फेंफड़े सुकड़ जाना, सांस फूलना, दम्मा, खांसी,

फेंफड़े सुकड़ जाना, सांस फूलना, दम्मा, खांसी, ऑक्सीजन की कमी, डेमेज फेंफड़े को दुबारा स्थिति में लाने वाले ये पांच चीज के मिश्रण से बनने वाले महा-औषधि के नाम से जाना जाता है। इस्तेमाल का तरीका :- छवि में दिये गये सभी समाग्री को एक साथ मिलाकर पाउडर बनाकर किसी कांच की बर्तन में सुरक्षित रख दें। रोज़ाना सुबह शाम 200ml गुनगुने दूध में 5 ग्राम पाउडर को घोल कर पिये ये लगातार दो महीने करने से फेंफड़े की तमाम शिकायत हमेशा के लिये समाप्त हो जाती है।

चिलगोजा एक ऐसा ड्राई फ्रूट है

चिलगोजा एक ऐसा ड्राई फ्रूट है जिसके बारे में शायद ही आपने इससे पहले देखा और सुना होगा!

चिलगोजा एक ड्राई फूड है जो पिस्ता और बादाम के आकार का होता है लेकिन उससे थोड़ा बड़ा होता है। इसे अंग्रेजी में पाइन नट्स (Pine Nuts) कहते हैं। चिलगोजा को नियोजा भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम पाइनस गिरार्डियना है।

हिमाचल प्रदेश का एक प्यारा सा शहर है किन्नौर! यही पाये जाते है चिलगोजा के पेड़! खासकर टापरी से लेकर पूह तक केवल सतलुज नदि के किनारे ही पाया जाता है। किन्नौर के अलावा भारत में कश्मीर के छोटे से हिस्से में भी चिलगोजा पाया जाता है। उधर नेपाल, अफगानिस्तान और चीन में भी कुछ सीमित क्षेत्रों में चिलगोजा पाया जाता है।

किन्नौर में नेयोजा के नाम से मशहूर

चिलगोजा को किन्नौर में नेयोजा के नाम से जाना जाता है। पाइन नट्स नाम का यह पेड़ चीड़ के पेड़ से मिलता जुलता है। चिलगोजा के पेड़ का तना सफेद होता है जबकि चीड़ की तरह ही इसके कोन्स होते हैं जिसमें बीज लगते है। ऊंची चट्टानों, पहाड़ों और पत्थरों के बीच बड़े पेड़ों से इन कोन्स को निकालना आसान नहीं होता। काफी मेहनत के बाद निकले चिलगोजे को मार्किट में खरीदने के लिए व्यवसायी दूर--दूर से किन्नौर के मुख्यालय रिकांगपिओ पहुंचते हैं। चिलगोजा भारतीय बाजार में ही 2 हजार रूपये प्रति किलोग्राम से कीमत में बिकता है।

चिलागोजा वैज्ञानिक खेती नहीं हो पाई संभव

चिलगोजा की वैज्ञानिक खेती अभी तक संभव नहीं हो पाई है। वन विभाग और बागवानी विभाग इसकी अऩ्यत्र खेती के प्रयास में जुटा है लेकिन अब तक यह संभव नहीं हो पाया है। किन्नौर के इस क्षेत्र में भी हर साल हजारों नए पौधे रोपे जा रहे हैं, लेकिन उम्मीद के अनुरूप कम ही पौधे टिक पाते हैं। जानकारों का कहना है कि यदि इस पेड़ का वैज्ञानिक दोहन न हुआ और इसके संरक्षण पर विशेष ध्यान न दिया गया तो औषधीय तत्वों से भरपूर यह चिलगोजा विलुप्त हो सकता है।

चिलगोजा के फायदे में स्वास्थ्य संबंधित कई फायदे शामिल हैं, जो चिलगोजा खाने के फायदे के महत्व को दर्शाते हैं।

