अंधेरा अहंकार ज्ञान के प्रकाश से ही दूर होगा | एक सत्तअबगत नाम जपकर चित में अंकित करने से ही जगत और भगत के सभी कारज सरेंगे!करनी रूपी धन भी जमा होगा!अब यह प्रानी विचार करें!अगर यह प्रानी रात दिन नाम जप रहा है!और उसके बाद भी अगर हमारा स्वाभाव और darshiti नही बदली तो नाम ग्यान चित में कैसे ठहर सकेंगा!यह हमारे विचार करने की बात है!बदलाव के लिए हमें कुछ भी छोड़ने की जरूरत नही पड़ेगी!अगर हम कुछ बातें अपने दिनचार्य में अपनाने की कोशिश करें!तो अगर हम चहाते है!इस चित में सत्तअबगत नाम ठहरे तब हमें हर वो अच्छाई मालिक की हुकम मुजब अपनाने की कोशिश करते रहें!जिससे मनको शान्ति मिलें सत्तअबगत नाम हृदय में भिदे कुछ बातें घर परिवार समाज रिश्तेदार ऐसी मनमें घर कर जाती है!जो ना चहाते हुए भी हम इंसान के मन में रहती है!वही हमें कालौ बन कर हम पर हावी रहती है!घर या बाहर किसी को बुरा या उनकी कमियों को जाहिर करने से अच्छा है!हम उन्हें समझें!अगर वो हमारी समझ से बाहर है!तो हम कुछ टाइम के लिए सत्तनाम बोलकर कहकर उनसे दूर हो जाये!ताकि जब भी हमारा मिलना हो हम अपनी कही बातों में शर्मिदा ना हो कोई ऐसी बेजोग बात ना बोले जिससे मालिक के इस प्रानी बोलता के बोल खराब ना हो हमारे मालिक रोंम रोंम के भेदी है!बात कोई भी हो कैसी भी हो मालिक की महिर से हम कोशिश करे!यह बोल ग्यान जोग ही रहे!कोशिश करेंगे!तो दाता मालिक महिर जरूर करेंगे!ग्यान जोग मालिक के हुकम मुजब चलेंगे!तो वे दाता अपने इस प्रानी को हर क्षण एक नये और ग्यान जोग मार्ग दिखाकर सुहेली कर बाने में हर पल उन दाता की दया महिर मिलती रहेंगी!हम विस्वास गाढ़ा बनायें रख्खें!उन दाता के नाम ग्यान में सही सतनाम सुमर!सतनाम सरै सब काम!
जहाँ भी लिखा होता है"तुम सब कैमरे की नज़र में हो"पढने के साथ ही हम व्यक्ति सतर्क हो जाते है,और यथासंभव ग़लत काम करने से परहेज़ करने लगते है!जबकि हम सब इंसान द्वारा निर्मित उपकरण मात्र है!
किसी के नियंत्रण में है! कभी खराब भी हो सकता है!पर हमें समझना चाहिए,हम कितने जान बुझ कर ना समझी में ऐसे कर्म करते है!इस बोल से व्यौहार दृष्टि से और हम भूल जाते है!कि हम हर समय मालिक की नज़र में हैं,और वहाँ की नज़र न ख़राब होती है,न बंद होती है,न किसी के नियंत्रण मे होती है,यानी बचने की कोई संभावना नहीं है,जैसा कर्म करेगे!बैसा ही हम जरूर भरेगें!इस लिए हम सोच से दृष्टि से सबकी भलाई रहै!और हम अपने दाता मालिक का नाम ले कर ध्यान करने की कोशिश करते रहें,उन्हीं से आस रख्खें!उन्ही का विस्वास होगा वो ही जो हमने वोया हैं!ध्यान रहे,हम मालिक की नज़र में है"
होसी जोग विजोग न होई!!
सत्तनाम सही!