चाहना पूर्ति मन का वॄक्ष

कई बार दाता मालिक से चहानायें करते ही तुरंत पूरी कर देते है!एक बार संयोग से एक थका हुआ व्यापारी एकांत एक वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी नींद लग गई!जागते ही उसे बहुत भूख लगी,उसने आस पास देखकर सोचा-'काश कुछ खाने को मिल जाए!दाता मालिक तो हर क्षण सब देख और सुन रहें है!मालिक की कृपा दया महिर से ऐसी हुई तत्काल स्वादिष्ट पकवानों से भरी थाली हवा में तैरती हुई उसके सामने आ गई।व्यापारी ने भरपेट खाना खाया और भूख शांत होने के बाद सोचने लगा.काश कुछ पीने को मिल जाए 'तत्काल उसके सामने हवा में तैरते हुए अनेक शरबत आ गए!शरबत पीने के बाद वह आराम से बैठ कर सोचने लगा कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ!हवा में से खाना पानी प्रकट होते पहले कभी नहीं देखा न ही सुना.जरूर इस पेड़ पर कोई भूत रहता है जो मुझे खिला पिला कर बाद में मुझे खा लेगा ऐसा सोचते ही तत्काल उसके सामने एक सोच विचार में भय का भूत आया और उसे खा गया!इस प्रसंग से हम यह सीख सकते है कि हमारा मस्तिष्क ही चहाना पूर्ति वृक्ष है हम जिस चीज की प्रबल कामना करेंगे!वह हमको अवश्य मिलेगी!हम अधिकांश लोगों को जीवन में बुरी चीजें इसलिए मिलती हैं.क्योंकि हम इस जगत में बहुत ही ज्यादा लिप्त है!बुरी चीजों की ही कामना हम खुद करते हैं!हम इंसान ज्यादातर हर समय सोचते है-कहीं बारिश में भीगने से हम बीमार न हों जाँयें और हम बीमार हो जाते हैं!हम इंसान सोचते है - मेरी किस्मत ही खराब है,और हमारी किस्मत सचमुच खराब हो जाती हैं इस तरह हम देखेंगे कि हमारा अवचेतन मन चहाना पूर्ति वृक्ष की तरह हमारी चहानाओं को ईमानदारी से पूर्ण करता है!इसलिए हमें अपने मस्तिष्क में विचारों की सावधानी से प्रवेश करने की अनुमति देनी चाहिए!यदि गलत विचार इस मन के अंदर आ जाएगे तो गलत परिणाम मिलेंगे!विचारों पर हमें काबू रखना ही अपने जीवन पर काबू करने का रहस्य है.!हमारे विचारों से ही हमारा जीवन या तो सहन शीतलता भर जाता है या अपना पराया तेरी मेरी.इसी बदौलत ही हमारा जीवन सुखमय या दुख:मय बनता है.!विचार हमारे एक जादूगर की तरह होते है,जिन्हें बदलकर हम अपना जीवन बदल सकते है..!इसलिये सदा मालिक की कृपा महिर से हम अपनी सकारात्मक सोच रखने,की कोशिश करें!यदि हम अच्छा सोचने लगते है!तो दाता मालिक इस प्रानी को और भी अच्छी समझ शक्ति देने लगते है!इस लिए हमें सच बोलना और सच्चाई का साथ देना जितने हम सच्चाई से भरें होगे!उतने ही विचार मालिक के नाम ग्यान इस हृदय में भिदेगे!