जीवन में हम दूसरों की चिंता न करें।

जीवन में हम दूसरों की चिंता न करें।
सजगता से अपने चुने हुये पथ पर
आगे बढ़ते जायें। चाहे कोई कुछ भी
क्यूँ न कहे। लोगों का तो काम ही है-
कुछ न कुछ कहना।
...कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का
काम है कहना।
दुनिया में एक बहुत बड़ी आफत है और
वो ये है कि- "लोग क्या कहेंगे" चाहे जीवन
बिगड़ जाये,चाहे कितना भी दुःख क्यों न
मिल जाये, चाहे चौरासी लाख योनियों में
ही क्यों न भटकना पड़े। पर लोग क्या कहेंगे
इसकी हमे बहुत फिकर है। उसके लिये हम
अपना कर्तव्य,अपना धर्म,अपना फर्ज सब
भूल जाते हैं। जब तक हम लोगों की फिकर
करेंगे तब तक हम कभी भी अपना विकास
नहीं कर सकते हैं। इसलिये दुनिया की-
परवाह छोड़ो और अपने लक्ष्य पर आगे
बढ़ो।

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

नन्ही चींटीं जब दाना ले कर चढ़ती है
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगॊं मे साहस भरता है
चढ़ कर गिरना, गिर कर चढ़ना न अखरता है
मेहनत उसकी बेकार नहीं हर बार होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

डुबकियाँ सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा-जा कर खाली हाथ लौट कर आता है
मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दूना विश्वास इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गयी देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो नींद-चैन को त्यागो तुम
संघर्षों का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किए बिना ही जय-जयकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

भगवान का पता चल गया कि कहाँ रहता है ?

गजराज ( हाथी ) का पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया तो उसने हरि को पुकारा । हरि नंगे पाँव दौड़े आये और मगरमच्छ का वध कर गज को मुक्त कराया।।
          दुशासन ने द्रोपदी का चीर हरण किया तो उसने भी हरि को पुकारा हरि ने आकर उसको भी बचाया ।

         होलिका ने प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की तो प्रह्लाद ने हरि को पुकारा हरि उसको भी बचाने आया ।

        गोकुल ग्रामवासियों ने इंद्र के प्रकोप बाढ़ से बचाने हरि को बुलाया, हरी ने गोवेर्धन पर्वत एक उँगली से उठाकर उनको बचाया ।और दो चार आप खुद जोड़ लीजिये।
अब वास्तविक घटनाओं पर आ जाइये

            #महमूद गजनवी#ने भारत पर 17 आक्रमण किये,सोमनाथ का मंदिर लूटा और भयानक मार काट की । "भक्तो" ने फिर भगवान को पुकारा ।
"गजनवी "के सैनिक रक्तपात करते रहे लेकिन कोई भगवान नही आया ???? क्यूँ ?

        भारत पर हमला करने शक, तुर्क, गौरी, ख़िलजी, तुगलक, सैयद, लोदी, मुग़ल , डच, अंग्रेज़ आये......
      लेकिन "भारत" भूमि को लम्बी गुलामी से बचाने कोई हरि नहीं आये ? क्यूँ ?

"औरंगज़ेब" ने आपके भक्तों को मार मारकर :मुसलमान :बनाया
       लेकिन  सहायता के लिये हरि  नहीं आये ???क्यों ???
     बेचारे भक्त केदारनाथ दर्शन के लिये गये ।अब केदारनाथ में प्रलय आ गयी ।
       20,000 भक्त मारे गए। भक्त फिर भगवान को सहायता के लिए पुकारते रहे लेकिन कोई भगवान नही आया ।
     भक्त मरते रहे और भगवान देखते रहे ?? आपने सिर्फ अपना घर यानि (मंदिर )भी नही बचाया ??
      
अब" नेपाल" में भूकंप आया । भक्त फिर भगवान से प्रार्थना करने लगे लेकिन कोई भगवान नही आया बचाने ?

