जो सत् करतार के सूक्षम चरणों की शरण ले लेता है, वह कहीं भी नहीं अटकता । वह सर्वथा निर्भय, निःशंक, निःशोक और निश्चिन्त हो जाता है । कल्याण का सबसे बढ़िया रास्ता शरणागति है । शरणागति में सब कुछ आ जाता है ।
संसार में बाकी अन्य प्राणियों के हित का भाव रखने वाला जहाँ भी रहेगा, वहीं सत् करतार को प्राप्त कर लेगा ।