जब दिमाग थक जाए और दिल परेशान हो, तब सिर्फ एक उपाय काम करता है — चिंतामणि हनुमान अष्टक।
जहाँ दवा काम नहीं करती, वहाँ हनुमान जी का यह अष्टक चमत्कार करता है।
।। चिंतामणिहनुमान अष्टकम् ।।
(हिन्दी अर्थ सहित)
(१)
चिंतामणिं चित्तरत्नं भक्तानां कामदायकम्।
अज्ञानध्वंसममलं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥१॥
(२)
विषादार्णवमग्नानां त्रातारं धैर्यवर्धनम्।
मानसोल्लासकर्तारं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥२॥
(३)
प्रज्ञाप्रदं महावीरं संशयच्छेदकारकम्।
सत्यसंकल्पसिद्ध्यर्थं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥३॥
(४)
रामभक्तिसुधासक्तं पूर्णकामं जगद्गुरुम्।
विशुद्धज्ञानसम्पन्नं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥४॥
(५)
अस्थिरत्वहरं देवं शान्तिसौख्यप्रदायकम्।
एकाग्रताकरं धीरं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥५॥
(६)
दुश्चिन्ताशमनं सौम्यं सर्वतापह्वरं प्रभुम्।
स्मरणमात्रसंतुष्टं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥६॥
(७)
अनुभवरूपिणं दिव्यं सर्वसंस्कारदायकम्।
आत्मबोधप्रदं देवं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥७॥
(८)
चिंतामणिस्वरूपं तं चित्तविश्रामकारणम्।
भक्तानां हृदयावासं वन्देऽहं मारुतात्मजम् ॥८॥
फलश्रुति
यः पठेत् प्रातरुत्थाय अष्टकं भक्तिसंयुतः।
सर्वचिन्ताविनिर्मुक्तो धनधान्यसमन्वितः ॥
।। हिंदी में अर्थ ।।
अर्थ: जो भक्तों के लिए 'चिंतामणि' रत्न के समान हैं, जो चित्त की मलिनता दूर कर सात्विक इच्छाएं पूर्ण करते हैं और अज्ञान के अंधकार का नाश करने वाले निर्मल स्वरूप हैं, उन मारुतात्मज को मैं नमन करता हूँ।1।।
अर्थ: जो शोक और विषाद (Depression) के समुद्र में डूबे लोगों की रक्षा करने वाले, धैर्य को बढ़ाने वाले और मन में आनंद व उत्साह का संचार करने वाले हैं, उन हनुमान को मेरा प्रणाम।2।।
अर्थ: जो उत्तम बुद्धि (प्रज्ञा) प्रदान करने वाले, मन के समस्त संशयों और दुविधाओं को काटने वाले तथा सत्य संकल्पों को सिद्ध करने वाले महावीर हैं, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।3।।
अर्थ: जो निरंतर श्रीराम की भक्ति रूपी अमृत में लीन रहते हैं, जो स्वयं पूर्णकाम (तृप्त) होकर जगत को भक्ति का मार्ग दिखाने वाले गुरु हैं और विशुद्ध ज्ञान से संपन्न हैं, उन हनुमान की मैं वंदना करता हूँ।4।।
अर्थ: जो मन की चंचलता और अस्थिरता को हरने वाले हैं, परम शांति और आत्मिक सुख देने वाले हैं तथा साधक की एकाग्रता बढ़ाने वाले धीर-वीर हैं, उन्हें मेरा नमन।5।।
अर्थ: जो बुरी चिंताओं (Anxiety) का शमन करने वाले सौम्य स्वरूप हैं, जो त्रिविध तापों का हरण करते हैं और मात्र स्मरण करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं, उन मारुतात्मज को मैं प्रणाम करता हूँ।6।।
अर्थ: जो साक्षात् दिव्य अनुभव स्वरूप हैं, जो जीवन में उत्तम संस्कारों का सिंचन करते हैं और आत्मज्ञान (Self-realization) का बोध कराने वाले देव हैं, उन्हें मेरा नमन।7।।
अर्थ: जो स्वयं साक्षात् चिंतामणि हैं, जो अशांत चित्त को विश्राम (Peace) देने वाले हैं और सदैव भक्तों के हृदय में निवास करते हैं, उन हनुमान की मैं शरण लेता हूँ।8।।
भावार्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन प्रातःकाल पूर्ण भक्ति के साथ इस 'चिंतामणि अष्टक' का पाठ करता है, वह मानसिक तनाव और समस्त चिंताओं से मुक्त होकर जीवन में सुख, शांति और ऐश्वर्य प्राप्त करता है।9।।
विधि: 'चिंतामणि हनुमान' का यह पाठ उन लोगों के लिए रामबाण है जो मानसिक उलझनों या अनिद्रा (Insomnia) से परेशान हैं।
पाठ के समय सफेद या पीले पुष्प अर्पित करना और चंदन की सुगंध का प्रयोग करना मन को स्थिर करने में विशेष सहायक होता है।
।। लाभ (Benefits) ।।
,1=मानसिक शांति और तनाव मुक्ति
इस अष्टक का नियमित पाठ मन की चिंता, घबराहट और नकारात्मक विचारों को शांत करता है। Anxiety और overthinking धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।
2=आत्मविश्वास और धैर्य में वृद्धि
हनुमान जी की कृपा से साहस, धैर्य और निर्णय लेने की शक्ति मजबूत होती है। कठिन परिस्थितियों में मन स्थिर रहता है।
3=एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है
छात्रों और साधकों के लिए यह विशेष लाभकारी है। ध्यान और फोकस बेहतर होता है।
4=नकारात्मक ऊर्जा का नाश
मन के भय, संशय और अस्थिरता दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
5=आध्यात्मिक उन्नति
यह पाठ आत्मज्ञान, संस्कार और भक्ति भाव को जागृत करता है, जिससे जीवन में सही मार्गदर्शन मिलता है।
6=नींद में सुधार
अनिद्रा (Insomnia) से परेशान लोगों को शांति और गहरी नींद प्राप्त करने में मदद मिलती है।
7=इच्छाओं की पूर्ति