जिस शब्द से सारी सृष्टि की रचना हुई
है,जिस शब्द से ये आत्मा बनी है,जिस
शब्द से हमारा जीवन चल रहा है,जिससे
हमारा वजूद है,हमारा अस्तित्व है वही-
शब्द आनंद और शान्ति का परम श्रोत
है। जब हमारी सूरत उस शब्द के समीप
आयेगी तभी हमें आनंद और शांति का
अनुभव होगा। और जितना हम उस-
शब्द से दूर रहेंगे उतना ही हमें दुःख और
आशांति होगी। सुरत-शब्द योग ही इस
मनुष्य जीवन का परम सार है।