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जिसका भाव दूसरों को सुख देने का होता है
🪷 सतनाम 🪷 जिसका भाव दूसरों को सुख देने का होता है, उसको मालिक अपनी तरफ से सुख भेज देते हैं ,जिस का भाव दूसरों को तंग व परेशान करने का होता है, उसके पास दुख, विपत्ति आफत, अपने आप दौड़ी चली आती हैं, इसलिए अपने भाव को शुद्ध रखिए , क्योंकि भाव बहुत तेज होता है, अनेक प्रकार की साधनाओ को करने वाले साधकों को मालिक की प्राप्ति कब होगी, इसका अनुमान नहीं, लेकिन जिस साधक का भाव यह रहता है ,की मालिक मेरे अपने हैं, उनका यह भाव मालिक के पास बहुत तेजी से पहुंचता है ,और उन्हें उतनी ही तेजी से मालिक की प्राप्ति हो जाती है, इसमें संदेह न करें..