1. मधुमेह में

मधुमेह जैसी बीमारी में खान-पान का विशेष ध्यान देना पड़ता है, लेकिन यदि आप चिलगोजा का सेवन कर रहे हैं तो निश्चिन्त रहिये क्योंकि और इसमें मौजूद पोषक तत्वों से मधुमेह की समस्या में होने वाले खतरों को कई गुना तक कम किया जा सकता हैं।

एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक पाइन नट्स के प्रयोग से सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी देखी गई। चिलगोजा में कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नेशियम जैसे मिनरल्स मौजूद होते हैं (2)। एक अन्य वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार यह पाया गया कि उपरोक्त तत्वों वाले नट का सेवन अगर किया जाए तो यह डायबिटीज के खतरे को कम कर सकते हैं 

2. ह्रदय स्वास्थ्य में

चिलगोजा खाने का तरीका, हृदय स्वास्थ्य में भी लाभदायक हो सकता है। चिलगोजा एक नट है और एक वैज्ञानिक शौध के अनुसार नट पदार्थों का सेवन करने से हृदय संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो सकता है (3)। एक अन्य अध्ययन की मानें तो पाइन नट्स के अंदर मौजूद पोषक तत्व हृदय संबंधी कई रोगों में कमी देखी गई (4)।

चिलगोजा में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने का गुण मौजूद होते हैं। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार चिलगोजा में मौजूद पॉली अनसैचुरेटेड फैट कोलेस्ट्रॉल को कम कर हृदय रोगों से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं

3. कोलेस्ट्रॉल के लिए

चिलगोजा खाने का तरीका इस्तेमाल कर कोलेस्ट्रॉल को संतुलित किया जा सकता है, क्योंकि चिलगोजा में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बिल्कुल भी नहीं होती है और यही वजह है कि चिलगोजा का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल में बढोत्तरी होने का खतरा कम हो सकता है

4. वजन संतुलित करने में

वजन नियंत्रित रखने में भी चिलगोजा खाने के फायदे देखे जा सकते हैं। एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक चिलगोजा से बने हुए तेल का सेवन वजन घटाने में अहम भूमिका निभा सकता है। दरअसल, चिलगोजा में पिनोलेनिक एसिड मौजूद होता है और यह 14 से 19 प्रतिशत फैटी एसिड को प्रदर्शित करता है। यह एसिड भूख को नियंत्रित कर वजन को कम करने में मदद कर सकता है (6)। एक अन्य वैज्ञानिक शोध के मुताबिक भी यह कहा गया है कि रोजाना नट पदार्थों के सेवन से वजन घटाने में मदद मिल सकती है 

5. कैंसर में

चिलगोजे के फायदे कैंसर जैसी गंभीर बिमारी में भी देखने को मिल सकते हैं। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, कैंसर जैसी बीमारी से बचने के लिए नट पदार्थों का सेवन लाभदायक हो सकता है (7)। शोध के अनुसार, पाइन नट्स में रेस्वेराट्रोल नमक एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होता है, जो कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, पाइन नट्स में उपस्थित फोलिक एसिड डीएनए (DNA) की क्षति को कम कर सकता है 

6. मस्तिष्क स्वास्थ्य में

मस्तिष्क स्वास्थ्य में चिलगोजा खाने के फायदे प्रभावकारी रूप में देखे जा सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार चिलगोजा में ओमेगा-3 एसिड पाया जाता है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को बेहतरीन रूप से चलाने के लिए उपयोगी माना जाता है। चिलगोजा खाने से ओमेगा- 3 फैटी एसिड्स मस्तिष्क के बेहतरीन संचालन, याददाश्त को मजबूत बनाने का काम कर सकता है

7. हड्डियों के लिए

चिलगोजा खाने के फायदे हड्डियों की मजबूती के लिए भी देखे जा सकते हैं, क्योंकि चिलगोजा में मौजूद फैटी एसिड हड्डियों के विकास और मजबूती में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार चिलगोजा में पाया जाने वाला ओमेगा-6 फैटी एसिड्स हड्डियों को स्वस्थ रखने के साथ – साथ गठिया जैसे रोग में भी आराम पहुंचा सकता है (9)। इसके अलावा चिलगोजे के फायदे में कैल्शियम भी शामिल है जो हड्डियों की मजबूती और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

8. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी चिलगोजा का प्रयोग किया जा सकता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार चिलगोजे में जिंक मौजूद होता है, जो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने का काम करता है 

9. आंखों की देखभाल के लिए

चिलगोजे के फायदे में आंखों की देखभाल भी शामिल हो सकते हैं। एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक आंखों की देखभाल के लिए अगर आप चिलगोजा का सेवन कर रहे हैं, तो इसमें मौजूद ओमेगा-3 आपकी आंखों की मदद कर सकता है। यह आपकी आंखों की नाईट विजन (दृष्टि) और कलर विजन की क्षमता का विकास कर सकता है (9)। इसके अलावा चिलगोजा में विटामिन- ए भी पाया जाता है, जो आंखों की रेटिना में रंजक (आंखों को विभिन्न रंगों को पहचानने की क्षमता) का विकास करता है (2), (11)। इसलिए आंखों की देखभाल के लिए चिलगोजा का प्रयोग किया जा सकता है।

10. एंटीऑक्सीडेंट के तौर पर

एंटीऑक्सिडेंट्स हमारी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने से बचाते हैं। अगर आप चिलगोजा का सेवन कर रहे हैं तो निश्चिंत हो जाइए, क्योंकि चिलगोजे में एंटीऑक्सीडेंट्स (विटामिन ए , विटामिन सी और विटामिन ई) भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं 

11. भूख नियंत्रित रखने में

वजन को संतुलित रखने के लिए भी चिलगोजा खाने के फायदे देखे जा सकते हैं। जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं कि चिलगोजे में पिनोलेनिक नामक फैटी एसिड पाया जाता है, जो भूख को नियंत्रित करने का काम कर सकता है (13)।

इसके अलावा एक वैज्ञानिक शोध में देखा गया है, कि पाइन नट दो खास हार्मोन सीसीके और जीएलपी-1 को बढ़ाने का काम करता है, जो भूख को नियंत्रित करने का काम कर सकते हैं (

12. त्वचा के लिए

त्वचा के लिए भी चिलगोजे के फायदे आपको लाभ पहुंचा सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक चिलगोजा का इस्तेमाल त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह विटामिन-सी (एस्कॉर्बिक एसिड) का अच्छा स्रोत होता है। विटामिन सी एक एंटीऑक्सीडेंट्स है, जो सूर्य की हानिकारक किरणों से त्वचा की रक्षा करता है। साथ ही विटामिन सी त्वचा में कोलेजन को बढ़ाता है और एजिंग को कम करता है 

इसके अलावा चिलगोजे में मौजूद मैंगनीज त्वचा को मुक्त कणों (Free Radicals) से दूर रखने का काम भी कर सकता है (9)।

13. बालों के स्वास्थ्य के लिए

बालों के स्वास्थ्य के लिए भी चिलगोजा खाने के फायदे देखे जा सकते हैं। चिलगोजे में पाया जाने वाला ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड बालों के विकास के लिए उपयोगी हो सकता है (9)। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, ओमेगा-6 फैटी एसिड बालों को झड़ने से रोकने में मदद करता है और बालों को घना बनाने में भी सहयोग कर सकता है ।

पैरालायसिस का अटैक आते ही जो कर लिया

पैरालायसिस का अटैक आते ही जो कर लिया बस ये 1 उपाय, शरीर को छू भी नहीं पाएगा ये रोग... बच जाएंगे आप.!

