एक परिवार में उच्च कुल की बहू आई

एक परिवार में उच्च कुल की बहू आई । उसने जब पहली बार  भोजन बनाया तो उसमें नमक थोड़ा ज्यादा पड़ गया । घर के सभी सदस्य भोजन करने आये । हर एक ने एक दूसरे से यही पूछा कि आज भोजन किसने बनाया । सास ने बड़े प्यार से उत्तर दिया भोजन तो मैंने बनाया है ।

अंदर कमरे में बहू सब बातें सुन रही थी । वह बड़ी गंभीर हो गई,  उसका दिल सास के लिए कृतज्ञता से भर गया ।  वह सोचने लगी कि मेरी सास का मेरे से कितना प्यार है जो सबके सामने मुझे अपमानित होने से बचा लिया। वह गदगद हृदय से सदा के लिए अपनी सास की ऋणी और सहयोगी बन गई ।

तो देखिए किसी के गल्ती को समा लेने से कितना फायदा हो गया । सास ने बहू का दिल जीत लिया । सदा के लिए उसे अपना बना लिया जो कार्य बड़ी से बड़ी भौतिक संपदा नहीं कर सकती वह कार्य  एक  सद्गुण ने कर दिया ।

समाना एक  सदगुण  होने के साथ-साथ एक शक्ति भी है । ईश्वर सर्व शक्तियों के स्त्रोत हैं । वे सर्वशक्तिमान् हैं । हम ईश्वर के सानिध्य में रह कर अष्ट शक्तियां प्राप्त कर सकते है ।

समाने की शक्ति से स्वतः हमारे अंदर विनम्रता व लचीलेपन के गुण का विकास होता है । जो हर परिस्थिति में लचीले बने रहते हैं वे तूफान ( समस्या ) के साथ अपने को झुका लेते हैं । तूफ़ान ( समस्याऐ) चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो ।

जैसे एक समुद्र में सारी नदियां समा जाती हैं । उनके द्वारा लाई हुई समस्त गंदगी को समुद्र अपने में समा ही नहीं लेता है वरन उन्हे भी समुद्र बना देता है । इसी तरह समाने की शक्ति से हमारा हृदय भी बेहद का हो जाता है ।