शोंच
हम जैसा भी शोंचते है। अच्छा य बुरा हमारा मन बैसा ही बनता है अगर हमारी शोंच अच्छी है पाजिटिब है स्ट्रांग है। तो हमारा मन भी उसी र्पकार काम करने लगता है और शरीर भी एलर्ट हो जाता है हर काम हमारा सही से होने लगता है क्योकि मन शोंच और शरीर जब तीनो किसी काम को अन्जाम देते है तो हर काम सही ही होगा अच्छा काम हो और सफलता न मिले यह संभव नही यह सब बडिया सोच से ही हो सकता है हम अच्छे से आगे बड रहे है फिर कोई भी कार्य असभ्ब नही बुराई की तरफ हम बड ही नही रहे है इसससे हर मदद मिलती है लगन सच्ची और सही की जरूरत है कोई भी रास्ता तय हो जता है रास्ता कोई भी हो
इसी मे खुशी है इसी मे अपना पन है मंजिल तो मिलनी है जिस दिन हम सबको साथ लेकर अपना समझ कर चलते है। सब अपने हो जाते हैं जो अपना बनता है उसी से खुशी प्रेम अपन्त्व मिलता है हमे ऐसे ही आगे बडना चाहिए तो ही
खुशी प्यार सब कुछ मिलेगा यही समझना चाहिए
सब अपने है अपनो से ही सब हासिल कर सकते है
बुराई की तरफ से अपने मन को बहुत दूर ही रक्खे तो संभब हो पायगा
अच्छा मारग यही से सुरू होता है मन को यही से शान्ति मिलती है सब को साथ रखना है और सबके साथ रहना है इसी मे खुशी है
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***********सत्तनम
अर्जनभान
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