लकवा (Paralysis) एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर के एक हिस्से या पूरे शरीर में अस्थायी या स्थायी मूवमेंट (चलने-फिरने) की क्षमता समाप्त हो जाती है।यह आमतौर पर मस्तिष्क में रक्त प्रवाह के रुकने, नसों के दबने या चोट लगने के कारण होता है।अगर लकवे का अटैक अचानक आए, तो तुरंत कुछ उपायों को अपनाकर आप स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं और बड़ी समस्या से बच सकते हैं।

लकवा आने पर तुरंत करें ये उपाय:1. तुरंत 911 (या आपातकालीन नंबर) पर कॉल करें: अगर लकवा का अटैक आ जाए, तो सबसे पहला कदम यह है कि आप किसी डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करें। अपने नजदीकी आपातकालीन नंबर पर कॉल करें और जल्दी से जल्दी मदद प्राप्त करने की कोशिश करें।

2. तुरंत सिर को सीधा रखें: अगर लकवा का अटैक आ गया है, तो व्यक्ति को सिर को सीधा और आराम से रखें। सिर को झुका हुआ या खड़ा न रखें, क्योंकि यह रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।

3. पानी का सेवन न करें: अगर व्यक्ति लकवा का शिकार हो गया है, तो उसे पानी, खाना या कोई अन्य तरल पदार्थ न दें, क्योंकि ये उसके गले में फंस सकते हैं और घातक हो सकते हैं।

4. मालिश और प्राणायाम: अगर आप लकवे से बचना चाहते हैं, तो नियमित रूप से सिर, गर्दन और हाथों की हल्की मालिश करें। इसके साथ ही प्राणायाम (योग का अभ्यास) करने से रक्त संचार बेहतर रहता है और लकवा के खतरे को कम किया जा सकता है।

5. सामने के हिस्से को आराम दें: यदि लकवा अचानक आ जाता है और शरीर के एक हिस्से में कमजोरी महसूस होती है, तो उस हिस्से को आराम देना जरूरी है। जैसे ही शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो, उस हिस्से को हल्का सा सहारा दें ताकि वह जकड़े न।

6. स्ट्रोक (stroke) के लक्षण पहचानें: लकवा और स्ट्रोक के लक्षण लगभग समान हो सकते हैं। स्ट्रोक का एक सामान्य लक्षण अचानक चेहरे का टेढ़ा होना, आंखों में धुंधलापन या बोलने में कठिनाई हो सकती है। इन लक्षणों को पहचान कर जल्दी इलाज करवाना आवश्यक है।

7. हल्के आहार का सेवन करें: व्यक्ति को हल्का और सुपाच्य आहार देना चाहिए, जैसे दाल, सूप या तरल आहार, ताकि उसका पाचन सही रहे और शरीर में अधिक भारीपन न आए।

8. आयुर्वेदिक उपचार और हर्बल उपाय:

आंवला – आयुर्वेद में आंवला को बहुत फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह शरीर के तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है।
हल्दी – हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर के तंत्रिका तंत्र को सही रखने में मदद करते हैं।
ब्राम्ही – ब्राम्ही को तंत्रिका तंत्र के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यह मानसिक स्थिति को शांत करता है और लकवे के खतरे को कम करता है।
9. पारंपरिक उपाय:

ध्यान और योग – मानसिक शांति के लिए ध्यान (meditation) और योग का अभ्यास करें। इससे तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अश्वगंधा – यह आयुर्वेदिक हर्ब शरीर को ताकत और ऊर्जा प्रदान करता है, जो लकवा जैसी स्थितियों में सहायक हो सकता है।
10. समय से पहले इलाज: लकवा का सबसे अच्छा इलाज समय पर किया गया इलाज है। अगर आपको या आपके आसपास किसी को लकवा आने का खतरा महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें और सही जांच करवाएं। समय रहते इलाज से लकवे के असर को कम किया जा सकता है।

लकवा एक गंभीर और खतरनाक स्थिति हो सकती है, लेकिन सही समय पर किए गए उपायों से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब भी लकवा का अटैक आए, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें और उसे गंभीरता से लें। साथ ही, नियमित योग, प्राणायाम, सही आहार और जीवनशैली से लकवा जैसी स्थितियों से बचा जा सकता है।

