जब तक हमारे भीतर जीवन की डोर यानी सांसें चल रही हैं, तब तक हर पल एक नया अवसर है।
असली शुरुआत किसी बाहरी तारीख या उम्र से नहीं, बल्कि हमारे 'मन की चाह' से होती है। जब मन में कुछ नया रचने, कुछ कर गुजरने या खुद को बदलने का पक्का इरादा जाग उठता है, तो वहीं से एक नया जीवन शुरू हो जाता है। इच्छाशक्ति और आत्मबल के सामने सब कुछ छोटा पड़ जाता है। जब तक भीतर का यह उत्साह और संकल्प जीवित है, तब तक अतीत की असफलताएं या बीता हुआ समय कोई मायने नहीं रखता। इतिहास गवाह है कि दुनिया में बड़े और क्रांतिकारी बदलाव अक्सर उन लोगों ने किए, जिन्होंने जीवन के उस पड़ाव पर शुरुआत की जहाँ बाकी लोग हार मानकर बैठ जाते हैं।
इसलिए खुद को कभी भी 'वक्त बीत जाने' के बहाने के पीछे नहीं छिपाना चाहिए। जीवन एक निरंतर बहती हुई नदी की तरह है, जिसमें हर मोड़ पर एक नई धारा फूटना संभव है। जब तक आपके भीतर कुछ बेहतर करने की तड़प और अपनी मंजिलों को पाने की आस जिंदा है, तब तक हर सुबह आपके लिए एक कोरा पन्ना लेकर आती है, जहाँ आप अपनी कहानी को नए सिरे से लिख सकते हैं। इसलिए, जब तक सांस बाकी है, तब तक उम्मीद और प्रयास का दामन थामे रखना ही जीवन की असली सार्थकता है।
ओम शांति।
आपका हर पल मंगलमय हो।
शुभ रात्रि।