        इससे पहले भी भूकंप दंगे फसाद या कोई अन्य त्रासदी होने पर भी सब भगवान को पुकारते रहे लेकिन कभी कोई भगवान नही आया ।

           इससे क्या सिद्ध होता है ?
इससे सिर्फ एक ही बात सिद्ध होती है कि भगवान बचाने को तो आता है लेकिन सिर्फ ;""मिथकीय/झूंठे किस्से कहानियों ""में ।
            अब अगला सवाल होता है कि भगवान कब सहायता करने आता हैं ?
       सीधी सी बात है जब "कहानी "
लिखने वाला भांग खाकर लिखने लग जाये तब।
       अगला सवाल भगवान किसकी मदद करता है ?

    अतः निष्कर्ष कहता है क़ि भगवान पौराणिक कथाओं के सिर्फ अपने जैसे ही काल्पनिक पात्रों की रक्षा करता हैं ।

         अगला सवाल भगवान कहाँ रहता है ?

ईश्वर का अस्तित्व मानव मस्तिष्क के अलावा कहीं नहीं है।

पशु पक्षी भगवान से नहीं डरते मनचाहा करते है।।

      वो कुछ लोगों के दिमाग में "डर "के रूप में बसे होने के अतिरिक्त मिथकीय (झूठे) किस्से कहानियों में ही रहता है ।

        इन तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष यह निकलता है कि यथार्थ और वास्तविकता के धरातल पर
""""" न तो कभी किसी ने ईश्वर को देखा है और ना ही कभी कोई भगवान किसी की मदद करने आयें है ।आज तक मनुष्य ने जो भी प्राप्त किया है वो उसने अपने कर्म के बलबूते ही प्राप्त किया है वाकि उस फल को हम लोग ही ईश्वर से जोड़ने का आडम्बर करते हैं।इसलिए कर्मफल पर ध्यान केंद्रित करना परम् आवश्यक है। """"""
डर का दूसरा नाम ??       समझे कुछ....भगवान !

और डर के आगे ?...?...क्या है ..? जीत है भाई जीत.….समझे ?

        अन्ध विश्वास भगाओ ।
        जागो और जगाओ!
         देश  और  समाज बचाओ ।

रात के एक बजा था, एक सेठ को नींद नहीं आ रही थी

रात के एक बजा था, एक सेठ को नींद नहीं आ रही थी,
वह घर में चक्कर पर चक्कर लगाये जा रहा था।
पर चैन नहीं पड़ रहा था ।
आखिर मैं थक कर नीचे उतर आया और कार निकाली
शहर की सड़कों पर निकल गया। रास्ते में एक मंदिर दिखा सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में जाकर भगवान के पास बैठता हूँ।
प्रार्थना करता हूं तो शायद शांति मिल जाये।

वह सेठ मंदिर के अंदर गया तो देखा, एक दूसरा आदमी पहले से ही भगवान की मूर्ति के सामने बैठा था, मगर उसका उदास चेहरा, आंखों में करूणा दर्श रही थी।

सेठ ने पूछा " क्यों भाई इतनी रात को मन्दिर में क्या कर रहे हो ?"

आदमी ने कहा " मेरी पत्नी अस्पताल में है, सुबह यदि उसका आपरेशन नहीं हुआ तो वह मर जायेगी और मेरे पास आपरेशन के लिए पैसा नहीं है "

उसकी बात सुनकर सेठ ने जेब में जितने रूपए थे  वह उस आदमी को दे दिए। अब गरीब आदमी के चहरे पर चमक आ गईं थीं ।

सेठ ने अपना कार्ड दिया और कहा इसमें फोन नम्बर और पता भी है और जरूरत हो तो निसंकोच बताना।

उस गरीब आदमी ने कार्ड वापिस दे दिया और कहा
"मेरे पास उसका पता है " इस पते की जरूरत नहीं है सेठजी

आश्चर्य से सेठ ने कहा "किसका पता है भाई
"उस गरीब आदमी ने कहा
"जिसने रात को ढाई बजे आपको यहां भेजा उसका"

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कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है🍶

*🍶कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है🍶*

                         *सोना*

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

                        *चाँदी*

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है  इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

                           *कांसा*

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

                         *तांबा*

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

                        *पीतल*

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

                         *लोहा*

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से  शरीर  की  शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

                         *स्टील*

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता।

                      *एलुमिनियम*

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

                           *मिट्टी*

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।