एक बेटी का प्रश्न है, साध जी तुम कहते हो कि सब जगह मालिक है तो हमें क्यों नहीं दिखते है ???.... देखो जी संपूर्ण पृथ्वी में अंदर जल ही जल है, परंतु ऊपर वह हमें नहीं दिखाई देता है, जब हम कुआं खोदते हैं, तो पानी निकल आता है, ऐसे ही सब जगह मेरे मालिक हैं, "कबीर साहेब ने कहा है जिसको नर तू ढूंढत फिरता सदा तुम्हारे पास में, मैं तो हूं विश्वास में," तो भाई विश्वास रूपी कुआं खोदो , फिर मालिक दाताजी का सब जगह अनुभव होने लगेगा, यानी विश्वास करो कि सब जगह मेरा मालिक ही मालिक है। फिर वे हमारे अनुभव में आ जाएंगे...