यदि हमारे परिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर खटपट रहती है, तब हमारा मन ,हमारा चित, कभी भी मालिक के चरणो में नहीं लगेगा, यदि मालिक के चरणो में अपना चित् लगाना चाहते हैं, तो हमें निस्वार्थ भाव से अपने स्वार्थ छोड़कर अपने परिवार में एकता रखनी जरूरी है, यह परिवार की *एकता* ही हमें, हमारे निजी स्वार्थों से ऊपर उठा कर, हमारे मालिक के साथ एकता स्थापित करती है, तो इसलिए हमारे जीवन में *एकता* का बड़ा भरी महत्व है ,इसलिए हम छोटी-छोटी बातों को लेकर जो मनमुटाव पैदा कर लेते हैं, वह हमारे आध्यात्मिक सफर में बहुत बड़ी बाधा बनकर खड़ी हो जाती है, जब भी हम अपने मालिक का ध्यान करने बैठेंगे, तो यह पारिवारिक खटपट- खटपट सामने आकर खड़ी हो जाती है, और हम लाख कोशिशों के बाद भी *मालिक* का ध्यान नहीं कर पाते हैं, यही हमें सन्मार्ग से हटाकर महान विपत्ति में डाल देती है, तो हमें आपसी खटपट से बचना चाहिए (सतनाम हिरदे जान ले तू बहुत कर लेते प्यार)...