झुका रहे गुरु शीस हमारा

झुका रहे गुरु शीश हमारा,
हर पल
तुम्हरे चरनन मैं।
सिपत तुम्हारी, हर पल दाता, रहै हमारे सुमरन मैं।

पल भर कभी न भटके मनबा, सदां रहै गुरू हुकमन मैं।।

चित पर अंकित नाम रहै,
और जुगत लगै मोय खेल,
भगत लगै मोय सफर सुहाना,
ऐसी कर देव मैहर,
   दाता, ऐसी कर देव मैहर।।

जगत चबेना काल लगे,
मन 'सत्त' 'सत्त' जपता जाये, ऐसी महर करो मेरे दाता, जनम सफल हुय जाये।।
सत्तनाम।