ख़ुदी को कर बुलंद इतना,
कि हर तक़दीर से पहले I
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे,
बता तेरी रज़ा क्या है I
“डर मुझे भी लगा फांसला देख कर, पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर, खुद ब खुद मेरे नज़दीक आती गई मेरी मंज़िल मेरा हौंसला देख कर।”
दुनिया का बोझ जिंदगी से उतार दे
छोटी सी जिंदगी है हंस के गुजार दे।।।