मन और विवेक

 *मन* *और* *विवेक* "

 "*मन*" एक अथाह सागर है, जिसमें चाहनाये लहरों की तरह निरंतर उठती-गिरती रहती हैं। अधिकांश लोग इन चाहनाओं  और भौतिक लालसाओं में उलझकर जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटक जाते हैं और आत्मिक शांति खो बैठते हैं।

 इस चाह के सागर से वही पार हो सकता है, जिसके हृदय में *विवेक* , *आत्म* - *जागरूकता* *और* *सही* - *गलत* *का* *ज्ञान* *हो* । *विवेक* ही मन को स्थिर करता है और जीवन को सही दिशा देता है।

*आज* *के* *विचार* !!

 "*धैर्य*" *व्यर्थ* *नहीं* *जाता* 

हर अच्छी चीज तुरंत नहीं मिलती। कुछ फल समय लेते हैं ताकि तुम्हारे भीतर भी उतनी ही परिपक्वता आ सके।
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