ प्रोटीन पर ही  जिंदा रहता है |

breuss का कैंसर को ठीक करने का ये तरीका 42 दिन तक चलता है , कियोंके कैंसर के सेल्स का मेटाबोलिज्म हमारे शारीर में मोजूद बाकी सेल्स से अलग होता है , breuss का ये ख़ास किसम का रस इस तरीके से तयार किया गया है  जिस से कैंसर के सेल्स तक कोई ठोस प्रोटीन युक्त भोजन ना  पहुच सके और कोई खुराक न मिलने के कारण उसके सेल्स अपने आप  ख़त्म हो जाएँ परन्तु  ये रस शारीर के बाकि सेल्स को कोई नुकसान नही पहुचाता |

इन 42 दिनों के दौरान सभी कच्चे फल और सब्जियां तरल रूप में दिए जाते हैं | breuss ने इस बात पर ख़ास जोर दिया है के कैंसर के मरीज़ को 42 दिनों के लिए सिर्फ रस और चाय हे दी जाये इसके इलावा कोई भी ठोस चीज़ खाने के लिए नही दी जाये  | इस दौरान इस्तेमाल की जाने वाली सब्जियां कुदरती (organic ) तरीके से उगाइ गई हों और अच्छे से साफ की गई हों |कियोंकि कैंसर के सेल ठोस खाने में पाए जाने वाले प्रोटीन पर ही जिंदा रहते हैं तो अगर आप  42 दिनों के लिए कुछ  भी ठोस नही खायेंगे और सिर्फ जूस और चाय ही  लेंगे तो कैंसर के cell अपने आप  ख़तम हो जायेंगे और शारीर के normal cell उसी तरह रहेंगे |

कच्चे फल और सब्जिओं का रस हमेशा से बहुत सारी  बिमारिओं के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है | विज्ञानं ने भी ये साबित किया है के कच्चे फल और सब्जिओं में anti oxidatns और कई ऐसे  तत्व पाए जाते है जिनका हमारे भोजन में शामिल होना बहुत ज़रूरी है ता के हम आज कल के वातावरण में खुद को खतरनाक बिमारिओं से बचा सकें |

इस ख़ास जूस  में इस्तेमाल होने वाले फल और सब्जियां:

1 चुकंदर  (beet root)1 गाजर    (carrot)1/2 आलू (potato)1 मूली      (radish)1 अजवायन के पोदे की डंडी (celery stick) 

सभी चीजें organic होनी चाहेये |

सभी चीज़ों को जूसर  में डाल  कर अच्छे से रस निकाल  लें और इसे छान लें ता के कोई भी ठोस चीज़ उस में न जाएँ  | गिलास में डाल कर इसे ताज़ा पीयें |

Source:healthytipsworld.net

more :https://fastingparadise.wordpress.com/2012/12/20/rudolf-breuss-cancer-cure/

संजीवनी भोजन

संजीवनी भोजन – चार चम्मच और एक चम्मच मेथी दाना

आज हम आपको ऐसे भोजन के बारे में बताने जा रहें है, जिसको अगर संजीवनी भी कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा. बल बुद्धि और वीर्य बढाने में ये रामबाण है. इसके सेवन से आप खांसी जुकाम से लेकर कैंसर तक आप हर बीमारी से बच सकते हैं. ये भोजन स्वस्थ व्यक्ति को निरोगी बनाये रखता है, कमजोरों को शक्तिशाली, बच्चों को चैंपियन, बूढों को जवान, और जवानो को 100 वर्ष तक जवान बना कर रखता है. इसके फायदे अनगिनत हैं. आइये जाने चार चम्मच गेंहू के दाने और एक चम्मच मेथी दाना से बना ये संजीवनी भोजन.

चार चम्मच गेंहू के दाने और एक चम्मच मेथी दाना ले कर दोनों को चार पांच बार अच्छी तरह साफ़ जल से धो लीजिये. इस के बाद आधा गिलास पानी में डालकर चौबीस घंटे रखें. फिर इनको पानी से निकालकर एक मोटे गीले कपडे में बांधकर अंकुरित होने के लिए चौबीस घंटे तक हवा में लटका दीजये. गर्मियों में बीच बीच में पानी के छींटे मारते रहें.

जिस पानी में गेंहू के दाने और मेथी दानो को भिगोया था उस पानी में आधा निम्बू निचोड़ कर दो ग्राम सौंठ का चूर्ण डाल दीजिये. इसमें दो चम्मच शहद घोलकर सुबह खाली पेट लें. यह पेय बहुत शक्तिवर्धक, पाचक, और सफुर्तिदायक होता है. इसको संजीवनी पेय कहते हैं.

अभी जो गेंहू के दाने और मेथी के दाने अंकुरण के लिए लटकाए थे, जब उनमे अंकुर फूट जाए (औसतन गर्मियों में चौबीस या अड़तालीस घंटों में अंकुरित हो जाते हैं.) इनको सुबह नाश्ते में पीसी काली मिर्च और सेंधा नमक बुरककर खूब चबा चबा कर खाएं. इस नाश्ते को संजीवनी नाश्ता कहते हैं. जो व्यक्ति अंकुरित अन्न को चबा ना सके वो इसको ग्राइंड कर के इसका लाभ लें. अन्यथा उनको ऊपर पानी तक ही सीमित रहना पड़ेगा.