अर्जुन के पेड़ मानव शरीर के लिये औषधि गुण

अर्जुन के पेड़ मानव शरीर के लिये औषधि गुण से भरा हुआ है पत्ते फल फूल छाल सभी औषधि प्रयोग में आता है । 
अगर आपका हार्ट 80% ब्लॉकेज हो गया है डॉक्टर स्टैंड लगाने का अनुमति दे चूका है तो आप इस नुस्खे को आजमाकर देखे तरीका :-
1.अर्जुन की छाल 100 ग्राम 
2. दालचीनी          50 ग्राम 
3. तेज पत्ता           20 ग्राम 
4.मेथी दाना           50 ग्राम 
5.कालोंजी             50 ग्राम 
6.अलसी बीज        50 ग्राम 
सभी मिलाकर कूटकर दरदरा पाउडर बना लें ज्यादा बारीक़ पाउडर ना बनाये। रात को 400ml पानी को किसी ताम्बा के बर्तन में डाल कर 10 ग्राम इस चूर्ण को भिगो दें सुबह इस पानी को छानकर दो हिस्से में बाँट लें आधा सुबह आधा शाम को खाली पेट इस्तेमाल करें। रोजाना दो से तीन महीने तक करने से किसी भी प्रकार का ब्लॉकेज ह्रदय हो या नस पूरी तरह खुल जाती है ।
गर हार्ट बिट 50 से भी कम है तो आप अनारदाना एक चम्मच , पुदीना 10 ,15 gram पत्ते और लहसुन चार दाने 1 इंच अदरक का टुकड़ा हरी मिर्च एक या दो स्वाद अनुसार इसकी सिल पर पीस का चटनी बनाकर रोज खाएं  एक समय खाने के साथ जरूर खाएं  ज्यादा मेहनत का काम ना करें  मॉर्निंग वॉक जरूर करें  लेकिन बहुत ज्यादा नहीं दौड़े नहीं  और डॉक्टर से सलाह जरूर ले ।

सत्यानाशी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है

भारत में "सत्यानाशी" का पौधा हर जगह पैदा होता हैं।  यह एक कांटेदार पौधा हैं। इसके किसी भी भाग को तोड़ने से उसमें से स्वर्ण सदृश, पीतवर्ण (पीले रंग) का दूध निकलता हैं, इसलिए इसे स्वर्णक्षीरी भी कहते हैं। सत्यानाशी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है।इसके फूल, पत्तियों और जड़ों में गजब के गुण पाए जाते हैं ।इस पौधे का उपयोग आयुर्वेद में सदियों से किया जा रहा है।

■ सत्यानाशी के पौधे का औषधीय उपयोग :-

• त्वचा रोगों में – इसके दूधिया रस का उपयोग खुजली, फोड़े-फुंसी और अन्य त्वचा रोगों के इलाज के लिए किया जाता हैं।

• जोड़ों के दर्द में – इसके तेल और अर्क को जोड़ों के दर्द और सूजन में लाभकारी माना जाता हैं।

• कफ और अस्थमा में – इसके अर्क का उपयोग श्वसन संबंधी समस्याओं में किया जाता हैं।

• कुष्ठ रोग में – आयुर्वेद में तथा भारतीय समाज में इसका प्रयोग कुष्ठ रोगों में भी किया जाता रहा हैं।

• घाव भरने में – यह इतना गुणी पौधा हैं कि कितना भी पुराना घाव हो उसे चुटकियों में ठीक कर देता हैं। यह बांझपन में भी उपयोगी हैं।

• यकृत विकारों में – पारंपरिक आयुर्वेद में इसे लीवर रोगों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता हैं।

■ नियंत्रण और सावधानियाँ :-
सत्यानाशी का पौधा विषाक्त होने के कारण खेती के लिए उपयुक्त भूमि से हटा दिया जाता है, और इसके औषधीय उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले।