संस्कृत के चोर अंग्रेज

संस्कृत के चोर अंग्रेज

मनु = मैन
पितर = फादर
मातर = मदर
भ्रातर =ब्रदर
स्वसा = सिस्टर
दुहितर = डाटर
सुनु = सन
विधवा = विडव्
अहम् = आई एम
मूष = माउस
ऋत =राइट
स्वेद = स्वेट (पसीना )
अंतर =अंडर (नीचे ,भीतर )
द्यौपितर = जुपिटर (आकाश , बृहष्पति)
पशुचर =पाश्चर (चरवाहा )
दशमलव =डेसिमल
ज्यामिति = ज्योमेट्री
पथ =पाथ (रास्ता )
नाम =नेम
वमन=vomity=उल्टी करना
द्वार > डोर (door)
हृत > हार्ट (heart)
द्वि > two
त्रि > three
पञ्च > penta > five
सप्त > hept > seven
अष्ट > oct > eight
नव > non > nine
दश > deca > ten
दन्त > dent
उष्ट्र > ostrich
गौ > cow
गम् > go
स्था > stay
अक्ष- axis
सप्त अम्बर- september
अष्ट अम्बर- october
नबं अम्बर- november
दशं अम्बर- december
इससे यह भी पता चलता है
की december
12वाँ नहीं 10वाँ महीना है
जो हिन्दी महीनों के अनूरूप है।
एक और शब्द है,
रथ - rad (जर्मन में पहिये को rad कहते है)
इसी से radius बना है।
संस्कृत ही मूल भाषा है, अन्य
सभी उसके अपभ्रंश एवं विकृत रूप हैं।


पौधा रोपण कार्यक्रम

sat fiundation की ओर से कालोनी के पार्क में 12वीं त्रिवेणी लगाई गई ,नगर निगम के ईओ धीरज कुमार, संस्था के अध्यक्ष सतेंद्र कुमार ने बारी-बारी से तीनों पौधे रोपित किए ! इस मौके पर ईओ धीरज कुमार ने कहा कि त्रिवेणी ब्रह्मा, विष्णु व महेश के प्रतीक है ! इसलिए त्रिवेणी लगाना ही नहीं, बल्कि उसकी देखभाल करना भी हमारा कर्तव्य है ,पेड़ हमारा जीवन है। बिना पेड़ के हम जीवत नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को त्यौहार व जन्मदिन पौधरोपण करके मनाना चाहिए। तभी त्यौहार का सही महत्व होगा। संस्था के  अध्यक्ष  सतेंद्र कुमार ने कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से त्रिवेणी लगानी अति आवश्यक है !

त्रिवेणी के पौधे का भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में भी बड़ा महत्व बताया गया है। उन्होंने कहा कि पौधे प्रदूषण को रोकने के अलावा मनुष्य का जन्म से मृत्यु तक साथ देते हैं। त्रिवेणी कार्बनडाइआक्साइड जैसी जहरीली गैसों को शोषित कर आक्सीजन गैस प्रदान करती है। अतुल्य योग नेचरक्योर एवं आयुर्वेद पंचकर्मा केंद्र के संचालक डा. देवेंद्र यादव ने त्रिवेणी लगाकर केंद्र की शुरूआत की। हवन करवाया गया। डा. देवेंद्र ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देना समय की मांग है। प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति लोग जागरूक हुए हैं। इस विधि से स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के लिए करनाल में यह केंद्र खोला गया है। उल्लेखनीय कि सत फॉउंडेशन ने वातावरण को प्रदूषण से बचाने, लोगों में जागृति पैदा करने और हरियाणा को हराभरा बनाए रखने के लिए त्रिवेणी लगाने की मुहिम शुरू की थी। करनाल के साथ-साथ कुरुक्षेत्र, कैथल के पुलिस थानों, स्कूलों सहित कई शैक्षणिक व धार्मिक संस्थानों में त्रिवेणी रोपित करने का कार्य निरंतर जारी है। इस अवसर पर

बोल की कीमत अनमोल है

हर एक इंसान की पहचान उसके
बोल के द्वारा ही होती है।
भक्तिमार्ग का सम्पूर्ण आधार भी
एक बोल पर ही निर्भर है। और
मालिक के शब्द की परख भी
अपने बोल के द्वारा ही होती है।
बोल ही अनमोल है। फिर भी
हम इस बोल की कीमत और
कदर नहीं करते हैं। रात दिन
व्यर्थ की बातों में अपना समय
गंवाते हैं। और अपने बोल के
द्वारा दूसरों को कष्ट पहुंचाते
हैं और खुद भी कष्ट पाते हैं।
सारा जीवन समाप्ति की
कगार पर पहुँच जाता है फिर
भी हम बोलना नहीं सीख
पाते हैं। तो भाइयों,मेरे मित्रों
जिसने बोलना सीख लिया,
उसने सबको जीत लिया।

जागरूकता अभियान

💠मरना सभी को है...​..लेकिन मरना कोई नहीं चाहता...​💠

😭आज परिस्थिति और भी विषम हैं​😭

✅भोजन सभी को चाहिए लेकिन..​__​खेती करना कोई नहीं चाहता​__​

✅पानी सभी को चाहिए लेकिन..​__​पानी बचाना कोई नहीं चाहता..​__​

✅दूध सभी को चाहिए लेकिन ...​__​गाय पालना कोई नहीं चाहता...​__​

✅छाया सभी को चाहिए लेकिन...​__​पेड़ लगाना और उसे​ जिन्दा रखना कोई नहीं चाहता...​__​

✅बहु सभी को चाहिए पर...​__​बेटी बचाना कोई नहीं चाहता...​

😡😡मेसेज पढ़कर वाह वाह करना सभी जानते हैं​__​लेकिन जागरूकता फैलाने के लिए फॉरवर्ड करना कोई नहीं चाहता।।

💪🔥💪उठो और काम करो आज ही काम में लग जाओ।।।

सबसे बुरा नशा है मन का

सबसे बुरा नशा है मन का!!

साहिब कह रहे हैं कि पूरी दुनिया नशे में है|  किसी को 'क्रोध' का नशा है, किसी को 'लोभ' का नशा है, किसी को 'मोह' का नशा है, किसी को 'अहंकार' का नशा है, किसी को 'धन' का नशा है, किसी को 'शिक्षा' का नशा है, किसी को 'सुंदरता' का नशा है, इत्यादि| व्यक्ति खुद नहीं जानता है कि उसमें यह 'नशा' आया कहाँ से? यह पूरा नशा एक ही का है - 'मन' का| जब तक व्यक्ति 'मन' के नशे में है तब तक इसे किसी भी दृष्टि से 'बुद्धिमान' नहीं माना जा सकता है|

    🌹सतनाम🌹