मेरी बिटिया
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बिटिया तू मेरी परछाईं है।
जब इस जग तू आई ही है।
सुन काम अधूरे कुछ करना।
कभी तू बुराई से ना डरना।
जम कर करना विरोध बुरे का।
बदलना ही क्यों न पडे तुझे सलीका।
अपनी ताकत तुम व्यर्थ ना करना।
आजीवन चाहे देना धरना।
अडिग रहना तुम सत्य के संग में।
कभी रंगना ना झूठ के रंग में।
यह संसार मतलबी बड़ा है।
सत्य से हरदम ही ये लड़ा है।
जाग्रत करना सुप्त सदाएं।
काँटो सब भावी बाधाएँ।
आत्मा की आवाज को सुनना।
स्वाभिमान की राह को चुनना।
ढाल बनाना स्वयं को स्वयं की।
मैं से भी तब होती ध्वनि वयं की।
दूरदृष्टि को जाग्रत रखना हमेशा।
मिटाती है यह सब भावी कलेश।
प्रगाढ प्रेम शील का तेरा आचरण।
सफल करता तेरा जीवन-मरण।
आत्म संयम कदापि ना खोना।
करता जग में यह कद बोना।
क्रोध की अग्नि से दूर ही रहना।
धुँधला देता है यह हर गहना।
मुझ समान मत तुम अति सहना।
बात हमेशा मन की तुम कहना।