माउथ#कैंसर में प्रयोग. बबूल का फल और नीम का फल
समान मात्रा में लेकर लौंग इलायची डालकर पानी में गर्म करके गलाला करना चाहिए मुंह में गिरा कर घाव को धोना चाहिए दिन में तीन-चार बार करना चाहिए 48 घंटे में आपको राहत पता चल जाएगा
इसमें उत्तम कोटि का कैल्शियम पाया जाता है बबूल के फल के कई औषधीय फायदे हैं जो आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग किए जाते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख फायदे दिए गए हैं:
1. बवासीर (पाइल्स) में राहत*: बबूल के फल का उपयोग बवासीर के इलाज में किया जाता है। इसके फल का चूर्ण या काढ़ा बनाकर सेवन करने से बवासीर के लक्षणों में राहत मिलती है।
2. पाचन तंत्र की समस्याएं*: बबूल के फल में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह कब्ज, दस्त, और पेट दर्द जैसी समस्याओं में राहत प्रदान कर सकता है।
3. मधुमेह नियंत्रण*: बबूल के फल में #Roman्करा के स्तर को नियंत्रित करने वाले गुण होते हैं। इसका सेवन मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक हो सकता है।
4. त्वचा संबंधी समस्याएं*: बबूल के फल का उपयोग त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे कि एक्जिमा, मुंहासे, और घावों के इलाज में किया जा सकता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
5. मुंह के स्वास्थ्य में सुधार*: बबूल के फल का उपयोग मुंह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। इसके एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह में बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने में मदद करते हैं और दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।
6. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना*: बबूल के फल में विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं और शरीर को विभिन्न संक्रमणों से बचाते हैं।
7. महिलाओं के स्वास्थ्य में लाभ*: बबूल के फल का उपयोग महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी समस्याओं और श्वेत प्रदर जैसी समस्याओं के इलाज में किया जा सकता है।
बबूल की फलियों का प्रयोग करते समय इनके बीज निकालने की आवश्यकता नहीं होती; पूरी फली को बीजों सहित ही सुखाकर चूर्ण बनाया जाता है।
विभिन्न रोगों के लिए इसके सेवन की विधियाँ नीचे दी गई हैं:
हड्डियों, जोड़ों और कमर दर्द: फली के बारीक चूर्ण को समान मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम 1 चम्मच गुनगुने दूध के साथ लें। यह फ्रैक्चर जोड़ने और कैल्शियम की कमी दूर करने में रामबाण है।
मुँह के रोग: फलियों को पानी में उबालकर उस काढ़े से कुल्ला (गरारे) करें।
श्वेत प्रदर और स्वप्नदोष: फलियों के चूर्ण में पिसी हुई मिश्री मिलाकर ठंडे पानी या गाय के दूध के साथ नियमित सेवन करें।
बवासीर और मधुमेह: बिना मिश्री मिलाया हुआ शुद्ध फली चूर्ण आधा चम्मच सुबह-शाम ताजे पानी के साथ लें।
कैंसर: आयुर्वेद में इसे सहायक औषधि (Imunomodulator) के रूप में देखा जाता है, परंतु गंभीर रोगों में इसका प्रयोग केवल अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में ही करें।
सेवन करने की विधि. बबूल के फल को छाया में सुखाकर पाउडर बनाकर भी सेवन कर सकते हैं
और ताजा का काढ़ा बनाकर भी सेवन कर सकते हैं
लिकोरिया में ताजा फल को पीसकर मिश्री मिलाकर शर्बत बनाकर पीना चाहिए श्वेत प्रदर नष्ट हो जाता है