हमारी परेशानियाँ जीवन को दुखी नही बनाती,

हमारी परेशानियाँ जीवन को दुखी नही बनाती,बल्कि हमारा नजरियाँ उसे मुश्किल बना देता हैं!गुस्सा
बेचैनी व डर को दरकिनार करके पहले हम समस्या को पहचानें,समस्या से हम भागे नहीं हम मनमें धीरज रखकर अपनी करी को स्वीकारें,दाता मालिक ने हमें समझ बुद्वि,और विवेक दिया हैं!एक अच्छी कोशिश हम हमेंशा करते रहें!और हम सबसे बेहतर समाधान तक पहूँचने का प्रयास करते रहैं!यह जगत हैं यहाँ सबगुण सम्पन कोई नही है!हम समस्याओं को जीवन का विस्तार मानें!हम अपने इस जीवन को आसान और सरल बना सकते हैं!दुख आयें तो अपने कर्म मान लेने हैं!और सुख आये तो हमें अपने मालिक की आपार महैर कृपा मान लेनी हैं!और माननी हैं,अगर हम शांत होना चाहते हैं,तो हम अपने मालिक की हर चीज मालिक दाता को ही सौपे हुए रहें,तब कोई कारज बनेंगे!बोल तो हम रहें है,पर कर हम भी नही पाते हैं,पर करने की कोशिश जरूर करते हैं,और कर रहें हैं!बाकी सब हम अपने दाता मालिक पर छोड़ दे,जो भी मेरे दाता का न्याय होगा!वही जोग होगा!और मेरी कर्म करनी में जैसा हम करेंगे बैसा ही फल हमें दाता देगे,जो वोया है,वही हमें मिलेगा!