यदि तुम अप्रसन्न हो तो इसका सरल सा अर्थ यह है कि

यदि तुम अप्रसन्न हो तो इसका सरल सा अर्थ यहहै कि तुम अप्रसन्न होने की तरकीब सीख गए हो। और कुछ नहीं! अप्रसन्नता तुम्हारे मन के सोचने के ढंग पर निर्भर करतीहै। यहां ऐसे लोग हैं जो हर स्थिति में अप्रसन्न होते हैं। उनके मन में एक तरह का कार्यक्रम है जिससे वे हर चीज को अप्रसन्नता में बदल देते हैं। यदि तुम उन्हें गुलाब की सुंदरता के बारे में कहो, वे तत्काल कांटों की गिनती शुरू कर देंगे। यदि उन्हें तुम कहो, "कितनी सुंदर सुबहहै, कितना उजला दिनहै!' वे कहेंगे, "दो अंधेरी रातों के बीच एक दिन, तो इतनी बड़ी बात क्यों बना रहे हो?'ली इसी बात को विधायक ढंग से भी देखा जा सकताहै; तब अचानक हर रात दो दिनों से घिर जातीहै। और अचानक चमत्कार होताहै कि गुलाब संभव होताहै। इतने सारे कांटों के बीच इतना नाजुक फूल संभव हुआ!

सब इस बात पर निर्भर करताहै कि किस तरह के मन का ढांचा तुम लिए हुए हो। लाखों लोग सूली लिए घूम रहे हैं। स्वाभाविक ही, निश्चित रूप से, वे बोझ से दबे हैं; उनका जीवन बस घिसटना मात्रहै। उनका ढांचा ऐसाहै कि हर चीज तत्काल नकारात्मक की तरफ चली जातीहै। यह नकारात्मक को बहुत बड़ा कर देताहै। जीवन के प्रति यह रुग्ण, विक्षिप्त, रवैयाहै। लेकिन वे सोचते चले जाते हैं कि "हम क्या कर सकते हैं? दुनिया ऐसी हीहै।'

नहीं, दुनिया ऐसी नहींहै! दुनिया पूरी तरह से तटस्थहै। इसमें कांटे हैं, इसमें गुलाब के फूल हैंै, इसमें रातें हैं, इसमें दिन भी हैं। दुनिया पूरी तरह से तटस्थहै, संतुलित--इसमें सब कुछहै। अब यह तुम्हारे ऊपर निर्भर करताहै कि तुम क्या चुनते हो। इसी तरह से लोग इसी पृथ्वी पर नर्क और स्वर्ग दोनों ही पैदा करते हैं।

ओशो🌺🌺🌺

अपनी आदतों को कैसे बदले

ϒ अपनी आदतों को कैसे बदलें। ϒ

♥ ज़िंदगी बहुत छोटी है इसलिए समय बर्बाद मत करो। ♥

प्यारे दोस्तों – ज़िंदगी बहुत छोटी है इसलिए समय बर्बाद मत करो। समय के महत्व काे समझे व समय के साथ-२ चलने का अभ्यास करें। अपने Mind काे कुछ इस तरह से खुराक दें।

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अधिकतर लाेग अपनी आदताें काे खुद पर नियंत्रण करने की अनुमति दे देते हैं। अगर वे आदतें बुरी हाें, ताे उनके नज़रियाें पर नकारात्मक असर डालती हैं।
किसी भी इंसान के Mind काे काेई भी दृढ़ आदत डालने में कम से कम 21 दिन लगते हैं।

इंसान का Mind किसी भी प्रकार के कर्म काे निरंतर 21 दिनों तक करता रहता है ताे – आगे वह कर्म स्वतः ही बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के निरंतर चलता रहता हैं।

आज के मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या यह है कि काेई भी आदत डालने का संकल्प ताे ले लेते है, पर वह संकल्प दृढ़ नहीं हाेता – जिस कारण किसी भी नई आदत काे प्रारंभ करने के 3-7 दिन या ज्यादा से ज्यादा 15 दिनों तक ही करता है, उसके बाद अपने उन्हीं पुरानी आदताें पर वापस आ जाता हैं।  नये वर्ष (New Year’s) के प्रारंभ हाेने पर जिन नये आदताें काे डालने का संकल्प लिए जाते है वो इसी श्रेणी(category) में आते है।

किसी भी नई आदत काे डालने का सबसे कारगर तरिका यह है की उस आदत के लिये Mind काे आंतरिक रूप से तैयार करें।

काेई भी नई आदत डालने में आजकल के लाेग सबसे बडी गलती यह करते है कि पहले ही दिन से ज्यादा समय देना चाहते है उस आदत काे डालने के लिये।

For Example ….. A संकल्प लेता है कि अब मैं प्रतिदिन सुबह जल्दी उठूंगा, 4 बजे भाेर में ही, पर हाेता क्या हैं, पहले दिन….. दूसरे दिन ….. उठता है ….. तीसरे दिन साेया ही रहता है। अब गलती कहाँ पर हुई …(याद रखें कि – A पहले सुबह 6 बजे उठता था।) A से गलती यह हुई की उसने पहले ही दिन से 4 बजे उठने की काेशिश की, जबकी ऐसा नहीं करना था। …. A काे सुबह 4 बजे उठने के लिये कुछ इस तरह से अभ्यास करना चाहिए था… पहले दिन 5:45 पर… दूसरे दिन 5:30 पर …. तीसरे दिन 5:15 पर … चाैथे दिन 5:00 पर …. व पांचवें दिन 4:45 पर ….. तथा आगे के दिनों में 15 मिनट कम करते-करते आठवे दिन 4 बजे उठने लगता।

15 मिनट पहले उठने के अंतर काे इंसानी शरीर सरलता पूर्वक सह लेता है इससे ज़्यादा नहीं।

परिवर्तन की चुनाैती के प्रेम में पड़ें और परिवर्तन की इच्छा काे बढ़ते हुए देखें।
बुरी आदतों काे धीरे-धीरे छाेडते जाये व उनकी जगह एक-एक अच्छी आदतों काे डालते जाये। एक दिन ऐसा आयेगा जब आपके Mind के अंदर मात्र अच्छी आदतों का भंडार हाेगा।

नज़रिया और कुछ नहीं, विचार की आदत है। चाहे वे अच्छी हाें या बुरी, आदत डालने की प्रक्रिया समान रहती है। सफल हाेने की आदत डालना भी उतना ही आसान है, जितना कि असफल हाेने की आदत डालना।

हम सभी अपनी आदतों की वजह से अपनी ज़िंदगी में खुशियाँ पा सकते हैं या फिर मुश्किल में भी पड़ सकते हैं।

Om shanti

मौत पर विजय

https://youtu.be/uTK91BWgutM